Yahudi Ki Vasiyat | vasiyat story in hindi- यहूदी की वसीयत कहानी।

यूनान के एक शहर में एक यहूदी का परिवार रहता था। उसके छोटे से परिवार में एक उसका बेटा और उसकी पत्नी थी ,केवल तीन लोग ही रहते थे। यहूदी पुरे शहर में अमीर व्यक्ति था। लेकिन यहूदी को  शराब पिने का बहुत शौक था। अत्यधिक शराब के सेवन के चलते उसकी तबियत ज्यादातर खराव रहती ,लेकिन यहूदी शराब पीने की आदत नही छोड़ता। और अत्यधिक शराब पीने के कारण एक दिन  यहूदी  अचानक बहुत बीमार पड़ गया  और  उसका  बेटा  किसी  काम के कारण वश किसी दूसरे शहर में गया  था। (Yahudi Ki Vasiyat)

 

Yahudi Ki Vasiyat

यहूदी को लगा की मै मरने वाला हू ,उससे पहले उसने बसीयत लिखने की इच्छा जताई। और  उसका मुख्य सेवादार अथवा गुलाम यहूदी के मरते समय उसके सिरहाने खड़ा था ,जब यहूदी रने लगा तब उसने वसीयत लिखाई कि मेरी सारी जायदाद और खजाने का मालिक मेरा मुख्य गुलाम होगा पर सारी संपत्ति में से कोई सी भी एकचीज मेरा बेटा लौटकर ले सकेगा (Yahudi Ki Vasiyat)

Yahudi Ki Vasiyat | यहूदी की वसीयत !

यह कहकर यहूदी ने अपना शरीर छोड़ दिया। यहूदी के मरने से  उसका मुख्य गुलामबहुतखुशहुआ। और उसके मुख्य गुलाम ने यह सोचकर ख़ुशी-ख़ुशी यहूदी का अंतिम  संस्कार किया की मै  अब यहूदी की सारी जमीन , जायदाद और खजाने  का मालिक बन गया । 

yahudi ki vasiyat | यहूदी की वसीयत


और यहूदी के बेटे के लौटने का इंतजार करता रहा ,एक महीने बाद  जब  यहूदी  का  बेटा अपने शहर लौटा, तो उसके पिता के मरने की खबर  मिलीं  तो उसके दिल को बहुत बड़ा आघात पंहुचा। जब पुत्र ने पूछा की मेरे पिता का अंतिम संस्कार किसने किया। तब उसके मुख्य  गुलाम ने कहा कि  अंतिम संस्कार मैने  किया है यही तुम्हारे पिता की अंतिम इच्छा थी और अपनी सारी  जमीन ,जायदाद मेरे नाम कर दी है, न ,मा नो तो यह    वसीयत खुद ही पढ़ लो।(Yahudi Ki Vasiyat)

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सब लोंगो के सामने जो तुम्हारे पिता के द्वारा लिखवाई गई है। अतः यहूदी का पुत्र  वह  वसीयत सुनकर बहुत उदास हुआ, और दूसरे दिन उसी शहर के एक  काजी  के पास  फरियाद  लेकर  पहुंचा , काजी  ने वसीयत  सुन करकहा तुम्हारा बाप वाकई बहुत समझदार आदमी था। इस वसीयत में लिखा है की तुम कोई एक चीज़ वापिस ले सकते हो।अब तुम  सिर्फ  एक  चीज  ले  लो  और  वह  चीज  है –यह गुलाम


yahudi ladke ka waqia | yahudi ki kahani !

समझदारी  भी  एक कला है। जो  मनुष्य की जिन्दगी का एक अभिन्न हिस्सा है। ज्ञान से बढ़कर  दुनिया में कोई चीज नहीं है। ज्ञान ही सर्वोपरि है। इसलिए हर  मनुष्य को  अध्यात्मिक ज्ञान होना जरूरी है। आध्यात्मिक ज्ञान के बिना मनुष्य की जिन्दगी  एक पशु के समान  है।

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