The Unlucky Weaver Story in Hindi | जुलाहे का तुक्का,  मजेदार कहानी !

The Unlucky Weaver Story in Hindi ! एक भोला-भाला जुलाहा था। लेकिन  उसकी  जुलाही बड़ी चालाक थी।  जुलाहा एकदम अनजान था।  वह तो बस यही जानता था कि उसकी जुलाही  से बढ़कर प्रेम से पति की सेवा करने वाली दूसरी स्त्री दुनिया में नहीं है।  ऐसा इसलिए कि जुलाही जब-जब चावल पकाने बैठती , जुलाहे को भी सामने बिठा लेती। अंजलि   भरकर  चावल  लेती और हंडिया में पकने डाल देती। चावल पक जाते तो फिर अंजलि भरकर जुलाहे की थाली में परोस ते हुए कहती , देखो जी. जितने चावल पकाते हैं सारे के सारे तुम्हें को  ही परोसती   हूं।

The Unlucky Weaver Story in Hindi

 

हे भगवान तुम तो सारे के सारे चावल मुझे ही परोस देती हो खुद भूखी रहती हो क्या।  और वह बड़े प्यार से उत्तर देती है। शास्त्रों में लिखा है कि पति जितना जो कुछ खाता है उसका आधा अपने आप ही पत्नी  के हिस्से  चला जाता है।  बस उसी के आसरे जी लेती हूं।  तुम्हारे सुख में ही मेरा सुख है और तुम्हारे दुख में ही मेरा दुख।   तुमने खा लिया तो समझो मेरा पेट तुमसे पहले ही भर गया।  मैं कौन होता हूं शास्त्रों की बातों को झूठा  मानने वाला।  शास्त्रों में कोई गलत थोड़ी लिखा रहता है। (The Unlucky Weaver Story in Hindi )

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The Unlucky Weaver Story in Hindi | Prachin kahaniya hindi !

यह सोच कर जुलाहा चावल खाकर अपने काम में लग जाता है और जुलाही हडिया में बचे चावल बड़े मजे से चा ट कर खाती है । 1 दिन जुलाहे  ने  सोचा, मेरी पत्नी मेरा कितना ख्याल रखती है।  यह दुनिया की सारी औरतें ऐसे ही अपने पतियों की सेवा करने लग जाएं।  तो क्या कहने। मुझे अपनी पत्नी के इन गुणों को और लोगों तक भी पहुंचाना चाहिए।  अपनी पत्नी की तारीफ करते हुए वह घर से निकल पड़ा। रास्ते में उसे दो-तीन आदमी और 4,  5 औरतें मिली।  उसने उनसे अपनी पत्नी के सारे गुणों की चर्चा की।  लेकिन सभी आदमी और औरतें जुलाहे की बात सुनकर खुद  हँसे  और अपनी राह चल दिए।

जुलाहे ने सोचा, सचमुच मेरी पत्नी अच्छी है।  उसके गुणों के बारे में जानकर सब लोग खुश हो रहे हैं।  जुलाहा थोड़ी दूर आगे गया तो उसे एक बूढ़ा आदमी मिला।   जुलाहे ने बूढ़े को मत्था टेका और कहा अपनी पत्नी के बारे में कहने लगा।  बूढ़ा बोला देख।  कल जब जुलाही  चावल परोस चुके। तो हडिया में हाथ डाल कर देखना कि उसने  चावल  बचे  हैं या नहीं।  बस फिर क्या था।  अगले दिन जब जुलाही ने अंजलि भरकर चावल परोस दिया तो  जुलाहे ने हडिया में हाथ डाल दिया।  तो उसने देखा कि हडिया चावलों से भरी पड़ी है।

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A funny story of a weaver | Purani kahani hindi !

जुलाही  रंगे हाथों पकड़ी तो गई पर जुलाहा इतना सीधा था कि उसने जुलाही को कुछ ना कहा।  जुलाही  का सारा चयन ही छिन गया।  वह सोचने लगी कि किसी तरह जुलाहे को घर से बाहर भेजें।  ताकि वह बाहर रहे और वह खुद घर पर आराम से खाती – पीती रहे।  इसी बीच एक अनोखी घटना घटी।  वहां के राजा की  रानी की जाघ  में एक फोड़ा हो गया। राजा  ने  इलाज तो खूब करवाया पर फोड़ा  ठीक नहीं हो रहा था।  हारकर राजा ने सारे नगर -गांव में डिंडोरी  पिटवा दी   कि जो रानी के  फोड़े  को ठीक कर देगा। उसे एक लाख रूपये तक का  नाम दिया जाएगा।  The Unlucky Weaver Story in Hindi

साथ ही सेना का सरदार भी बना दिया जाएगा।  यह सुनकर  जुलाही  बहुत खुश हुई।  उसने  डिंडोरी पीटने वाले को  रोक कर कहा।  मेरा जुलाहा बहुत बड़ा  वेध्य  है पर लोगों को इस बात का पता नहीं है।  वह मंत्र पढ़कर ही रानी के फोड़ें  को ठीक कर देगा।  राजा के सिपाही जुलाहे को पकड़कर राज में ले गए।  जुलाहा बोला माई बाप मैं कुछ नहीं जानता।  जुलाही  झूठ बोलती है।  पर किसी ने उनकी एक न मानी।  पर मरता क्या करता ! जुलाहे  ने बड़े की पांच डालियां मँगवाई।  रानी को जमीन पर आसन बिछाकर बिठाया।

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Majedar Stories | जुलाहे का तुक्का,  मजेदार कहानी !

और बड़े की डालियों से फोड़े की झाड़-फूंक करते हुए यह मंत्र पढ़ने लगा।  जुलाहा मन ही मन सोचता रहा कि मैं हडिया में हाथ नहीं डालता तो यहां क्यों आता।  जुलाहा  डर से उल्टा सीधा बके जा रहा था।  यह दशा देखकर रानी की हंसी निकल गई।  जुलाहा ज्यो – ज्यो  इस मंत्र को तेजी से बोलता गया रानी मारे हसीं के  लोटपोट होती गई।  आखिर हंसते  हंसते खिंचाव से फोड़ा फूट गया।  और कुछ दिन  मैं ही  वह ठीक हो गई। The Unlucky Weaver Story in Hindi !

बस फिर क्या था।  राजा ने जुलाहे की इनाम देकर मालामाल कर दिया।  और अपनी सेना का सेनापति भी बना दिया।  पर क्या ! कुछ ही दिन हुए थे कि एक दूसरे राजा ने हमला बोल दिया।  शत्रु का मुकाबला करने के लिए राजा ने जुलाहे को फौज  ले कर जाने का हुकुम  दिया।  जुलाहे पर तो जैसे बिजली गिर पड़ी।  वह तो कभी घोड़े पर बैठा ही नहीं था।  लड़ाई लड़ना तो दूर की बात ! इस पर भी जुलाहे  ने अपनी कमजोरी किसी प्रकार  प्रकट नहीं होने दी।

Julaha ka tukka Majedar ek kahani !

 उसे वहां से भाग निकलने का एक उपाय सूझा  और वह राजा से बोला महाराज इस राजा को खदेड़ने के लिए पूरी सेना ले जाने की क्या जरूरत है मैं अकेला ही काफी हूं।  जुलाहा जैसे ही तैयार हो घोड़े पर बैठा ,घोडा उड़ा – चौकड़ी भरकर भागने लगा।  जुलाहे को लगा जैसे अब गिरा और तब गिरा ! वह जोर से बोलने लगा  बलुये – परालुये अर्थात हे घोड़े मुझे गिराना भी हो तो   रेत या  बालू  पर गिराना।  या घास पर गिराना।  बलुये – परालुये  ने तो जैसे घोड़े पर किसी  मंत्र का काम किया । The Unlucky Weaver Story in Hindi

 

julaha ka tukka majedar ek kahani

 

कुछ क्षणों में घोड़ा शत्रु  की सेना में घुस गया।  और सेना को खदेड़ता  हुआ एक सिरे से दूसरे सिरे तक निकल गया।  उसने कई सैनिक  कुचल डाले।  शत्रुओं  की सेना उसकी वीरता को देखकर दंग रह गई।   शत्रु का सेनापति यह सोच कर भाग गया के जब अकेले सेनापति में ही इतना ताकत है तो सेना कैसी होगी।  राजा ने जुलाहे की बहादुरी पर खुश होकर अपनी बेटी से उसका विवाह कर दिया और उसे आधा  राज्य भी दे दिया।

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