Thakur ki kahani – ठाकुर बनाम शराब मजेदार हिंदी कहानी।

Thakur ki kahani ! एक गांव में  एक थे ठाकुर साहब  बड़े मौज-मस्ती  वाले ,और उन्हें बड़ी – बड़ी रौबदार मूछें रखने का बहुत शौक था और हाथ में रखते थे एक लंबी लाठीलाठी  भी चांदी की थी  ठाकुर साहव लाठि यों ही नहीं रखते थेपूरे लठैत भी थे, और  गांव में उनका पूरा असर था। लेकिन ठाकुर साहव  बच्चों  से बहुत प्रेम करते थे। और गांव के बच्चे भी शाम होते ही ठाकुर साहब की चौपाल पर खेल -कूद करने लगते थे। और ठाकुर साहब भी बच्चों  के साथ घुल -मिल जाते और उनके साथ खूब मस्ती काटते। ठाकुर साहब को खेती – वारी  की कोई चिंता नहीं थी, क्योंकि  खेती बारी मजदूर करते थे।

Thakur ki kahani 

THAKUR VS SHARAB – ठाकुर बनाम शराब  मजेदार हिंदी कहानी । 

ठाकुर साहब सिर्फ करते थे मौज मस्ती, लेकिन शराब से उनका गहरा रिश्ता था। ठाकुर साहव खुद पीते और गांव वालो को भी पिलाते। धीरे-धीरे  बोतलें  खुलती रही और ठाकुर की एंटी ढीली होती रही।होते होते जेब खाली हो गई। ठाकुर साहव की जब भी जेब खाली हो जाती, तब वे एक -दो  बीघा जमींन बेच देते। धीरे-धीरे सारी जमीन बोतल में समा गई, मगर बोतल को ठाकुर साहब फिर भी प्यार करते रहे,  लेकिन अब ठाकुर साहब को रोटियों के लाले पड़ने लगे ,तो ठाकुर साहब ने एक दिन सोचा बड़ो ने कहा है , कि  निर्धन होकर अपनों के बीच नहीं रहना चाहिए अब गांव छोड़कर जाना ही ठीक है thakur ki kahani !

 

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बस दूसरे दिन ठाकुर साहब गांव छोड़कर किसी दूसरे गांव में जा पहुंचे, लेकिन ठाकुर साहब समय की रफ्तार को अच्छी तरह पहचानते थे। उन्होंने तुरंत अपने माथे पर रोली का तिलक लगाया  और बन गए बैद्यजी, उस गांव ठाकुर साहव ने बैद्य के रूप में अपना परिचय दिया। उस गांव में भी कोई  बैद्य नहीं था। गांव वाले ठाकुर साहव का दिमाग पढ़ न सके और  उनकी लच्छेदार बातों में  गए 

THAKUR VS SHARAB STORY

Thakur aur sharab moral stories in hindi | thakur ki kahani !

                              गांव वाले उन्हें नामी- गिरामी बैद्य समझ बैठे, लोग आने लगे मगर ठाकुर के पास सभी मरीजों की दवा एक ही थीबुखार हो या पेट दर्द, चोट लगे और सभी मरीजों को पानी में शराब मिलाकर पिला देते थे । और कहते थे  20 वर्ष के तजुर्बे से तैयार किया है , बात कुछ  ठीक  ही थी। अपनी बीमारी का इलाज वह शराब से ही करते रहे थेशराब के नशे का झटका लगता ,तो मरीज कुछ  राहत महसूस करताकुछ ठीक भी हो जाते 1 दिन एक बुढ़िया अपने  पोते को लेकर आई उसे बहुत खांसी थी,बुढ़िया ने ठाकुर से  कहा मेरे पोते की खांसी दूर कर दो तो में तुम्हे मुँह मागि फ़ीस दूगी। ठाकुर ने अपनी रामबाण  दवा  निकाली। thakur ki kahani !       

 

खांसी में शराब फायदेमंद होती ही है। लड़के को कुछ राहत मिली। तो बुढ़िया बहुत प्रभावित हुई ,  फिर उसने पूछा क्यों दवा से खांसी खत्म हो जाएगी ना,ठाकुर बोले शराब ने तो बड़े बड़ों को नष्ट कर दिया है  यह खांसी इसके क्या खाकर टिकेगी  ठाकुर हंसने लगे Thakur Vs Sharab 

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