Surkanda devi temple history in hindi !

टिहरीगढ़वाल में एक गांव  है I जिसका  नाम है – नकोट I  उसी गांव के पास एक नदी है I  और  उस नदी का श्रोत मंसूरी की एक पहाड़ी की चोटी से  है I  और  इस चोटी पर एक देवी का निवास स्थान है I  जो सुरखंडा  टेम्पल के नाम से जाना जाता है। और इस  देवी का नाम सुरखंडा है ,नकोट गांव के लोग बताते है की पहले पहाड़ी लोग नमक और गुड़ की बोरिया पीठ पर लादकर  ही ले जाया करते  थे। उस समय आज – जैसी पक्की  सड़के भी नहीं थी। उस समय लोगो को पहाड़ी चढ़ने और उतरने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। (Surkanda devi temple history in hindi)

 
Surkanda devi temple history in hindi

एक बार की बात हैगांव के कुछ लोग नमक और गुड़ की बोरिया कंधे पर लाधे , एक टोली बना कर जा रहे थेअचानक  एक छोटी सी बच्ची  रोटी हुई  आई , वह लोगो  से कहने लगी ,  ” में बहुत ही थकी हुई हुकोई मुझे कंधे पर बिठा लेसबके कंधे पर बोझ था  I लोग खुद भी थके हुए थेउसका बजन उठाने को कोई तैयार नहीं हुआपर लड़की का रोनाचिल्लाना  एक बूढ़े  पहाड़ी से देखा गयावह बोला बेटी  मेरे कंधे पर बैठ जा I (Surkanda devi temple history in hindi)

Surkanda devi temple history in hindi !


लड़की ने आंसू  पूछे और बूढ़े के कंधे पर सवार हो गईपर ये क्या बूढ़े को तो कंधे पर उसका कोई बोझ महसूस हुआ ही नहीं ,जो बोझ पहले से लदा था ,वह भी फूल जैसा हल्का हो गया, बूढ़े ने नई ताकत का भी अनुभव किया, वह तेज कदमो से चलने लगा I जहा  तक की धीरेधीरे  लोग पीछे छूटते चले गएगांव के पास पहुंच कर लड़की ने बूढ़े से कहा , ”बाबा , मुझे उतर दो  मेरा घर गया हैबूढ़े ने लड़की को उतार दिया  I पर आशचर्य की बात यह थी की लड़की देखतेदेखते गायब हो गई  I 


Surkanda_devi


परेशान सा बुड्ढा अपने घर चला गयाउसे बारबार लड़की की याद आती रहीरात हुई तो  सपने में वह लड़की बूढ़े को दिखाई दीलड़की ने बूढ़े से कहा , में  सुरखंडा की चोटी  पर मूर्ति रूप में स्थापित हो गई हु ,तुम भी वही  जाओऔर मेरी देखभाल करो  I  दूसरे दिन बूढ़ा  सुरखंडा की पहाड़ी पर गया ,वहा उसने सचमुच देवी की मूर्ति पाई , तभी से वहा हर साल मेला लगता है II (Surkanda devi temple history in hindi)


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