Short motivational story in hindi – 12 विश्व की प्रसिद्ध प्रेरक कहानियां।

शाहजानी और दासानी की कहानी ! (Short motivational story in hindi )

Short motivational story in hindi ! जब शाहजानी  मरने लगी तो अपने कंजूस पति मुकुंदी दासानी से बोली।  “मेरे नाम का कुछ दान तो कर दो।  और मेरी आंखों के सामने कर दो।  ” मेरे मरने के बाद मेरे नाम का क्या क्या दान करेगा ?  मुकुंदी ने सोचा, आखरी सांस ले रही है जो  कहे  मान जाऊं !  बोला तू बोल ! तेरे नाम का क्या दूं। ” शाहजानी  बोली मेरे नाम का एक खेत कर दे।  खेत में जितनी फसल हुई उसके पैसे मेरे नाम से दान कर दे।

Short motivational story in hindi

मुकुंदी का दिल डूबा ! पूरा खेत ! अरे तेरा दिमाग खराब तो नहीं।  तभी शाहजानी  की मां ने मुकुंदी  को समझाया।  मरने वाले की आखिरी इच्छा पूरी न हुई तो वह भूत बनकर तेरा पीछा करती रहेगी। यह सुनकर कंजूस मुकुंदी  ने कहा, अच्छा शाहजानी  तू चल कर जिस खेत की फसल दान करने को कहे मैं कर दूंगा ।  पर तू चलेगी कैसे ? ” लेकिन शाहजनी उठ खड़ी हुई।  अपनी मां का सहारा लेकर चल पड़ी सबसे छोटे नुक्कड़ में लगे खेत में जा पहुंची। Short motivational story in hindi 

वहां किसान काम में जुटा था। शाहजानी  उससे बोली।  “अब यह  खेत की फसल सब तुम्हारे नाम है और अगले दिन उसने दम तोड़ दिया।  मुकुंदी को सहजानी  का  बचन याद था।  लेकिन उस खेत में इस साल सबसे ज्यादा गेहूं हुआ। मुकुंदी  ने चुपचाप बोरे भरवा कर गोदाम में भिजवा दिए।  और सारी फसल बेचने की सो ची।  शाम के समय हुआ वह चुपचाप गोदाम में आया।  तो  भौचक्का रह गया।

Motivational short story for students in hindi !

सामने बोरों  पर मुकुंदी की पत्नी  शाहजानी  बैठी थी।  और  गुस्से से चिल्ला रही थी, “खबरदार इन बोरों  में से गेहूं बेचा तो।  मुकुंदी घबराकर बाहर आया।  उसने तुरंत अपने कर्मचारियों को बुलवाकर सारा गेहूं बांट दिया।  लोग  मुकुंदी दासानी की कंजूसी अच्छी तरह जानते थे।

उसे यों गेहू बांटता  देखकर मुकुंदी की सराहना के बजाय कह रहे थे, “इनके सिर पर कोई भूत सवार है।  वरना यह दोनों हाथों से लुटाने  वाला नहीं।  कभी किसी को एक दाना  नहीं देता  था।  भूत, कह  कर मुकुंदी दासानी चिल्ला रहा था।  मन ही मन सबको गालियां दे रहा था।

 “खाओ  कम्मखतो !  खाओ ! और  उड़ाओ  मुफ्त का माल !  अगले साल देखूगा तुम्हें।  साल पर साल बीतते  जा रहे हैं, लेकिन जैसे ही मार्च का महीना आता है।  मुकुंदी दासानी के खेत पर एक भीड़ सी लग जाती है।  लोग झोली भर – भर कर अनाज  लेते हैं। और शाहजानी  की ही उदारता के गीत गाते हैं।  जो आज धन की देवी से प्रसिद्ध है।

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देवरानी और जेठानी की कहानी ! Short motivational story in hindi

 

एक समय किसी गांव में एक देवरानी और एक जेठानी रहती थी।  जेठानी संपन्न, धन-धान्य से पूर्ण थी।  देवरानी बिचारी एक  दरिद्र और गरीब परिवार की थी।  देवरानी का पति अर्थात देवर एक साधारण मजदूर था एवं देवरानी अपनी जिठानी एवं अन्य घरों में काम करती थी।  इस प्रकार उनका जीवन यापन बहुत ही कस्टमय  होता जा रहा था।

प्रत्येक वर्ष के विपरीत इस वर्ष भी  श्री गणेश व्रत के पर्व पर जिठानी ने देवरानी को उसकी मजदूरी नहीं दी।  देवर राजा का कई दिनों से कोई काम नहीं मिला था।  सषठ  का व्रत तो कहने को था।  वास्तविकता  मैं कई दिनों से फाका – मस्ती के दिन बीत रहे थे।  किसी तरह मुन्ना के लिए आधा – एक गिलास दूध का प्रबंध हो जाता।  शाम के समय देवरानी चारों ओर से निराश होकर टूटी सी घर लौटी।

देवरानी और जेठानी की कहानी

उसने रात्रि में अपने पति को जेठ के यहाँ से चोरी करने के लिए बाध्य कर दिया।  चोरी ना.. ना.. परन्तु पत्नी की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा।  समस्या थी, कि चोरी का सामान किसमें  लाया जाए।  पत्नी निर्वस्त्र होकर, अपनी धोती देकर कमरे के एक कोने में छिप गई।  देवर धोती लेकर जेठ  के भंडार गृह में पहुंचा। Short motivational story in hindi

Short motivational story in hindi for students !

बड़े असमंजस में था, क्या चुराया जाए।  चोरी करना तो पाप होता है ना।   “गुड चुराओ तो पाप, तिल   चुराऊ  तो पाप , सब पाप -ही- पाप”  वह बहुत देर तक  बुदबुदाता  ही रहा।  इतने में ही जेठ और जेठानी एवं परिवार के अन्य सदस्य भी जाग गए।

और उसे पकड़ लिया।  वह रोता जा रहा था एवं बुदबुदाता  जा रहा था।  उसने  कहा, में चोर नहीं हूं।  फिर उसने बताया कि वह वहां क्यों किस प्रकार आया।  सत्यता की परख के लिए जेठानी जी ने देवरानी को देखा।  जेठानी का  हृदय एक दम मोम हो गया।  और  पिघल गई।

जेठ ने कहा भैया जो कुछ भी मेरे पास है वह तुम्हारा भी है।  ले जाओ जो तुम्हें जरूरत हो और हां तुम मेरे व्यापार में मदद भी करना।  देवर अपने बड़े भाई के  यहाँ  नौकरी करके एक सम्मानित जीवन जीने लगा।  जैसे उनके दिल  मैं अहंकार का भाव चला गया था और धर्म के रास्ते पर आ गए हो।

 

भाग गया दिल्ली का पहलवान ! (Short motivational story in hindi)

 

सम्राट कृष्णदेव राय के दरबार में एक दिन एक पहलवान आ गया।  और बोला हुजूर !  मैं दिल्ली के बादशाह के दरबार में कई पदक जीत चुका हूं।  मुझे पराजित करने वाला कोई पहलवान हो तो सामने आवे।  ताल ठोक कर दांव लगाने लगा और बीच दरबार में खड़ा हो गया।  वह पहलवान सचमुच बड़ा मशहूर था इसलिए उससे लड़ने कोई नहीं आया।  और सम्राट चारों ओर सन्नाटा देख बोल उठे।

जो पहलवान इसे  पराजित करेगा उसे 1000 अशरफिया दी जाएगी।  सम्राट की घोषणा सुनकर भी किसी ने कुश्ती लड़ने की हिम्मत ना दिखाई।  सम्राट का मुख मंडल चिंता से भर उठा, उन्होंने एक बार भरी सभा में दृष्टि दौड़ाई।  देखते क्या है तेनालीराम आगे  आ रहा है।  उसने कहा सम्राट ! आपकी आज्ञा हो तो मैं उस पहलवान को पराजित कर सकता हूं।  सम्राट को आश्चर्य हुआ। Short motivational story in hindi

Short motivational story in hindi with moral !

फिर भी उन्होंने घोषणा की, मल्ल्युद्ध की स्पर्धा कल होगी।  दूसरे दिन सुबह-सुबह तेनालीराम दिल्ली के पहलवान के डेरे में पहुंचा।  बातचीत के बाद पूछा क्या तुम युद्ध के “स्वर, और “लय, से भी परिचित हो।  दिल्ली के पहलवान ने मल्ल्युद्ध  के स्वर और लय  की बात कभी न सुनी थी।  इसलिए उसका चेहरा सफेद पड़ गया।  यह कहने में उसे लज्जा की बात प्रतीत हुई कि मैं नहीं जानता।  इसलिए बोला हां हां क्यों नहीं जानता, जरूर जानता हूं।

12 विश्व की प्रसिद्ध प्रेरक कहानियां।

तेनालीराम ने कहा, तुम जानते हो तो कहना क्या ! आज का मल्ल  युद्ध उसी “स्वर,, और “लय,  की शैली में होगा।  अच्छा अब मुझे आज्ञा दो अखाड़े में मिलेंगे।  यह कहकर तेनालीराम ने पहलवान से हाथ मिलाया और वापस चला आया।  तेनालीराम के जाते ही दिल्ली के पहलवान ने सोचा, कि स्वर और लय  की शैली वाला मल्लयुद्ध तो वह नहीं जानता।  इसलिए उसका अपमान होगा।  शाम को अद्भुत मल्ल युद्ध देखने के लिए हजारों लोग आ पहुंचे। लेकिन दिल्ली के पहलवान का कहीं पता न था।  और वह लकड़हारे  का भेष  बनाकर राज्य से भाग गया था।

 

अनपढ़ हो ना एक अभिशाप ! short motivational story in hindi

मकर संक्रांति के पर्व पर एक अनपढ़ दामाद अपने ससुराल गया।  उसका ससुर खेत पर चला गया था।  इसी बीच एक आदमी दूसरे गांव से एक चिट्ठी लेकर आया।  सास ने वह  चिट्ठी दमाद के हाथ में दे दी और कहा  कि  बेटे, जरा पढ़ कर सुनाओ तो !  दामाद को यह कहना अपमान की बात लगी कि वह पढ़ना – लिखना नहीं जानता।  अब वह सोच में पड़ गया कि क्या जवाब दिया जाए ! दामाद कोई समाचार बता नहीं रहा था।

उसे देरी करते देखकर सांस को शंका हुई कि चिट्ठी में कोई अशुभ समाचार तो नहीं ! वहां पर बैठी  हुई औरतो  ने शोर मचाया कि वह चिट्ठी की खबर तुरंत सुना दे।  लेकिन दामाद  ने चिट्ठी फेंक दी और घुटनों पर सिर रखकर बैठ गया।  दामाद को  परेशान देख,  घर के लोगों ने समझा कि जरूर कोई रिश्तेदार मर गया है।  फिर क्या था, सब लोग फूट-फूट कर रोने लगे।  उन सब को रोते देख दमाद भी जोर जोर से रोने लगा।

पास पड़ोस के लोग भी वहां पर इकट्ठे हो गए, वह भी रोने लगे।  ससुर खेत से घर लौटा।  उसने रोने का कारण पूछा।  पत्नी  ने चिट्ठी दी बोली, “हमारा घर डूब गया और क्या ? तुम ही पढ़ लो।  किसान ने घबराहट में चिट्ठी पढ़ी उसमें लिखा था।  हम आपके लड़के के साथ अपनी लड़की का  ब्याह  करने को तैयार हैं जल्दी इस चिट्ठी का जवाब दीजिए।  ससुर ने सभी लोगों को यह खुशखबरी सुना कर विदा किया।

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तब दामाद  से पूछा, बेटा तुम दुखी क्यों हुए ?  दामाद जी बोले ससुर जी मुझे पढ़ना – लिखना नहीं आता।  जब मेरे हाथ में चिट्ठी दी गई, तब मुझे अपने अनपढ़ पर दुख हुआ और रो पड़ा।  यह सुनकर ससुर ने उसे सांत्वना दी दुखी मत हो अब भी तो तुम पढ़ना लिखना सीख सकते हो।

भले काम के लिए कभी देर नहीं।  यह कहकर ससुर जी अपने खेत पर चले गए। और दामाद आकर अपने घर पर पढ़ने लिखने की तैयारी करने लगे।  जब 2 साल बाद फिर ससुराल गए।  तो  उनके पढ़े-लिखे होने पर ससुराल वालों को गर्व महसूस हुआ।  तब ससुर ने कहा पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती।  विद्वान की हर जगह इज्जत होती है।  Short motivational story in hindi

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पृथ्वी और आकाश कैसे बने !

पहले सिर्फ दो ही अंडे  थे। वह कहीं ठहरते  ही नहीं थे।  1 दिन दोनों में टक्कर हो गई, तो 1 में से पृथ्वी निकली और दूसरे में से आकाश, पृथ्वी  पत्नी बनी और आकाश पति।  लेकिन तब पृथ्वी इतनी बड़ी थी, कि आकाश की बाहों में आ नहीं पाती थी। अतएव 1 दिन  आकाश ने पृथ्वी से कहा है, प्रिये  तू मेरी पत्नी है।  लेकिन तू इतनी बड़ी है कि मैं तुझे प्यार कर ही नहीं पाता।  तू जरा छोटी हो जा ना “।  सुनते ही पृथ्वी  संकोच से लज्जा गई, और इतनी सिकुडी – इतनी सिकुड़ी कि  आकाश की बाहों में समा गई।  कहते हैं, पृथ्वी और आकाश के इस मिलन से ही  पेड़ पौधे और समस्त प्राणियों का जन्म हुआ।  और उसके संकोच  से पहाड़ियां और  घाटियां एवं  नहर और नदियां बनी।

 आग और पानी की लड़ाई !

एक बार आग और पानी में लड़ाई छिड़ गई।  क्योंकि पानी की सबको जरूरत पड़ती थी।  इसलिए सब ने पानी का साथ दिया।  लाचार होकर आग  अपनी जान बचाकर भाग गई।  तो उसे छिपने का कहीं ठिकाना नहीं मिला, और पानी उसका पीछा कर रहा था।  आग एक पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर जा  पहुंची।  पानी  वहां भी बादल बनकर जा पहुंचा।  अब  आग जाए तो जाए कहां।  अतएव  आग  वहां से कूदकर पत्थरों में समा गई।  तब से वह वही छुप कर बैठी है।  कहते हैं जब भी आदमी को आग की जरूरत पड़ती है।  तो वह दो पत्थरों को रगड़ कर उसे बुला लेता है।  बाद में वह पुनः  उसी में जा छिपती  है। Short motivational story in hindi

 

ग्रहण कैसे लगता है !

एक बार एक आदिवासी क्षेत्र में अकाल पड़ा।  लोगों ने मदद के लिए भगवान से प्रार्थना की।  भगवान ने कर्जे से अनाज लाकर उनकी मदद की।  दूसरे साल फिर अकाल पड़ा।  भगवान ने फिर  कर्ज  से अनाज लाकर उनकी मदद की।  तीसरे साल फिर अकाल पड़ा।  भगवान ने फिर कर्ज से अनाज लाकर उनकी मदद की।  देखते-देखते भगवान पर कर्जा बढ़ता गया।  1 दिन साहूकार ने कर्जे की वसूली में भगवान को पकड़ लिया।  चांद और सूरज  से  यह देखा नहीं गया।  और अपनी आंखें बंद कर ली।  चांद – सूरज के इस आंख बंद करने को ही ग्रहण लगना कहते हैं।  माना जाता है कि राहु और केतु ही वो साहूकार थे जिससे भगवान ने कर्जा लिया था।

 

मुझे लड्डुओं से मत मारो एक अद्भुत कहानी ! 

आज से लगभग 2000 वर्ष पहले महाराष्ट्र में सातवाहन वंश के राजा राज्य करते थे।  प्रारंभ में सिमुक  और कृष्ण नाम के दो राजाओं के बाद तीसरा राजा सातकर्णि हुआ। सातकर्णि शूरवीर और धार्मिक प्रवृत्ति का राजा था।  उसने अनेक विजय प्राप्त की तथा अनेक यज्ञ करवाए।

उसका नाम चारों दिशाओं में विख्यात हो गया।  तत्पश्चात इस वंश के कई राजा सातकर्णि  नाम से ही प्रसिद्ध हुए।  जैसे गौतमीपुत्र सातकर्णि, वशिष्टि पुत्र सातकर्णि, गौतमीपुत्र यज्ञ श्री सातकर्णि आदि।  पुराणों के अनुसार इस वंश में कुल मिलाकर लगभग 3 राजा हुए और उन्होंने लगभग ढाई सौ वर्ष शासन किया।  पुणे के निकट नासिक की गुफाओं में इस वंश के राजाओं के कई अभिलेख अंकित पाए गए हैं।

इन अभिलेखों की लिपि ब्राह्मी तथा भाषा प्राकृत है।  इन अभिलेखों से उन राजाओं की शिक्षा दीक्षा, ज्ञान, कर्म और धर्म विजय और प्रशासन पर प्रकाश पड़ता है।  इस वंश के कई राजा अत्यंत बलशाली थे।  जिन्होंने पड़ोसी राजाओं को परास्त करके अपने वंश का नाम बढ़ाया।  इनमें कुछ धार्मिक प्रवृत्ति वाले भी थे, जिन्होंने अनेक स्रोत यज्ञ करवाए, ब्राह्मणों को हजारों गाय और स्वर्ण सिक्कों का दान किया।

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हाल में जैसे राजा साहित्य और काव्य – प्रेमी थे।  जिन्होंने गाथा सप्तशती जैसे सुंदर काव्य ग्रंथ की रचना की।  तथा आगम निगम आदि  शास्त्रों का अध्ययन भी किया।  परंतु कितने आश्चर्य की बात है कि किसी भी सातवाहन वंश के राजा का एक भी अभिलेख संस्कृति भाषा में नहीं प्राप्त हुआ है।  उनके सबके सब अभिलेख  प्राकृत में हैं।  तब यह बात और भी विचानीय हो जाती है, जब हम उनके समकालीन विदेशी शक्तियों के अभिलेखों में संस्कृत काव्य की अनोखी छटा पाते हैं। Short motivational story in hindi

शक क्षत्रप के नासिक अभिलेख में संस्कृत का प्रांजल रूप है।  और शक क्षत्रप  रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख तो समाज और शब्द अलंकार सुंदर संस्कृत का उत्तम उदाहरण है।  और तो और रुद्रदामन स्वयं संस्कृत का कवि था।   कहा जाता है कि सातवाहन वंश के राजा यद्यपि विद्वान थे।  पर अपने राजकाज में प्राकृत भाषा का ही प्रयोग करते थे।  इसलिए उनके सभी अभिलेख भी प्राकृत में ही थे। संभव है, जनप्रिय होने के नाते जनता की सुविधा के लिए उन्होंने लोक भाषा में अपने अभिलेख अंकित करवाए  हों ।

परंतु कथासरित्सागर में दिए गए एक प्रसंग के आधार पर विदवान ऐसा विश्वास करते हैं कि सातवाहन वंश के राजा संस्कृत भाषा से बिल्कुल अनभिज्ञ थे और यहां तक कि उनके अंतर पुर में केवल प्राकृत भाषा का ही प्रयोग किया जाता था।  कथासरित्सागर के अनुसार 1 दिन सातवाहन वंश का राजा हाल अपनी रानियों तथा राजकुल की अन्य स्त्रियों के साथ अपने अंतपूर में स्थित प्रदुमन की पुष्प करड़ी में जल क्रीड़ा कर रहा था।

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विश्व की प्रसिद्ध प्रेरक कहानियां।

राजा अपनी  छोटी रानी  को अधिक प्यार करता था।  क्योंकि वह सबसे अधिक सुंदर गुणवती और विदुषी थी। जल क्रीड़ा करते समय भी  राजा उसी की ओर अधिक आकर्षित था।  अपने प्रेम प्रदर्शन के लिए उसने अपने दोनों हाथों से पानी ले लेकर छोटी रानी पर फेंकना शुरू कर दिया।  अन्य रानियों तथा राजकुल की स्त्रियों के समक्ष राजा का परिहास उस रानी को अच्छा नहीं लगा।

सबके आगे वह राजा को मना भी करती तो कैसे ?  क्षणभर विचार करके उसने राजा से संस्कृत में विनय की।  राजा ने समझा कि  रानी  भी  परिहास करना चाहती है। तब यह कह रही है कि मुझे लड्डू से मारो। इसलिए राजा ने तत्काल एक सेविका को आज्ञा दी, कि वह एक सोने के थाल में भरकर लड्डू ले आवे।  राजा की आज्ञा सुनकर रानी को हंसी भी आई और क्रोध भी। Short motivational story in hindi

उसने संस्कृत में ही राजा से कहा “हे राजन जल के भीतर यहां  लड्डूओ  का क्या तुक ?  मैंने कहा था कि आप मुझे  जल से न भिगोए।  और तो और आपको अवसर का भी ध्यान नहीं आप कितने मूर्ख हैं।

 

कुंवारी नदी का दर्द एक कहानी !  (Short motivational story in hindi)

एक मेकल नाम का राजा था।  और उसकी एक सुंदर कन्या थी, जिसको नर्मदा कहते हैं।  राजा मेकल की राजधानी थी अमरकंटक।  जब राजकुमारी नर्मदा बड़ी हुई तो पिता मेकल ने उसके लिए वर की तलाश शुरू की।  नर्मदा बहुत ही सुंदर और गुणवान थी।  कई राजकुमार उससे विवाह करने की इच्छा करने लगे।  अब राजा मेकल ने एक शर्त रखी थी।  जो राजकुमार वकाबली के फूल  लेकर आएगा उसी से मैं अपनी कन्या का ब्याह करूंगा।  कई राजकुमार बकावली का फूल लाने निकल पड़े।  पर सफलता मिली तो केवल राजकुमार सोनभद्र को।

 

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पर नियत समय पर पहुंचने में उसे देर हो गई।  अब क्या हो !  उधर नर्मदा सोनभद्र को चाहने लगी थी।  उसने तय किया, कि विवाह करेगी तो सोनभद्र से ही।  और अपनी  नाइन जोहिला को सोनभद्र के पास भेजा।  जोहिला थी राज कन्या की नाइन !  जो बहुत ही सुंदर थी।  सजी-धजी भी रहती थी।  भाग्य का खेल !  राजकुमार सोनभद्र ने जोहिला को ही नर्मदा समझ लिया।  और उससे  हास – परिहास  करने लगा।

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इधर राजकुमारी ने देखा कि जोहिला तो आ  ही नहीं रही ,  इसलिए वह स्वयं  विवाह के मंडप में पहुंच गई।  वहां सोनभद्र को  जोहिला  नाइन के साथ हंसी मजाक करते देख वह आग बबूला हो गई।  उसने आव देखा न ताव झट से एक कुंड में कूद पड़ी।  और नदी बनकर पश्चिम की ओर दौड़ चली।  कुंवारी नर्मदा आज भी उसी तरह दौड़ रही है।  सोनभद्र को जब असलियत पता चली तो उसे नर्मदा की नासमझी पर गुस्सा भी आया।  राजकुमारी होकर भी इतना धीरज नहीं रख पाई।  पर सोनभद्र स्वयं पर भी काबू न रख सका और अमरकंटक पहाड़ से कूद पड़ा।

विधि का विधान ! नर्मदा पश्चिम की ओर दौड़ रही थी, सोनभद्र जंगल-जंगल पहाड़ -२ भटकने के बाद पूर्व की ओर निकल गया।  आज का सोना नद ही पुराना सोनभद्र कहा जाता है।  कहते हैं बाद में सोनभद्र  जोहिला को  ब्याह लाया और नर्मदा कुँवारी ही रह गई।  लोकगीत कार कुमारी नर्मदा के दर्द को अपने शब्दों में अलग अलग तरीके से बयां करते हैं। Short motivational story in hindi

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चेहरे पर फूल खिलता है एक मारवाड़ी लोक कथा !

एक ब्राह्मण दशामाता डाडावावजी  का  पक्का  भक्त था।  लेकिन उसकी  कोई संतान न थी।  1 दिन दशा माता ने प्रसन्न होकर उसे संतान सुख का वरदान दिया।  कुछ दिन बाद ब्राह्मण के घर कन्या ने जन्म लिया।  सुबह सुबह नाइन आयी,  कन्या को नहलाने-धुलाने के लिए।Short motivational story in hindi

कन्या को देखते ही वह चौंक उठी।  उसके चेहरे पर एक फूल खिला था।  नाइन ने फूल तोड़कर अपने पास रख लिया।  फिर लड़की का मुंह धोकर काजल लगा कर चली गई।    नाइन  ने वह फूल बाजार में बेचा तो उसे ढेर सारा धन मिला।  अब तो वह रोज सुबह सबके जागने से पहले आती।  और लड़की के मुंह पर खिला  फूल तोड़ कर ले जाती।  इस तरह वह अमीर होती गई।  1 दिन नाइन देर से आई।

ब्रह्माणी की आंख खुली तो लड़की के चेहरे पर फूल खिला देखा।  नाइन  के तड़के ही आ जाने का राज समझ आ गया।  ब्राह्मण को बताया।  ब्राह्मण ने फूल तोड़ा और बाजार में बेच आया।  वह भी धीरे-धीरे मालामाल हो गया।  बेटी जब 16 साल की हो गई तो ब्राह्मण – ब्राह्मणी  ने सोचा, विवाह के बाद भी लड़की को अपने पास ही रखेंगे।  ताकि फूल अपने ही हाथ में आए।  यही हुआ।  शादी करके जमाई को घर जमाई रख लिया।  जमाई रोज दुकान पर जाता और सारा दिन काम करता, पर उसके साथ ब्राह्मण – ब्राह्मणी  का व्यवहार ठीक नहीं था।

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जमाई अपमानित महसूस करता रहता था।  उसने अपने ससुर से हिसाब करने को कहा।  जिससे वह अलग रहकर काम शुरू कर सके।  पर ब्राह्मणी ने मना कर दिया।  अलग करने का मतलब था कि जमाई के साथ बेटी  भेजनी पड़ती।  उसने ब्राह्मण से कहा कि वह जमाई को कहीं  ले जाकर मार दे।  ब्रह्माणी के बार – बार कहने पर वह परेशान हो उठा।  अंततः जमाई को जंगल में ले गया और वहां उसका सिर काट डाला।

उसी समय दशामाता डाडावावजी उधर से घूमते हुए निकले।  उन्होंने जान लिया कि यह लड़का उसी लड़की का पति है।  जिसे उन्होंने ब्राह्मणी को दिया था।  इसे जीवित करना बहुत आवश्यक है।  यह सोच कर उन्होंने उसे अमृत का छींटा मार दिया जिससे वह जीवित हो उठा। Short motivational story in hindi

और सीधा ससुर के घर जा पहुंचा।  उसने सास और ससुर से कहा  में यहाँ से जाना चाहता हूं।  पत्नी विदा कर दो।  ब्राह्मण – ब्रह्मणी  उसे देख हैरान हुए।  ब्राह्मणी – ब्राह्मण से झगड़ने लगी, “तुमने इसे मारा ही नहीं।  यदि  मार देते तो जिंदा कैसे यहां आता।  तुम झूठे हो, अब फ़ौरन जाओ और मार डालो।  ब्राह्मण अपने जमाई को लेकर फिर जंगल में पहुंचा।  उसका सिर काट कर घर ले आया।  उधर से दशामाता और डाडावावजी फिर से निकले।

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इस बार उन्होंने उसका सिर् वहां नहीं पाया।  तो दशामाता बिल्ली और डाडावावजी  साधु का भेष धारण कर ब्राह्मण के घर पहुंचे।  ब्राह्मणी ने सिर को टोकरी के नीचे छुपा रखा था।  और वह चरखा चला रही थी।  साधु ने अलख जगाई।  ब्राह्मणी आटा लेने उठी।  दशा माता ने लड़के के सिर पर अमृत का छीटा मार दिया।  सिर जीवित हो गया।  दशा माता ने उसे धड  के साथ जोड़ दिया और कहा।  अब किसी के बहकावे में मत आना।  बिना सोचे समझे बात किसी की मत मानना।  नहीं तो तुम्हारे साथ बुरा ही होगा।  जमाई ने ब्रह्माणी को कहा।

अपनी लड़की मेरे साथ विदा कर दो, नहीं तो दशामाता अपनी सारी समृद्धि अपने साथ ले जाएगी।  ब्रह्माणी डर गई ! और लड़की को जमाई के साथ भेज दी।  दोनों पति-पत्नी वहां से चले , जंगल में पहुंचे , रात पड़ी तो पीपल के पेड़ के नीचे सो गए।  जब भोर हुई तो लड़के की आंख खुली।  बराबर में सोई पत्नी के चेहरे को देखा तो उसके चेहरे पर अनमोल अद्भुत फूल खिला था।  उसने पत्नी को जगाया पर वह न जागी।

जब उसने फूल तोड़ लिया तो वह जाग उठी।  दोनों ने सोचा यही वजह थी जो ब्राह्मण ब्राह्मणी  उसे देना नहीं चाहते थे। और उन्हें इतने कष्ट झेलने पड़े।  वहां से चले और एक शहर में आए।  और एक सेठ को फूल बेच  दिया। कुछ दिन बाद उसी नगर में महल बनवाया और काम शुरू कर दिया।  दोनों शांतिपूर्वक रहने लगे। देखते-देखते वह बहुत अमीर आदमी बन गए।   दशा माता ने जैसे -दादा, बाप  और जमाई और बेटी पर जैसे कृपा की, वैसे ही  सभी प्राणियों पर करना। Short motivational story in hindi

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जैसल का बलिदान – एक मजेदार कहानी !

 

कोई  ३00 साल पहले बराडी जिले में जामनगर के पास धनीराम नाम का एक चारण रहता था।  उसकी दो पत्नियों में से पहली का नाम  पुना सरी था  और दूसरी पत्नी का नाम जैसल था।  वह बहुत सुंदर  और गुणवान थी।  अतः पुनासरी उससे द्वेष भाव रखती थी।  एक दिन सुबह को जैसल कुए पर पानी भर रही थी।  तभी अचानक एक घुड़सवार कुए के पास रुका।  और बोला, मेहरबानी करके मेरे घोड़े को थोड़ा पानी पिलाओगे क्या।  जैसल घोड़े की प्यास बुझाने तक कुएं में से पानी खींच – खींचकर पिलाती रही।  मुसाफिर का नाम लाडवा था।

उसने कुछ धन देते हुए कहा !  मैं तुम्हारा भाई हूं।  छोटी सी भेंट स्वीकार कर लो।  जैसल बोली अब तुम मेरे भाई बन गए हो।  मैं तुम्हारी बहन तभी स्वीकार करूंगी जब घर चल कर खाना खाओगे।  लाडवा जाना नहीं चाहता था।  पर जैसल के आग्रह के कारण चल दिया।  खाना खा चुकने पर लाडवा ने पूछा , मैं तुम्हारी मेहरबानी का बदला कैसे चुका सकता हूं ?  जैसल ने जवाब दिया ” याद रखना कि तुम मेरे भाई हो।  जब मैं तुम्हें बुलाऊं तो जरूर आना।  मेरे माता-पिता और भाई – बहन कोई भी जीवित नहीं है। मौका पाकर पुनासरी ने कस्बे में गलत अफवाह फैला दी।

शाम को जब  पति लौटा तो वह पहले पुनासरी के घर रुका।  पुनासरी ने जैसल के बारे में उसके भी कान भर दिए।  उसे बहुत गुस्सा आ गया।  एक कोडा लिया और चल दिया।  जैसल बगीचे में खड़ी थी, पति को साथ में कोड़ा लिए आते देखा।  बिना कुछ कहे सुने उसने पत्नी को कोड़े लगाने शुरू कर दिए।  गांव वाले देख रहे थे।  अब जैसल की समझ में आया, कि मामला क्या है।  उसने आंखें बंद कर ली।  प्रार्थना करने लगी।

moral motivational stories in hindi !

भगवान इन लोगों के सामने सिद्ध करो कि मैं निर्दोष हूं।  मुझे इस दुनिया से भी उठा लो।  अचानक वह कांपने लगी कौड़े की मार के कारण हुए उसके घाव भर गए।  उसके चेहरे पर देवी जैसा  तेज  फैल गया।  कुछ ने आगे झुक कर उसके पैर छू लिए।  कुछ उसके सामने हाथ जोड़कर  कहने लगे मां हमें क्षमा कर दो।  जैसल ने अपने  पास खड़े व्यक्ति से  कहां ! “कुछडी  गांव जाओ और मेरे भाई को बुला कर लाओ।

उसे कुछ शुद्ध घी और एक चुनरी लेकर तुरंत आने को कहना।  खबर सुनकर लाडवा मंगाया हुआ सामान लेकर, सबसे तेज चलने वाले ऊँट पर सवार हो अपनी बहन के पास चल दिया।  इधर गांव में शहनाई और ढोल गूंजने लगे। बीमार, अंधे लोगों के जत्थे आकर जैसल के पैर छूने  उमड़ने लगे।  पैर छूकर वह ठीक हो जाते।  संतान हींन आशीर्वाद लेने आने लगे।  सबको अपनी मांंगी  हुई चीज मिलती।  जब लाडवा पहुंचा तो उसने यह सब देखा, और जुलूस के पीछे  – पीछे उस  चिता के पास पहुंचा।  जहां जैसल अग्निकुंड में जलने वाली थी।

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वह जैसे ही ऊपर चढ़ी उसके पैर के अंगूठे से आग निकली और लपटों ने उसे घेर लिया।  उसने अपने भाई लाडवा को बुलाया और बोली।  घी मेरे ऊपर डाल दो, और मुझे चुनरी उड़ाओ।  उसने पास जाकर जैसल के ऊपर घी  डाला और चुनरी से उसका मुंह ढक दिया। तभी आकाश तक  उठती लाल-लाल  लपटें  जैसल की पवित्र आत्मा को अपने साथ ले गई। Short motivational story in hindi

 

एक मजेदार किस्सा 12 दोस्तों का ! Short motivational story in hindi

गुजरात के अवधि गांव में 12 दोस्त रहते थे। इस टोली का मुखिया  वासलराव था।  वह किसी आदमी के आगे कभी नहीं झुकता था।  1 दिन  सभी दोस्तों इकट्ठे हुए।  सब ने वचन लिया कि हम सब शांति से एक साथ जिएंगे , वक्त आएगा तो मरेंगे भी एक साथ।  सूरत के राजा से किसी ने कहा।  सूरत में ऐसा भी एक आदमी है जो आप के सम्मान में भी कभी नहीं झुकता।  राजा ने मंत्री से पूछा, उसके पास सेना भी है क्या ?  श्रीमान !

उसके पास कोई सेना नहीं है।  वह केवल 12 साथी हैं।  राजा ने इस निडर आदमी को देखने का निश्चय किया।  अवधी गांव जा पहुंचा।  और एक आदमी को भेजकर उसे बुलवाया।  वासलराव दरबार में पहुंचा।  वासलराव ने अपनी तलवार निकाली।  और उसे राजा के सामने झुका कर अभिवादन किया।  राजा क्रोधित हो उठा।  पूछा तुमने किसको अभिवादन किया है।  उसने शांतिपूर्वक उत्तर दिया।  अपने अंदर निवास करने वाली शक्ति को।  मैंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वह आपको आशीर्वाद और लंबी आयु प्रदान करें।

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“तुम राजा के सामने भी अपना सिर नहीं झुकाते ?  एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के आगे क्यों झुके ?  केवल दो ही इस योग्य हैं – एक  ईश्वर है और दूसरी हमारी देवी।  राजा के हृदय पर इस बात का प्रभाव पड़ा।  दरबारियों के सामने उसे अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना था।  बोला “सिर झुकाओ  या युद्ध के लिए तैयार हो जाओ।  “मैं युद्ध के लिए तैयार हूं।  लेकिन तुम्हारे पास विशाल सेना है, बंदूक और तोपे  हैं। Short motivational story in hindi

हम केवल 12 व्यक्ति हैं।  जिनमें से प्रत्येक के पास केवल एक हथियार है।  इसलिए अपनी बंदूकों का इस्तेमाल हमारे विरुद्ध मत करना।  राजा ने महसूस किया 12 लोग, सैकड़ों गुड़ सवारों के मुकाबले – यह तो हत्याकांड होगा।  उसने अपना डेरा गांव के पीछे ले जाने का निश्चय किया।  ताकि जब छोटी सी टोली प्रकट हो तो उसकी पीठ राजा की सेना की ओर  हो।  राजा युद्ध का आदेश वापस ले सकेगा, कि  मुकाबला आमने सामने नहीं हुआ।  पर इसी बीच किसी ग्रामीण ने आकर  वासलराव को बताया कि राजा  के डेरे का स्थान बदल गया है।

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गांव वालों ने उसी ओर की दीवार तोड़ दी।  और एक तलवार लेकर निकल आए।  तेजाराम नाम का एक दोस्त गांव में ना होने से युद्ध में शामिल नहीं हो सका।  वासलराव  ने भाले से एक घेरा बनाया और युद्ध शुरू हुआ।  कठिन लड़ाई देर तक चलती रही।  राजा की सेना के बहुत सारे लोग उखड़ गए।  राजा ने महसूस किया कि इन लोगों के साथ कोई दूसरी शक्ति है।  वरना इतनी बड़ी फौज से टक्कर लेना संभव नहीं।

उसने अपने आदमियों को गोली चलाने का आदेश दिया।  अब बचने की कोई आशा नहीं रही।  वासलराव  ने अपने आदमियों को इकट्ठा किया। और घेरे में इकट्ठे हो गए।  प्रत्येक  के अंग से खून बह रहा था।  शाम को जब तेजाराम लौटा तो उसने देखा कि उसके साथियों की चिता जलाई जा रही थी।  वह सब युद्ध में मारे गए थे।  तेजाराम भी साथियों के समूह के साथ आग में भस्म हो गया।  उसे याद था, कि उन सब ने प्रतिज्ञा की थी।  हम साथ जिएंगे और साथ मरेंगे।

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नमस्कार दोस्तों  “Short motivational story in hindi – 12 विश्व की प्रसिद्ध प्रेरक कहानियां।” आपको अच्छी लगी  हो तो कृपया कमेंट और शेयर जरूर करें  – Motivational  हिंदी कहानियां  पढ़ने के लिए आपका बहुत -बहुत  धन्यबाद    !!! आपका दिन मंगलमय हो !!!

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