Sant Basant ki kahani – संत – बसंत एक बुंदेलखंडी लोक कथा !

Sant Basant ki kahani ! एक बार किसी राजा की बेटी का विवाह था।  मंडप छाने के लिए सेवक जंगल से बांस लाने गये ।  जैसे ही सेवकों ने बांस पर कुल्हाड़ी चलाई तो बाँस में से आवाज आई।  काठी जान कोठार में कपट ना डारो अजान,  पूरब  पुण्य  औतरे संत – बसंत सुजान,  (काठ  समझकर कुल्हाड़ी गलत जगह मत चला दो।  पूर्व जन्म के पुण्य से संत और बसंत ने अवतार लिया है।)  सेवक आवाज सुनकर डर गए और राजा के पास जाकर सारा हाल बतलाया।  राजा स्वयं आए और उन्होंने संभाल कर संत बसंत को  हरे  बासों  से निकाल लिया।   तथा अपने महल में ले आए।

 

Sant Basant ki kahani

वहां पर राजा ने उनका उत्तम रीत से लालन – पालन करना शुरू कर दिया।  एक राजसी परिवार में  राजकुमारों के समान उनका लालन पोषण होने लगा।  किंतु रानी को संत- बसंत जरा भी नहीं  अच्छे लगते थे।  जब संत – बसंत कुछ बड़े हुए तो  उसने राजा के कान संत – बसंत के खिलाफ भरना शुरू कर दिया।  राजा रानी की बातों में आ गए और उन्होंने संत बसंत को देश निकाले का हुक्म दे दिया।  हे हरे बांस से उत्पन्न संत बसंत सुनो ! तुम राज्य के दरबार की ओर कभी अपने पैर मत बढ़ाना।  जंगल के  वृक्षों के मध्य  अपनी पिपासा शांत कर लेना।

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Sant Basant ki kahani | sant basant ki kahani in hindi !

जहां से तुम उत्पन्न हुए हो तो वही चले जाओ।  यहां तुम्हारा क्या काम।  बांसों के पेड़ों  के नीचे ही तुम अपनी दुपहरी काट लेना।  जंगल  के सभी पक्षी तुम्हारे साथी होंगे और वन के वृक्ष तुम्हारे  संघी होंगे।  अपनी भूख की तृप्ति तुम वन के कंदमूल फल – फूल खाकर कर लेना।  द्वारपालों के मुख से जब संत बसंत ने राजा का संदेश सुना।  तो उन्होंने अपने राजसी  आभूषण उतार कर साधारण वस्त्र धारण कर लिए।

और राजा रानी को प्रणाम करके वन को चले गए।  सारे दिन जंगल में चलते-चलते भूखे प्यासे संत बसंत एक घने आम के वृक्ष के नीचे पहुंचे।  वहां आग जलाकर ठंड  से बचने का उपाय किया।  उसी वृक्ष पर एक कबूतर का जोड़ा रहता था।  कबूतर ने कबूतरी से कहा !  प्रिये  हमारे वृक्ष के नीचे संत बसंत आए हैं।  वह दिन भर के भूखे हैं यह हमारे मेहमान हैं।  मैं आग में कूद कर उसका भोजन बनता हूं।  कबूतरी ने कहा  नाथ ! तुम्हारे बिना मेरा जीवन बेकार है।  ऐसा कहकर वह आग में कूद गई।  और  उसके  पीछे  कबूतर भी कूद गया। Sant Basant ki kahani

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kahaniya in hindi new episode | संत – बसंत एक बुंदेलखंडी लोक कथा !

संत बसंत को पक्षियों की भाषा आती थी।  उनका त्याग देखकर वह कहने लगे।  वृक्ष के पक्षी तुम धन्य हो।  अपने प्राणों का दान करके तुम भूखों का आधार बनते हो।  अब वन के ताल ही हमारे पानी रखने के स्थान हैं।  आम की शीतल छांव हमारा  धाम है।  यही प्रेम से रहना है।  महलों से अब हमें क्या काम।  इस प्रकार संत बसंत जंगल में रहने लगे।  एक दिन  शिकार खेलते हुए वह बिछड़ गए।  अपने भाई को ढूंढते हुए संत एक नगर में पहुंचे।  उनके नगर में प्रवेश करते ही राजा के सिपाइयों ने उन्हें आदर के साथ रथ पर बिठाया।  और राज्य  में ले आए।

उस नगर के राजा का देहांत हो गया था।  राजा निसंतान था। उस नगर की परंपरा थी, कि यदि राजा  निसंतान मरे तो उसकी मृत्यु के उपरांत जो पथिक  सबसे पहले राज्य में प्रवेश करें उसे राजा बना दिया जाता था।  इस प्रकार संत राजा हो गए।  और बसंत भी भाई को ढूंढते ढूंढते एक नगर में पहुंचे।  वहां उन्होंने राजा की मुनादी सुनी कि  कोई नगर वासियों को खाने वाली चुड़ैल को मारेगा उसे राजा की बेटी और आधा राज्य दिया जाएगा।  बसंत ने  चुड़ैल को मार दिया और आधे राज्य का राजा बन गया। Sant Basant ki kahani

Sant basant kahani hindi mein !

जब दोनों भाई सुख में  थे, फिर भी उन्हें एक दूसरे की तलाश थी।  अपने भाई को ढूंढने के लिए संत ने मुनादी करवाई कि जो व्यक्ति उन्हें संत – बसंत की कथा सुनाएगा उसे एक लाख सोने की मोहरें दी जाएगी।  मुनादी की खबर बसंत के पास भी पहुंची। बसंत साधु का वेश रखकर संत के दरबार में पहुंचे और यह कथा सुनाई।  हरे – हरे बांस  के वृक्षों में से संत बसंत ने अवतार लिया था।  उनके भाग्य में ऐसा घर पड़ा। जहां पर  कुलक्ष्मी नारी थी।  दोष अब किसे दिया जाए जो भाग्य में होता है वही भोगना पड़ता है। Sant Basant ki kahani

राजा रानी रूठ गए और उन्होंने संत बसंत को घर से निकाल दिया।  भूखे प्यासे संत बसंत अमराही की छांव में जा पहुंचे।  वन के तोता कुमार के माता-पिता बन गए।  1 दिन शिकार में दोनों भाई बिछड़ गए।  अब  संत से कोई बिछड़ा बसंत मिला दे।  कथा सुनते ही संत के आंसू बहने लगे और उन्होंने बसंत को पहचान गले से लगा लिया।

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