Sabse bada aalsi -सबसे बड़े आलसी और कामचोर की कहानी !

एक आदमी था। Sabse bada aalsi  वह बड़ा ही आलसी और कामचोर था।  उसका विवाह नहीं हो रहा था ,  एक बार 1 साल खेती के लिए सूखा पड़ गया , तो गांव वालों ने चालाकी की  और उस आदमी से कहा कि तुम अकेले आदमी हो तुम से खेती नहीं हो पाएगी खेत बेच डालो , तुम्हारे खाने को अनाज हम दे देंगे।

जब यह शब्द उस आलसी ने कहा कि मैं तीन मन अनाज लूगा तब  खेत बेचूंगा। यह सुनकर गांव के लोगो  ने उस आदमी की शर्त को मंजूर कर लिया और उनमे से एक आदमी ने खेत ले लिया। अब और आलसी ने सोचा कि जब खेत ही नहीं रहे तो बैलों का क्या करूंगा।  चल कर इन्हें भी बाजार में बेच दूं और उसने ऐसा ही किया।

 

Sabse bada aalsi

 

 

और उसने बैल एक मेला में बेच दिए जिससे उसे खूब रुपए मिले। रुपए लेकर वह आलसी आदमी एक गांव से होकर गुजर रहा था। तभी उस गांव से एक स्त्री अपने पति के लिए रोटी लेकर खेत पर जा रही थी। वह  आदमी उसके पास गया और रास्ते में जाते हुए 1-1 करके सिक्का गिराने लगा। उस स्त्री ने सोचा कि इस तरह तो इस बेचारे का सारा पैसा गिर जाएगा इसे पता नहीं है कि इसका रुपया गिर गया है।

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Sabse bada aalsi -सबसे बड़े आलसी और कामचोर की कहानी !

इसे बताना चाहिए , इतने में उस आदमी ने एक जगह एक साथ कई रुपए गिरा दिए , और आगे बढ़ गया अब उस औरत से नहीं रहा गया। तो उसने सभी रुपए एकत्र कर  लिए और उसे पुकारने लगी।  ओ !! राहगीर तुम्हारा रुपया गिरता जा रहा है। ले लो लेकिन वह आदमी बोला नहीं।  तब वह और जोर से चिल्लाने लगी। 

तीन -चार बार तो उसने अनसुना  कर दिया। फिर वह खींज  कर बोला क्या बात है। तुम क्या चाहती हो। वह बोली अरे ! वाह !! हम तो तुम्हारा नुकसान बचाने के लिए पुकार रहे हैं।  और तुम उल्टे डाट रहे हो। अब वह और बिगड़ कर बोला बड़ी आई नुकसान बचाने वाली। मेरा कितना बड़ा नुकसान कर दिया। तुम्हें क्या पता मुझे 6 महीने बाद पसीना आता है। (Sabse bada aalsi)

और गिरते ही इस प्रकार सिक्का बन जाता है। अभी तो गिरना शुरू हुआ था , कि तुमने टोक दिया और गिरना  बंद हो गया।  यह सुनकर उस  स्त्री को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने पूछा तब तो तुम बड़े मालदार आदमी हो गए होंगे।  और नहीं तो क्या चार -चार महल हैं। नौकर -चाकर ,सब कुछ है।

वह स्त्री बोली तब तो मुझे भी अपने साथ लेते  चलो। वह ऊपर से दिखाने के लिए बोला , नहीं मैं नहीं ले चलूंगा।  स्त्री हाथ जोड़कर कहने लगी ! इस पर वह बोला ठीक है नहीं मान  रही हो  तो चलो। लेकिन मेरे पीछे-पीछे आते समय एक  खेत का फैसला छोड़ कर आना। नहीं तो मुझे पिटवाओगी। स्त्री वोली जैसा तुम कहोगे वैसा ही करूंगी। इस प्रकार वह स्त्री को लेकर अपने घर पहुंचा और झोपड़ी में बिठा दिया।

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स्त्री ने पूछा  ? तुम्हारी हवेली और नौकर -चाकर सब  कहाँ  हैं ?   तो उसने कहा कि यह जो बगल में हवेली है।  में चोरों के डर उसमे नहीं रहता है।  वह मेरी  ही   है ! मैंने उसे  किराये पर उठा दिया है ! वह स्त्री कुछ-कुछ तो समझ गई, अब क्या अब तो मजबूर थी। जब तक बैलो का पैसा था , तब तक तो घर का खर्चा ठीक -ठाक चलता रहा !

और वह  कुछ काम -धाम तो करता नहीं था अतः  अब वह स्त्री  मेहनत -मजदूरी करके किसी तरह दो रोटी जुटाने लगी ।  इस पर भी वह आदमी कहता कि पांच रोटी से कम दोगी तो मैं मर जाऊंगा।  अब वह  स्त्री  चिंता से सूखकर कांटा हो गई ! जैसे कोई  बीमारी लग गई है। एक  दिन एक पड़ोसिन से उसने  अपनी दुःख भरी कहानी सुनाई। तो पड़ोसिन ने एक विचार सुझाया। (Sabse bada aalsi)

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” अच्छा एक काम करो ? पहले उसे चार रोटी दो , फिर दूसरे दिन तीन  ,फिर दो ,फिर एक रोटी देने लगो ! इस पर जब वह कहे की  मर जाऊंगा ,तब कह दो कि मर जाओ उसी स्त्री के कहे अनुसार उस स्त्री ने ऐसा ही किया। और चार रोटी परसते देखते ही वह चिल्लाया मैं मर जाऊंगा ! स्त्री ने कहा  ठीक है मर जाओ !

और उठाकर रोटी ऊपर रख दी।  शाम को फिर उसने तीन ही रोटी परसी तो फिर उसने जैसे ही बोला की में मर जाऊंगा ! तो फिर से रोटी उठाकर रख दी। दूसरे दिन दो ही रोटी परसी  ! दूसरे दिन दो  रोटी देखते ही वह नाटक करके लंबी लंबी सांसे भरने लगा !

स्त्री गांव वालो को बुला लायी  कि  मेरा आदमी मर रहा है। जब सब लोग आ गए  तो उसने साँस लेना  बंद दी। गांव वालो ने देखा  कि  यह तो मर गया। और सब लोग  उसे अर्थी पर बांधकर समशान घाट लेके चले।  

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जब वहां पहुंचे तो स्त्री वोली  कि मरते समय कह गए थे, कि जो मेरा दाह – संस्कार करेगा उसका नाश हो जाएगा। यह सुनकर गांव वाले उसे वहीं छोड़ कर घर लौट आये ।  स्त्री भी घर लौट आई ! स्त्री  ने सोचा  क्या पता पांच रोटी के नाम पर जी जाये। उधर श्मशान घाट पर उसी समय  पांच चोर आये। 

उन्होंने देखा कि एक मुर्दा पड़ा हैं। एक चोर बोला बड़ा अशुभ हो गया। दूसरा बोला चलो उसका दाह -संस्कार कर दिया जाये। तीसरा वोला  दाह संस्कार के बाद उसका क्रिया -कर्म  भी करना पड़ेगा।  चौथा बोला  ठीक है। पांचवा बोला  हाँ ठीक है। इसी बहाने कुछ पुण्य का  काम हो जाएगा। 

वह पांचों बाजार चले गए। इधर वह स्त्री रोटी लेकर पेड़ पर चढ़ गई। इतने में चोरों ने पांच कनस्तर घी , 5 बोरा चावल , 5 बोरा गेहूं ,5 बुरा गुड़ , आदि  सब लाकर रख दिया और कहने लगे कि अब चिंता में आग लगा दी जाए।  तो स्त्री ऊपर से बोल पड़ी।  अरे सुनो 5 ले आई हूं उठा कर खा लो , और वह चिता पर से बोल उठा 5 से कम लाई होगी तो नहीं खाऊंगा। 

वह बोली पांच ही  लाई हूँ।  तुम उठो तो ! इतना सुनते ही चोरों ने समझ लिया कि यह भूतों की लीला है। वह भी पांच थे वह समझे कि हमारे लिए ही कहा जा रहा है। तीन तो वही बैठे – बैठे मर गए।  दो प्राण बचाकर भाग गए तब वह स्त्री से बोला पेड़ के नीचे उतर आओ। ले चलो उठाकर यह सब सामान। अब कुछ पसीना टप का है।

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