Paap Karm Ka Phal – पाप कर्म का फल किसको -राजा , चील , सर्प – पढ़ें पूरी कहानी !

एक राजा ब्राह्मणों को अपने राज्य  में भोजन करा रहा था।उसी समय पंक्ति के अंत मैं बैठे एक ब्राम्हण को भोजन परोसते समय एक चील अपने पंजे में एक मुर्दा साँप लेकर राजा के उपर से गुजरी। जो भोजन परोस  रहा था। और दुर्भाग्य से  उस मरे हुए  साँप के मुख से कुछ जहर की बुंदे खाने में गिर गई। और  किसी को कुछ पता  नहीं चल सका। फल स्वरूप वह ब्राह्मण जहरीला खाना खाते हीं स्वर्गवासी हो गया। (Paap Karm Ka Phal)


Pap karm ka phal kisko


अब जब राजा को सच का पता चला तो ब्रम्ह हत्या  लगने से उसे बहुत दुख हुआ। मेरे प्यारे भाइयों ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पापकर्म का दण्ड किसको मिलेगा ?राजाजिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है या वह चील– जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी।या वह मृत साँप– जो पहले से मर चुका था। दोस्तों बहुत दिनों तक यह मामला यमराज से हल नहीं हुआ। (Paap Karm Ka Phal – पाप कर्म का फल)

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Paap Karm Ka Phal – इस  कहानी  को  समझने के  लिए इसके अंत  तक  पढ़ें,  रहस्यमय  पूरी  कहानी। 

फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए। और उन्होंने किसी महिला से महल में जाने का रास्ता पूछा ?तो उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया, लेकिन रास्ता बताने के साथसाथ ब्राम्हणों से ये भी कह दिया कि देखो ब्राह्मण देवता ?जरा ध्यान रखना, वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है।” (Paap Karm Ka Phal)

 
बस मित्रों जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे उसी समय यमराज ने फैसला ले लिया कि उस ब्राह्मण की मृत्यु के पाप का फल इस महिला के को मिलेगा और इसे उस पाप का दण्ड भुगतना होगा।यमराज के दूतों ने पूछा प्रभु ऐसा क्यों ? जबकि उस ब्राम्हण की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका भी नही थी।तब यमराज ने कहा कि भाई देखो जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं तब उसे आनंद मिलता हैं। पर उस ब्राम्हण की हत्या से तो राजा को आनंद मिला मरे हुए साँप को आनंद मिला और ही उस चील को आनंद मिला ? (Paap Karm Ka Phal)

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लेकिन उस पापकर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस महिला को जरूर आनंद मिला। इसलिये राजा के उस अनजाने पापकर्म का फल अब इस महिला को भुगतना पड़ेगा बस मित्रों इसी घटना के अनुसार आज तक जब भी कोई व्यक्ति जब किसी दुसरे के पापकर्म का बखान बुरे भाव से निन्दा  करता हैं,तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा उस निन्दा  करने वाले इंसान को  भी मिलता  हैं।

 

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दोस्तों अक्सर हम जीवन में सोचते हैं कि जीवन में ऐसा कोई पाप नही किया फिर भी जीवन में इतना कष्ट क्यों आया ?दोस्तों ये कष्ट और कहीं से नही बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण उनके पापकर्मो से आया हुआ भाग होता हैं।  अतः मेरे प्यारे भाइयो इस कहानी से हमे यह सीख  मिलती है कि  किसी भी इंसान की बुराई नहीं करनी चाहिए। चाहे वह इंसान कितना ही बुरा क्यों हो ?(Paap Karm Ka Phal)

 
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