Moral Story in Hindi New | Top 3 Moral Stories in Hindi -शिक्षाप्रद कहानियाँ !

1- दाने-दाने पर लिखा होता है खाने वाले का नाम – (Moral Story in Hindi New)

Moral Story in Hindi New एक साहूकार घर के आंगन में  कुर्सी पर बैठ कर आराम से कुछ मटर के दाने चवा  रहा था।  तभी अचानक उस तरफ से एक साधु आया।  उसने साहूकार से भिक्षा मांगी।  साहूकार ने कहा आगे जाओ।  तब साधु बोला,  खाने के लिए दो चार दाने तो दीजिए।  साहूकार ने उसका अपमान करते हुए कहा।  दाने  क्या मुफ्त में मिलते हैं।  भीख मांगने से अच्छा है तुम कोई मेहनत का काम करो।  तब साधु ने अपना  कटा हाथ दिखाते हुए कहा।  मैं काम करने में इस हाथ की वजह से असमर्थ हूं।  मुझे काम पर कोई नहीं रखता है।  क्या आप रखेंगे।  तब साहूकार ने कहा मेरे पास  आपके लिए कोई काम नहीं है। आप भिक्षा ही मांगो !

 

Top 3 Moral Stories in Hindi -शिक्षाप्रद कहानियाँ

 

 

तब उस साधु ने कहा !  जिस मनुष्य के भाग्य में जो लिखा हुआ होता है वह वैसा ही कर्म करता है।  और साधु ने कहा दाने-दाने पर खाने वाले का नाम लिखा  रहता है।   कि इस  दाने को कौन खाएगा ? ” उसकी बात सुनकर साहूकार को क्रोध आया और उसने  साधु से कहा।  तुम अपने को बहुत बड़े ज्ञानी समझते हो।  इधर मेरे हाथ में पकड़े दाने को देखो।  इस पर किसका नाम लिखा हुआ है।  जरा बताओ तो  देखूं  ? ” साधु ने हंसते हुए कहा उसके ऊपर एक कौए का नाम लिखा है।  वह दाना उसका आहार है।  साहूकार ने घृणा से क्या यह देखो मैं इसे खा जाऊंगा।  कहां है तुम्हारा  कौवा ?  कहते हुए उस  दाने को मुंह में डालने लगा।

You May Like – 15 Hindi Short Stories With Moral for kids – 15 प्रेरणादायक कहानियाँ

Moral Story in Hindi New – शिक्षाप्रद कहानियाँ !

लेकिन वह दाना मुंह में सीधा न जाकर नाक के अंदर जा गिरा।  और साहूकार की सांस रुक गई। साहूकारों  ने दाने को निकालने की कोशिश  की तो वह  और अंदर चला गया।  वो छटपटा उठा।  और शोर मचाने लगा।  लोग इकट्ठे हो गए।  और उसे एक नाई के पास उठाकर ले गए।   नाई ने डिब्बे से चिमटी निकाली और साहूकार के नाक से उस दाने  को निकालकर आंगन में फेंक दिया।( Moral Story in Hindi New)

पास में बैठा हुआ  कौवा तुरंत उड़  आया और उस  दाने को चौच  में लेकर उड़ गया।  साधु ने कहा  दाने पर उस  कौवा का नाम लिखा था ,  जो उसको मिल गया।  साहूकार की अकल ठिकाने लग गई।  उसने साधु से क्षमा मांगी।  और आदर से घर ले जाकर उसको भोजन कराया।   अब साहूकार की समझ में आ गया था  की वास्तव में दाने दाने पर खाने वाले का नाम लिखा रहता है।  और उसने उस साधु को बहुत सारा धन   देकर  खुशी खुशी विदा कर दिया।

You May Like  – Top 10 Hindi Stories With Moral – संसार की सर्वश्रेष्ठ 10 प्रेरक कहानियाँ

2 – परदेसी के सिर पर भूत  – Pardeshi ke Shir Par Bhoot 

एक बुँढ़िया अकेली रहती थी।  उसके पास एक परदेसी आया।  बुढ़िया ने उसे बहुत ही प्यार से  बैठाया।   और उसका आदर- सत्कार  किया।  उस परदेसी के पास कच्चे दाल चावल थे।  वह उन्हें पकवाना चाहता था।  तो उसने बुढ़िया से कहा !  माई जरा खिचड़ी बना  दे ! बुढ़िया ने लकड़ी का चूल्हा जलाकर खिचड़ी पकाने रख दी।  बैठे-बैठे परदेसी के सिर पर भूत सवार हो गया।

 

वह बोला माई तेरे कितने बच्चे हैं ?” बुढ़िया ने जवाब दिया ! चार बेटे !!   जो दिल्ली में रहते हैं।  और दो यहां हैं।  चारों   10 -10  हजार  रुपए कमाते हैं।  और मेरे लिए भेजते हैं।  मैं आराम से यहां रहती हूं।  मेरे पास चार  भैंस है।  मैं उनका दूध बेचती हूं और उनसे मुझे बहुत पैसा मिलता है।  परदेसी   बोला !  हाय माय , तेरा दरवाजा तो बहुत छोटा है।  अगर तेरी सारी   भैंसे  मर जाएं।  तो उन्हें बाहर कैसे निकालेंगे।? ” अगर बाहर नहीं निकाली गई तो अंदर पड़ी पड़ी  सढ़ती रहेगी।  सड़ते -सड़ते ऐसी बदबू आएगी  कि  तेरा दम घुटने लगेगा। (Moral Story in Hindi New)

You May Like – मनुष्य को आत्माएं क्यों दिखाई नहीं देती – जाने इसकी वजह।

Top 3 Moral Stories in Hindi !

फिर तुझे भी बीमारी लग जाएगी।  लेकिन तेरी किसी को खबर ना मिलेगी।  हाय तब क्या होगा ? ” बुढ़िया ने गुस्से से परदेसी को देखा।  “तू घर आया मेहमान ना होता तो “अभी  मैं तेरा मुंह झुलस  देती।   चुप रह तेरी खिचड़ी अभी नहीं पकी।  परदेसी चुप होकर बैठ गया।  वह हर वक्त उल्टी बात पूछता रहता था।  फिर बोलने लगा। ” अच्छा माई, यह बता ,तेरे चारों बेटे  तुझे मिलने आ रहे हो।  और एक ही बस में सवार हो ।  अगर बस की टक्कर हो जाए।  और तेरे चारों बेटे मर जाएं।  तो तुझे रुपए कौन भेजेगा ? ” ठहर  अभी बताती हूं मुये !! ठहर ….!

बुढ़िया ने अधबनी  पतली पतली खिचड़ी उसके गमछे में पलट दी।  और बोली भाग जा वरना इन्ही  लकड़ियों से बुरी तरह तेरा मुंह काला कर दूंगी।  परदेसी के पल्ले में गरम गरम खिचड़ी रिसती  जा रही थी।  लोगों ने पूछा ! ” क्या है ? ” तो वह परदेसी बेचारा रोते-रोते गाने लगा।   और लोगों को बताया।  यह मेरी जीव का रस है जो रिसता  जा रहा है।  मेरी वाणी ने ही मेरी यह हालत कर दी।  मैं भूख से बेहाल हूं।  मेरी दाल कहीं नहीं गलती।  मैं अपनी खिचड़ी अलग पकाना बैठूं।  तो मेरी आँच  धीमी हो जाती है।  मैं अपनी इस जवान का क्या करूं। Moral Story in Hindi New

दोस्तों  इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है- हमें दूसरों से काम करवाने के लिए मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए।   इससे हमें यह ज्ञात हुआ कि कटु  शब्द बोलने वाला प्राणी हर जगह ठोकर ही खाता है।

 3 – शैतान व्यक्ति को मिली कर्म की सजा – डूंगर लोक कथा !

डूंगर प्रदेश में  सुजाता का नाम का एक व्यक्ति था।  जो हर समय उत्पात करने पर तुला रहता था।  वह स्वभाव से निर्दई और कठोर दिल का व्यक्ति था।  1 दिन लोगों ने पंचायत में एक फैसला किया। कि  यदि सुजाता सब के खेतों की रखवाली करे तो उसे सभी 40 सेर  धान  तथा कुछ रुपए दे देंगे।  सुजाता यह सुनकर बहुत ही खुश हुआ।  और यह सब करने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो गया।  सुजाता अब किसी को तंग ना करता और सुख पूर्वक रहने लगा।  एक बार की बात है गांव के नंबरदार की लड़की की शादी हुई।

लेकिन नम्बरदार उदास था।  वह सुजाता के पास आया और उससे बोला ” तुम मेरी बेटी को जाकर संदेश दे आओ कि उसका पिता बीमार है।  मैं तुम्हारी जगह बैठ कर खेतों की रखवाली करूंगा।  सुजाता उसी रात नंबरदार को वहीं छोड़कर चला गया।  दुर्भाग्य से सुजाता की कोठरी में आग लग गई।  और बूढ़ा नंबरदार उसमें जलकर राख हो गया।  गांव के लोगों ने यह समझा के सुजाता मर गया।  उन्होंने चैन की सांस ली।  शाम ढल रही कि सारे गांव में शोर मच गया।  सुजाता थका हारा लौट रहा था।  तभी लोगों ने समझा सुजाता का भूत आ गया।

Top 3 Moral Stories in Hindi  -शिक्षाप्रद कहानियाँ !

सारा काम सुजाता का भूत  भगाने के लिए झाड़ फूंक करने को तैयार खड़ा था।  किसी के हाथ में लाठी तो किसी के हाथ में डंडा किसी के हाथ में  फरसा  तो किसी के हाथ में बलम ! सुजाता डर गया और जान बचाकर जंगल में घुस गया।  बेचारा सुजाता रात में जंगल में बैठा  रहा।   भूख के मारे उसकी जान  निकली जा रही थी।   आखिर एक रात को अपनी सास के घर पर जा  छुपा।   जब उसने अचानक देखा तो वह हार्टअटैक से मर गई।  सुजाता  वहां से डर कर भाग खड़ा हुआ।  उन्हीं दिनों एक घुड़सवार भी उसे देखकर डर गया था।

 

 

और घोड़े को बांधने की रस्सी का फंदा गले में डाल कर मर गया।  इधर सारे गांव में सुजाता के भूत का डर छा रहा था।  उधर  सुजाता की भूख के मारे बुरी हालत थी।  डूंगर के राजा ने अपने  ओझा को गांव से भूत भगाने के लिए भेजा।   ओझा को सामने पाकर सुजाता  जोर से  बोला।  “मैं भूत नहीं आदमी हूं।  मेरी कोठरी में आग लग गई थी।  उसमें गांव का  बूढ़ा  नंबरदार मर गया।(Moral Story in Hindi New)

Story in Hindi New 2019 

मैं उसकी बेटी के घर संदेश देने गया था।  इन लोगों ने सोचा कि मैं मर चुका हूं।   ओझा ने तब गांव वालों को सुजाता की कहानी सुनाई।  तब ओझा ने सुजाता से कहा।  अब अगर तुम यहां आदमी बनकर रहना चाहो तो रहो।  भूतों की तरह औरों पर सवार रहोगे तो यह लोग तुम्हें यहां नहीं रहने देंगे।  इसलिए तुम आदमी बन कर रहो।

अतः दोस्तों इस कहानी से यह निष्कर्ष निकलता है की उत्पाती और शैतान व्यक्ति को कभी-कभी परिस्थिति के अनुसार सुधारना पड़ता है।

You May Like – कंजूश बनिया बनाम भूखा पण्डित – कहानी।

अगर  Moral Story in Hindi New | Top 3 Moral Stories in Hindi -शिक्षाप्रद कहानियाँ  आपको अच्छी लगी  हो तो कृपया शेयर जरूर करें  –  इन  कहानियों को पढ़ने के लिए आपका बहुत -बहुत धन्यबाद     !!!

0Shares