Mahal sone ka ban gayaa – महल सोने का बन गया !!!

Mahal sone ka ban gayaa – महल सोने का बन गया – भूख, प्यास, नींद , आस  चार बहने  थी। चारों  बहनें  लड़ते -झगड़ते न्याय के लिए राजा के पास पहुंची। चारो ने अपने -अपने बड़े होने का दावा  किया। सबसे पहले राजा ने भूख से पूछा  ” क्यों बहन तुम कैसे बड़ी हो  ? भूख बोली  “में इसलिए बड़ी हूँ  कि  मेरे कारण ही  घर -घर में चूल्हें  जलते है। पकवान बनते है  और जब वे मुझे थाल  सजाकर देते है। तब में खाती  हूँ। नहीं तो खाऊ  नहीं।

राजा ने अपने कर्मचारियों से कहा , ” जाओ पुरे राज्य में मुनादी करा दो ,कोई चूल्हा न जलाये ,पकवान न बनाये ,थाल न सजाये ,तब देखते है कि  भूख को भूख लगेगी तो क्या करेंगी ? “

 

Mahal sone ka ban gayaa

 

 

पूरा दिन बीत  गया ,आधी रात बीती।  अब भूख को भूख लगी  .उसने खाना इधर- उधर खोजा।  लेकिन खाने को कही कुछ नहीं मिला। लाचार  होकर वह घर में पड़े बासी  रोटी के टुकड़े खाने लगी।  प्यास ने देखा तो वह दौड़ी -दौड़ी  राजा के पास पहुंची। और बोली  “राजा !राजा ! भूख हार गयी। वह बासी  टुकड़े खा रही है। इसलिए में उससे बड़ी हूँ। (Mahal sone ka ban gayaa – महल सोने का बन गया)

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Mahal sone ka ban gayaa – best hindi stories !

राजा  पूछा  “तू कैसे बड़ी है ?’ प्यास बोली ” में इसलिए बड़ी हूँ  कि मेरे ही कारण लोग कुएं ,तालाब बनबाते है ,बढ़िया -बढ़िया बर्तनो में पानी रखते है। और वे जब मुझे बर्तन भर कर देते हैं।  तब मैं उसे पीती हूं। नहीं  तो नहीं  पीती ।  राजा ने अपने कर्मचारियों से कहा, “जाओ राज्य में मुनादी करवा  दो। कोई भी अपने घर में पानी भरकर नहीं रखे।और  किसी को बर्तन भर कर पानी न दें।  कुएं तालाबों पर पहरे लगवा दो।

प्यास को जब प्यास लगेगी , तो वह कहां जाएगी। आज हम देखते हैं। पूरा  दिन बीत गया ,आधी रात हो गई ,अब प्यास को प्यास लगी ,अब वह यहां वहां दौड़ी लेकिन पानी की कहीं एक बूंद ना मिली , अब वह लाचार होकर , वह एक गड्ढे में झुक कर पानी पीने लगी। तभी  नींद ने देखा तो वह दौड़ी -दौड़ी राजा के पास पहुंची , और बोली  ! राजा  ! राजा !! प्यास हार गई।  वह गड्ढे का गंदा पानी पी रही है , वास्तव में बड़ी तो मैं हूं। (Mahal sone ka ban gayaa – महल सोने का बन गया)

” राजा  ने पूछा  ? तुम कैसे बड़ी हो , ?   नींद बोली’  मैं इसलिए बड़ी हूं ,कि लोग मेरे लिए पलंग बनवाते हैं, गद्दे भरवाते  हैं और जब वह  मुझे बिस्तर पर बिस्तर बिछा कर देते हैं , तब मैं सोती हूं , नहीं तो सो  ही नहीं , “राजा ने अपने कर्मचारियों से कहा ?  “चलो आप की भी परीक्षा ली जाए, तो राजा ने पूरे राज्य भर में मुनादी करवा दी, कि कोई पलक नहीं बनवाए और ना ही गददे  भरवाए और ना ही बिस्तर बिछाए , “नींद को नींद आएगी तो वह कहां जाएगी” आज यह हम देखेंगे ? पूरा दिन बीत गया ! आधी रात बीत गई।

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 महल सोने का बन गया – best hindi kahaani

नींद को अब नींद आने लगी !! उसने यहां –  वहां देखा ,इधर देखा उधर ढूंढा ? लेकिन कोई भी बिस्तर नहीं मिला !! “वह लाचार होकर जमीन पर लेट गई और वही सो गई। आस ने जब यह देखा तो ,  वह दौड़ी – दौड़ी राजा के पास पहुंची और बोली ! “राजा -राजा नींद  हार गई। वह जमीन पर ही सो गई है।  वास्तव में भूख -प्यास और नींद  इन तीनों में से मैं बड़ी हूं। राजा  ने  पूछा तुम कैसे बड़ी हो ?  तब आस  बोली  कि , सभी मेरे लिए  काम करते हैं। (Mahal sone ka ban gayaa – महल सोने का बन गया )

नौकरी , उधोग – धंधा , मेहनत और मजदूरी करते हैं। तकलीफ उठाते हैं। लेकिन आस  के दीप  को बुझने नहीं देते ! तभी  राजा ने अपने कर्मचारियों से कहा ? जाओ राजभर में मुनादी करा दो ,कोई काम नहीं करें ,नौकरी धंधा नहीं करें, मेहनत और मजबूरी  नहीं करें ,तथा आस  का  दीपक नहीं जलाए !! आज हम देखते है कि वह  कहां जाएगी ?  समूचा दिन बीत गया ,आधी रात बीत गई। आस को आस लगी।  वह यहाँ   – वहां गई  !!लेकिन सिर्फ एक कुम्हार  टिमटिमाते दीपक के प्रकाश में काम कर रहा था। और आस  वहां  जाकर टिक गई और राजा ने देखा की उसका दिया सोने का तथा कंचन का महल बन गया !! इस प्रकार आस  जीत गई !! राजा ने  उसे  बड़ा बताकर उसे बहुत  इनाम भी दिया।

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