Lok katha in hindi – जनाना करें मरदाना भेष – एक बुंदेली लोक कथा !

lok katha in hindi ! एक छोटी सी रियासत का एक राजा था।  वह अपने जीवन में बहुत सुखी और प्रसन्न था।  उसे किसी तरह का कोई कष्ट भी नहीं था।  उसकी  केवल एक चिंता थी  कि सिर का दर्द ठीक हो जाए।  अंत में एक ब्राह्मण ने बताया कि पुराने मोतियों  को पीसकर सिर में लगाने से दर्द हमेशा के लिए मिट जाएगा। परंतु पुराने मोती कहां से मिलते। , बड़ी खोज हुई, परंतु मोती कहीं नहीं मिले।  राजा की 1 बेटी थी।  उसका नाम था राजकुमारी।  वह सुंदर और कोमल अंगों वाली और सुंदर आंखों वाली थी।  लेकिन उसकी शादी हो चुकी थी।  पर गौना नहीं हुआ था।

 

lok katha in hindi

 

उसने मर्दाना भेष रखा।  और एक तेज घोड़ा लिया।  और अपने माता – पिता से आज्ञा लेकर मोतियों की तलाश में चल पड़ी।  साथ में था केवल एक तोता।  तोता बड़ा चतुर और बुद्धिमान था।  राजकुमारी जिस नगर में जाती,  तोते को पता लगाने के लिए छोड़ देती।  सब जगह खोजते – खोजते वह  अपने ससुर के राज्य में जा पहुंची।  उसने तोते  को पता लगाने के लिए नगर में भेजा।  कुछ देर बाद तोते ने उसे बताया कि राजा के महल के पीछे एक पुराना पेड़ है।  जिसमें मोतियों का एक गुच्छा लटक रहा है।  राजकुमारी ने राजा के बाग में डेरा डाला।

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Lok katha in hindi | short lok katha in hindi with moral !

संध्या के समय में बाग  के अंदर गई और वहां राजकुमार अपनी भाभी के साथ टहल रहे थे।  उन्हें देखकर उसके पैर जड  हो गए, तुरंत लौट आई।  उसे देखकर राजकुमार ने भाभी से कहा।  भावी !  जनाना  करें मर्दाना  भेष । ( स्त्री है परंतु पुरुष का भेष बनाए हुए हैं )  भाभी ने उत्तर दिया। नहीं कुवंर जी मर्द है।  हम दोनों को देखकर लौट गया।  कुवंर जी नहीं माने।  भाभी ने कहा अगर यही बात है, तो उसका न्योता  करो।

 

यदि  जब मर्द होगा तो जल्दी खाकर चल जाएगा।  और बच्चे के रोने पर ध्यान न देगा और दूध को  उफनते   देखकर कुछ नहीं बोलेगा।  तोता उनकी बातें सुन रहा था।  उसने राजकुमारी को  सब कुछ बता दिया।  न्योता  पाकर राजकुमारी महल में गई और भोजन करते समय उसने देखा कि दूध उफन रहा है।  पर वह कुछ न बोली, बच्चा फूट-फूटकर रोया पर उसने  कोई परवाह  न की।  भोजन करके लौट आई।  उसके जाने पर भाभी ने कुवंर जी से कहा ! कहा था ना कि मर्द है।  कुंवर जी वही बात दोहराया ना भाभी ! जनाना  करें मर्दाना  भेष

जनाना करें मरदाना भेष – एक बुंदेली लोक कथा !

इस पर भाभी ने प्रस्ताव किया।  अब तालाब में तैरने के लिए बुला लाओ।  यदि स्त्री  होगी तो जल्दी थक जाएगी।  तोते ने राजकुमारी को सूचना पहले से ही दे दी। अब  कुवंर जी और राजकुमारी तालाब में तैरने लगे।  कुवंर जी बीच  से लौट पड़े,  परंतु राजकुमारी उस पार तक पहुंच गई।  कुवंर जी  असफल होने पर लज्जित हुए।  भाभी ने फिर कहा ! लेकिन  कुवंर जी  ने वही उत्तर दिया !   जनाना  करें मर्दाना  भेष।  भाभी ने तीसरी परीक्षा ली।  माली को बुलाकर फूलों की सेज लगवाई।  और कुवंर जी से कहा।  स्त्री होगी तो फूल मुरझा जाएंगे और मर्द होगा तो ताजे बने रहेंगे।  लेकिन राज कुमारी को  यह खबर पहले ही  मिल चुकी थी। lok katha in hindi

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वह बड़े सुबह जाग गई और मुरझाए फूल घोड़े के सामने डाल दिए।  और तोते ने सैया पर  ताजे  फूल  सजा दिए।   उसी समय राजकुमारी घोड़े पर बैठकर बाग में गई।  महलों  के पीछे पहुंचकर घोड़े को एक चाबुक लगाया।  और घोड़ा दीवार लाँघ  गया।  राजकुमारी ने मोतियों  का गुच्छा तोड़ा और लौट  पड़ी।  कुवंर जी आए और उन्होंने देखा कि फूल  ताजा  थे।  और निराश होकर लौट गए।  महल के दरवाजे पर एक कागज चिपका देखकर पढ़ने लगे।  उसमें लिखा था  “नाक चुम्मा दे चली मोतनी का गुच्छा ले चली।”  राजा  साहब को जो कुछ करना है कर ले।  कुंवर ने क्रोध में कहां तुम्हारे रक्त के दो चुल्लू  न पी  लू तो कुंवर नहीं।  कुंवर समझ गए  कि यह  काम उसकी पत्नी ने ही किया है।

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तोते  ने  यह खबर भी राजकुमारी को दे दी।  राजकुमारी तुरंत घर पहुंची।  और मोतियों को पीसकर लगाने से राजा बिल्कुल ठीक हो गये ।  रानी प्रसन्न रहने लगी परंतु राजकुमारी चिंता से सूखने लगी।  एक बार रानी ने राजकुमारी को अपनी कसम रखकर उससे  सारी घटना जानली।  उन्होंने धीरज बधाया ! बेटा चिंता ना कर ! मैं सब उपाय कर लूंगी।  कुछ दिनों के बाद राजकुमारी की बिदा की तिथि आई।   विदा की तैयारी होने लगी।  रानी ने बेसन की एक पुतली  बनवाई।  बिल्कुल राजकुमारी की तरह।  उसके अंदर लाल रंग का सीरा  (शक्कर को गर्म करके बनाया गया द्रव) भरवा दिया। lok katha in hindi

 

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और उसे कीमती कपड़े – गहनों से सजा दिया।  आगे के डोले में उसे बिठा दिया गया।  और पीछे के डोले में राजकुमारी दासी  के रूप में बैठी थी।  जब डोले महल के दरवाजे पर पहुंचे, तो  कुंवर ने म्यान से तलवार खींच ली।  और पुतली  के दो टुकड़े कर दिए।  रक्त का फव्वारा फूट पड़ा और कुंवर  ने जैसे ही पिया बहुत मीठा लगा।  वह अपने आप बोले ! “जिसका  रक्त इतना मीठा है वह कितनी मीठी ना होगी।”  कुंवर को बड़ा दुख हुआ।  उन्होंने अपनी तलवार से स्वयं पर चोट करनी चाही।  परंतु दूसरे डोले पर बैठी  राजकुमारी तुरंत कूदी और झपट कर तलवार पकड़ ली।  और उन्हें सारी कहानी सुना दी।  अंत में दोनों प्रेम से रहने लगी। lok katha in hindi

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