king love story in hindi – झरोखें, एक राजकुमार की प्रेम कहानी !!!

king love story in hindi ! मथुरा के राजा इंद्रजीत की बेटी थी लीला।  जो बहुत ही सुंदर थी।  उसकी सुंदरता  की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी।  नारायण उधर एक आवारा और  व्यैस्यागामी युवक था।  न जाने उसने लीला पर कौन सा वशीकरण मंत्र चलाया था। कि वह उसे अपना हृदय दे बैठी थी।  परंतु   नारायण अधिक दिन जीवित नहीं रहा।  लीना ने अपने कमरे में  नारायण की  मूर्ति बनाकर रख ली और विधवाओं के वेश में सबसे अलग-थलग रहने लगी।  उसके साथ में केवल एक सेविका थी।  अनेक राजकुमार लीला से विवाह करने के इच्छुक थे।

 

king love story in hindi

 

 

एक थे  राजकुमार बंधु।   वह लीला के पिता राजा इंद्रजीत से मिले।  राजा इंद्रजीत ने कहा।  मुझे तो लीला के साथ आपके विवाह में कोई आपत्ति नहीं।  परंतु तुम्हें राजकुमारी का हृदय जीतना होगा।  यदि  तुम सफल हुए तो राजकुमारी  ही नहीं।  मेरा आधा राज्य भी प्राप्त कर सकोगे।  पर कठिनाई तो यह है कि वह किसी से भेंट नहीं करती।  या तो वह  अपनी कच्छ में रहती है।  या फिर झरोकों से जमुना को निहारती रहती है।  राजकुमार बंधु ने तुरंत एक योजना बनाई।

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king love story in hindi | king and queen love story in hindi !

और राजा से पूछा।  राजकुमारी को झरोखों के नीचे नागरिकों के आने में तो कोई आपत्ति नहीं होती।  अभी तक तो उसने कोई आपत्ति नहीं की है।  इस प्रकार राजा ने कहा।   अपनी योजना के अनुसार राजकुमार ने एक पुतला तैयार करवाया।  और उसे औरत  के कपड़े पहना दिए।  फिर एक  टूटी – फूटी  नाव् लेकर नाविक  के भेष में राजकुमारी के झरोकों की ओर चल पड़ा।

राजकुमारी उस समय झरोकों पर खड़ी हुई थी।  नाविक को देख उसने पूछा कौन हो तुम।  यहां क्यों आए हो।  उसने उत्तर दिया मेरी नाव बहुत पुरानी है।  और तूफान भी आने को है।  अपनी मालकिन से पूछ कर बताओ कि क्या मैं यहां कुछ समय के लिए रुक सकता हूं।  राजकुमारी ने लीला समझ गई कि नाविक उसे नहीं पहचानता।  इसलिए उसने कोई आपत्ति नहीं की।  कुछ समय पश्चात उसने नदी तट से नाविक की आवाज सुनी।  उसने अपनी दासी को यह देखने के लिए भेजा कि नाविक क्या कर रहा है।

दासी नदी तट पर आई  तो उसने देखा के नाविक ने दो व्यक्तियों का खाना बनाया हुआ है।  एक व्यक्ति के लिए उसने चांदी के पात्रों में परोसा।  और दूसरे के लिए पत्तल पर।  वह पुतली को मनाते हुए कह रहा है।  आओ प्रिये  खा लो।  देखो मैं तुम्हारे बिना कैसे खाऊं।  जब तुम जीवित  थी तब भी क्या हम अलग-अलग खाते थे।  दासी  ने पूछा नाविक।  यह पुतली कैसे खाएगी।  किसकी  पुतली  है।  नाविक ने गले से लगाकर कहा मेरी पत्नी की पुतली है।  4 वर्ष पूर्व उसकी मृत्यु हो गई थी।  वह मेरे बिना खाना नहीं खाती  थी ।

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Rajkumari aur Rajkumar ki love story | एक राजकुमार की प्रेम कहानी !

मैं भी उसे बहुत प्रेम करता था।  उसकी मृत्यु के बाद मैंने उसकी पुतली बन बाई।  इसे हमेशा साथ रखता हूं।  दासी ने आश्चर्य से पूछा।  लेकिन इसके आगे तो तुमने चांदी के पात्रों में भोजन रखा है।  अपने सामने पत्तल में।  अपनी पत्नी से मैं बहुत प्रेम करता हूं ना।  मैंने इसके लिए बढ़िया बस्त्र  और आभूषण भी बनवाए हैं।

रोज बदल देता हूं दिखाओ तुम्हें।  नाविक  ने दासी की उत्सुकता बढ़ा दी।  दासी ने जब वस्त्र और आभूषण देखे तो आश्चर्यचकित रह गई।  यह सोचकर तो और भी कि  नाभिक स्वयं चिथड़े पहने था।  नाविक  – मेरा क्या है।  अब किसके लिए पहनू ।  नाविक ने कहा।  जितना कमाता हूं इस पर ही खर्च कर देता हूं।  दासी  ने जाकर सारी बात राजकुमारी लीला को बता दी।  राजकुमारी ने सोचा कि यह कैसा  व्यक्ति है।  जो अपनी मृत पत्नी से इतना प्रेम करता है।  जब वह जीवित रही होगी तो वह उसे कितना प्रेम करता होगा।

 

king love story

 

अगले दिन नदी तट से कराहने की आवाज सुनाई दी।  लीला  ने दासी को नीचे भेजा।  उसने जाकर देखा कि नाविक के माथे पर पट्टी बंधी है और वह कराहता हुआ किसी को गाली दे रहा है।  उसने पूछा क्या हुआ।  नाभिक ने बताया कि रात को अचानक किसी ने मुझ पर हमला कर दिया।  मैं तैयार नहीं था।  इसलिए चोट खा गया।  मगर अब वह मिल जाए तो उसकी हड्डी पसली एक कर दू ।  वह मेरी पतवार भी ले गया।  इसलिए मैं नाव्  भी नहीं ले जा सकता।

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Raja rani love story in hindi | True love story in hindi  !

यह तुम्हारी स्वामिनी की कृपा हो जाए तो नाव को छोड़कर बाजार से नयी  पतवार ले आऊ ।  और  वैद्य से  दवा भी ले आऊ ।  दासी,  लीला से  उसकी अनुमति देकर लौट आई।  राजा दासी  के लिए एक जड़ाऊ हार खरीदा और लौट आया।  उसकी आवाज सुनकर दासी नदी तट पर आ गई।   यह लो  हार ! असली हीरो का है।  तुम्हारे लिए ही लाया हूं।  बस तुम्हें मेरा एक छोटा सा काम करना है कि तुम्हारे सामने के कक्ष में जो मूर्ति रखी है।   वह मुझे रात भर के लिए ला दो।  सूर्योदय से पहले ले जाना।  दासी मान गई।

राजकुमारी के सो जाने के बाद दासी ने नारायण की मूर्ति नाविक को  ला दी।  सूर्योदय से पहले ही नदी तट पर शोर सुनाई दिया।  राजकुमारी की आंख खुल गई वह उठी और झरोखों पर आकर देखा के नाविक अपनी पत्नी की पुतली को बुरा भला कह रहा है।  अब मेरा तुम्हारा कोई संबंध नहीं।  तुम्हारे मरने के बाद मैं भी दूसरा विवाह नहीं किया।  तुम्हारा इतना ध्यान रखा  कि  पहले तुम्हें खिलाया फिर खुद खाया।

Rajkumari aur Rajkumar ki love story

 

वस्त्र और आभूषण दिए।  खुद मैंने चिथड़े पहनता रहा।  और जब में एक रात के लिए बाहर गया।  तुमने  अपने प्रेमी को बुला लिया।  राजकुमारी लीला ने सोचा की पुतली कैसे किसी को बुला सकती है।  वह दूसरे कक्ष में पहुंची की दासी को भेजकर पता लगाएं कि सच क्या है। वहां पहुंचकर  वह चीख उठी।  उसने देखा कि  नारायण की मूर्ति वहां नहीं थी।  नीचे से आवाज आ रही थी।  नाविक रोता हुआ कह रहा था।  मुझे क्या पता था कि यहां प्रेत रहता है।  पहले इसने मुझे कल रात  मारा।

Raja ki love story in hindi | Story of king in hindi !

अब वह मेरी पत्नी से प्रेम कर रहा है।  यह प्रेत भूमि है।  राजकुमार लीला झरोखों में खड़ी सब सुन रही थी।  उसने वहीं से पूछा लेकिन  बेजान मूर्तियां इंसानो की तरह व्यवहार  कैसे कर सकती  हैं नाविक।  प्रेत खुद  कुछ नहीं कर सकते।  यदि  उन्हें शरीर प्राप्त हो जाए तो वह ठीक मानव जैसा ही व्यवहार  करते हैं।  यह मूर्ति जरूर किसी लंपट व्यक्ति की होगी।  जिसने पहले मुझ पर आक्रमण किया और फिर मेरी पत्नी को वहका लिया।

लेकिन मेरी पत्नी भी तो कुठला निकली।  नाविक  क्रोध में जोर जोर से बोलने लगा।  मैं ऐसी विश्वासघाती पत्नी की याद में क्यों पागल बना घूमता रहूं।  मैं दोनो को नदी में डूबे दूंगा।   यह कहकर उसने अपने पुतली और मूर्ति दोनों को उठाकर यमुना में फेंक दिया।  राजकुमारी लीला सोचने लगी।  क्या बस नारायण इतना लंपट था के अवसर मिलते ही दूसरे की स्त्री के पास जा पहुंचा।  अगर वह लंपट ना होता तो उसका प्रेत इतना नहीं… नहीं…।  और उस लंपट नारायण के लिए विधवा सा जीवन व्यतीत करती रही।  नहीं अब और नहीं।

Raja rani ki pyar ki kahani !

वह दौड़कर नदी तट पर पहुंची। नाविक वहां से लौटने का अभिनय कर रहा था।  राजकुमारी लीला  ने उसे रोककर कहा सुनो।  मैं दासी नहीं राजकुमारी लीला हूं।  वह मूर्ति नारायण की थी जिससे मेरा विवाह होने वाला था।  वह चोट लगने से मर गया और शादी हुए बिना ही में विधवा सा जीवन व्यतीत करने लगी।  अब मेरी आंखे खुल गई हैं।  सुनो मुझसे शादी  करोगे।  नाविक सिर नीचे करके  सुनता रहा।

कुछ समय पश्चात राजकुमारी लीला और नाविक के भेष में राजकुमार बंधु  को अपने समक्ष पाकर  राजा इंद्रजीत मन ही मन मुस्कुराए और राजकुमार बन्धु  को उसकी सफलता पर बधाई दी।  परंतु राजकुमारी को सुनाकर उन्होंने कहा बेटी नाविक तो अत्यंत निर्धन लगता है।पिताजी यह निर्धन अवश्य है परंतु उसका हृदय निर्मल है।  मैं इसके साथ सुखी रहूंगी।

 

Raja rani love story in hindi

 

राजा इंद्रजीत और राजकुमार बंधु एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कुराए।  राजकुमारी नीचे की तरफ देखती खड़ी रही।  दोनों की शादी हो गई। राजकुमार बंधु को लीला के साथ-साथ आधा राज्य  भी मिल गया।  और दासी को नाविक की मृतक पत्नी (पुतली ) के सारे आभूषण।

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