Kanjush Ka Ghar hi Kyo Pyara – कंजूस का घर ही क्यों प्यारा – लक्ष्मी देवी ?

हेल्लो दोस्तों कैसे है आप ! आपका इस वेबसाइट में बहुत – बहुत स्वागत है। आज हम आपके लिए एक बहुत ही सुन्दर एक धार्मिक आर्टिकल लेकर आये है। अतः  इस  कहानी  को  समझने ले लिए अंत तक ध्यान से जरूर पढ़े । कहानी इस प्रकार है। Kanjush Ka Ghar Hi Kyo Pyara 

एक भक्त लक्ष्मी देवी के मंदिर में जाता था और ध्यान लगाकर पूजा करता था 1 दिन लक्ष्मी जी की प्रतिमा बोली भक्त ! मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ, कहो क्या मांगना चाहते हो। भक्त ने कहा मैं कोई वरदान मांगने से पहले आपसे कुछ पूछना चाहता हूं। उचित जवाब से मुझे संतुष्ट कीजिए आप देवी हैं तथा मानव जीवन की सब गतिविधियों से परिचित हैं। लक्ष्मी जी ने कहा तुम सवाल पूछो मैं उचित उत्तर अवश्य दूँगी। (Kanjush Ka Ghar Hi Kyo Pyara)

kanjus ka ghar hi kyo pyara -lakshmi
मुझे विश्वास है कि मेरे जवाब से तुम संतुष्ट अवस्य होंगे। इस प्रकार  भक्त एक -एक करके माता लक्ष्मी से  सवाल पूछने लगा, “आप शूरवीर के घर क्यों नहीं रहती हैंदानी  के घर में पैर रखते हुए आप को डर लगता है। और विद्द्वान के पास रहना आपको अच्छा नहीं लगता है। आप कंजूस के यहां रहकर ही प्रसन्न क्यों रहती हैं। यह मेरे कई प्रश्न नहीं बल्कि एक ही सवाल है। कृपया माता मेरे प्रश्नों  के जबाब देकर मुझे सन्तुष्ट करे। (Kanjush Ka Ghar Hi Kyo Pyara)

Kanjush Ka Ghar Hi Kyo Pyara – एक भक्त और  माता लक्ष्मी  के बीच  संबाद !

लक्ष्मी देवी पहले कुछ मुस्कराईं फिर बोली, भक्त ध्यान से सुनो, मैं शूरवीर के पास इसलिए नहीं रहती कि वह एक युद्धप्रेमी है। और किसी भी समय स्वर्गवासी हो कर मुझे विधवा बना सकता है। दानी मेरा सम्मान नहीं पहचानता,वह दोनों हाथों से मुझे बांटता रहता है विद्द्वान के यहाँ सरस्वती रहती है जो मेरी सौत है सौत तो आटे की भी बुरी लगती है  इसलिए में इन तीनों  के घर नहीं रहती हू। (Kanjush Ka Ghar Hi Kyo Pyara)

और कंजूस का घर मुझे अधिक प्रिय है क्योंकि वह सम्मान से मुझे रखता  है। मरते दम तक मेरी देखभाल करता है। इसलिए में कन्जूस के घर ज़्यादा रहती हू।   भक्त ! मुझे आशा है, अब तुमने अपने सवाल का जवाब पा लिया होगा  इस प्रकार माता  द्वारा दिए गए प्रश्नों के जबाबो  से भक्त सन्तुष्ट हो गया , और भक्त ने सिर झुका कर माता के चरणों में नमन किया और प्रसन्नता से बाहर चला गया लक्ष्मी देवी मूर्ति में समा गई

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