Inspirational Short Story in Hindi | Moral Stories In Hindi for class 7,8,9,10

1- एक वादी की गुहार ( पैनी दृष्टि सत्य को खोज निकालती है ) – Inspirational Short Story in Hindi

राजा बादाम सिंह की राज्यसभा में एक वादी ने आ कर गुहार लगाई :- महाराज,
मैंने 5000  स्वर्ण मुद्राएं सेठ गोलू राम के पास रखी थीं अब वह वापस उन्हें लौटता नहीं है
यह सब सुनकर सब लोगों को आश्चर्य हुआ क्योंकि ऐसा कभी होता नहीं था कि कोई किसी का लिया हुआ धन वापस ना करें । सिपाही भेज राजा ने सेठ
गोलू राम को बुलवाया । Inspirational Short Story in Hindi
राजा सेठ से:- यह वादी रामदीन कहता है कि इसने तुम्हारे पास 5000  स्वर्ण मुद्राएं गिरवी रखी थीं। और अब उसका धन आप वापस नहीं कर रहे हो ।
Inspirational Short Story in Hindi
सेठ गोलू राम एक मोटा और थुल-थुल आदमी था । जो मोटी लाठी के सहारे चलता था उसी के सहारे वो राजा के पास दरबार पहुंचा,
राजा ने सेठ गोलू राम को अपने पास आने का आदेश दिया तो सेठ गोलू राम ने अपनी लाठी वादी रामदीन को थमा दी और सेठ बोला कि जब तक मैं महाराज से निवेदन करता हूं तब तक इस लाठी को आप अपने पास रख लो ।

Moral Stories In Hindi for class 7,8,9,10

रामदीन ने वह लाठी ले ली
सेठ गोलू राम ने राजा के सामने जाकर बड़े शांति पूर्वक कहा :-
” वादी रामदीन का यह कहना सत्य है महाराज ” कि रामदीन ने अपना धन मेरे पास गिरवी रखा था परंतु वो धन मैंने रामदीन का वापस कर दिया है ।

 राजा सेठ गोलू राम से:- क्या आप गंगाजल की शपथ लेकर कहोगे कि आपने रामदीन का पूरा धन वापस कर दिया है।

सेठ गोलू राम ने बड़ी दृढ़ता से कहा:- महाराज,  साँच को आँच कहां?
आप जो शपथ लेने को कहें मैं पूर्ण रुप से तैयार हूं शपथ लेकर झूठ बोलने पर एक ही दंड था-मृत्युदंड
राजा ने दरबार में गंगाजल मंगवाया और सेठ गोलू राम को शपथ लेने को कहा । Inspirational Short Story in Hindi

Moral Stories In Hindi for class 7,8,9,10

“सेठ गोलूराम “-  मैं साक्षात् गंगा मैया की शपथ लेता हूं कि मैंने रामदीन की 5000 स्वर्ण मुद्राएं उन्हें वापस कर दी हैं दरबार में सन्नाटा छा गया सब कहने लगे कि वादी रामदीन ही झूठ बोल रहा है । राजा ने वादी रामदीन की तरफ देखा कि वह इस विषय पर कुछ कहे पर रामदीन को कुछ सूझ नहीं रहा था राजा ने सभा को स्थगित किया और कहा इस मामले को यहीं छोड़ा जाता है और कल इसका निर्णय सुनाया जाएगा सेठ गोलू राम अपने घर चलने को तैयार हुआ तो उसने अपनी लाठी वादी रामदीन से वापस देने को कहा ।
रामदीन ने सेठ गोलू राम से कहा सेठ जी आप की लाठी बहुत अच्छी है कृपया इसे मुझे भेंट कर दें अगर आपको सहारे की जरूरत होगी तो मैं दूसरी लाठी मंगवाए देता हूं यह कहते हुए सेठ गोलू राम से लाठी वादी रामदीन ने लगभग छीन ही ली । सेठ गोलू राम कहता रह गया नहीं नहीं वह लाठी में नहीं दूंगा वादी रामदीन ने लाठी के दोनों सिरों को पकड़कर खींचा तो वह बीच से खुल गई भीतर वह पोली थी ।
 और उसमें सोने के सिक्के भरे हुए थे जब सेठ ने कहा था कि मैंने वादी रामदीन को उसकी स्वर्ण मुद्राएं लौटा दी हैं तब उसने झूठी शपथ नहीं ली थी।
तो इसका तात्पर्य यह हुआ कि
# पैनी दृष्टि सत्य को खोज निकालती है #

2- मौन  रहने  का फल – हिन्दी  कहानी  – Moral Stories In Hindi for class 7,8,9,10 !

एक लड़की बड़े ही सरल स्वभाव की थी । वह अपनी मां के साथ कथा सुनने जाया करते थी । कथा सुनते सुनते उसका हृदय बड़ा स्वच्छ हो गया ।
 और उसका विवाह हो गया। वह ससुराल में जाकर रहने लगी। उसकी सास बड़ी झगड़ालू थी। वह उसे कई बार कुछ उल्टा सीधा कह देती ना सहने योग्य बातें सुनकर वह लड़की भी अपनी सास को जवाब दे देती। Short motivational stories with moral
एक बार वह जब अपने पीहर आई। तो अपनी मां के साथ कथा सुनने गई।कथावाचक महात्मा जी ने उससे पूछा- ” बेटी तुम्हारी ससुराल वाले अच्छे तो हैं न?”तुम्हारे साथ उनका व्यवहार तो बड़ा मधुर होगा ?”
 लड़की ने तुनककर कहा:- ” अच्छे लोग कहां हैं वे महात्मा जी। मेरी  सास तो बड़ी लड़ाकू है ।जब देखो तब कुछ ना कुछ बुड़बुडा़ती रहती है।  आप मुझे कोई ऐसा तावीज नहीं दे सकते।जिससे मेरी सास मुझसे लड़ाई न करे?
महात्मा जी वोले:-  “क्यों नहीं बेटी, मैं तुम्हारे लिए भला क्या नहीं कर सकता और इतना कहकर महात्माजी ने सादे कागज के एक टुकड़े को लपेटकर ताबीज में बंद किया और उस लड़की को देते हुए बोले :-“बेटी, जब भी तुम्हारी सास तुझे खरी खोटी  सुनाने लगे तुम इस ताबीज को अपने दांतो तले दवा लेना और मुंह नहीं खोलना यदि लगभग एक माह में तुमने इस नियम का पालन कर लिया तो तुम्हारी सास तुम से लड़ना झगड़ना बिल्कुल बंद कर देगी। Inspirational Short Story in Hindi

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उस लड़की ने ऐसा ही किया। धीरे-धीरे सांस का व्यवहार बदलने लगा।एक महीने बाद जब उसकी सास का स्वभाव एकदम बदल गया। तो उसकी समझ में आ गया।कि यह तो उसके मौन रहने का फल है ।।
@ क्रोध आने पर मौन रहना ही सबसे उत्तम है न मुँह से खरी खोटी निकलेगी ना रार बढ़ेगी@
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