15 Hindi Short Stories With Moral for kids – 15 प्रेरणादायक कहानियाँ !

1-एक नीति कथा –  सारस ,कौवा और शिकारी (15 Hindi Short Stories With Moral)

(15 Hindi Short Stories With Moral ) बरगद के पेड़ पर सारस रहता था वह बहुत ही नेक दिल का था कुछ दिन बाद उसने एक कौवे से मित्रता कर ली।  खोवा कुटिल था और गंदी सोच रखने वाला था।  और उसके अन्य मित्रों ने उसे आगाह भी किया की दुष्ट की संगत अच्छी नहीं होती पर सारस उनकी बात को चलता रहा।

 एक दिन एक थका हुआ  गर्मी से परेशान होकर एक शिकारी  उस पेड़ के नीचे से गुजरा जिस पर सारस हमेशा बैठा करता था।  उस शिकारी ने देखा इस पेड़ की बहुत ही अच्छी घनी छाया है चलो थोड़ा आराम कर लेता हूं।  और यह निश्चय करके वह उस पेड़ के नीचे लेट गया।  उसकी आंख लग गई।  सारस ने शिकारी पर पढ़ती धूप को देखा।  तो उससे रहा न गया।  और उसने अपने पंख फैला दिए।  जिससे शिकारी के चेहरे पर धूप पड़ने बंद हो गई।

 सारस की नेकी देखकर कौआ हँसा और उसने उस शिकारी के ऊपर बीट कर दी।  जो शिकारी के मुंह पर गिरी।  और कौआ वहां से तुरंत उड़ गया। पर सारस पंख फैलाए हुए बैठा रहा।  बीट पढ़ते ही शिकारी की नींद उचट गई और आंख खुलते ही उसे अपने ऊपर सारस नजर आया।  उसने क्रोध में चमक कर धनुष पर बाण चढ़ाकर तीर मारा जिससे सारस मर कर नीचे गिर पड़ा।

 तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कभी भी  दुष्ट मित्र के साथ मित्रता नहीं करनी चाहिए।

 

2-समझदारी – (Top 10 Short Stories in Hindi)

 

किसी जंगल में एक शेर रहा करता था।  उनमें एक भेड़िया और एक लोमड़ी दोनों उसकी सेवा में उपस्थित रहते थे।  और उसके  बचे – बचाए मांस से अपना पेट भर लेते थे।  एक दिन शेर ने शिकार मारकर भेड़िए को इशारा किया।   तू हममें  इसे बांट दें।

 भेड़िए ने 3 बराबर भाग कर  प्रत्येक को उसका एक भाग दे दिया।  शेर ने यह  समानता देखकर भेड़िए को ऐसा तमाचा मारा कि उसका सिर अलग जा पड़ा।  फिर लोमड़ी से कहा , कि यह  गोश्त हम दोनों में बांट दें।

 

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 लोमड़ी ने सबका सब शेर के आगे रख दिया।  शेर ने पूछा ” यह शिष्टाचार तूने कहां से सीखा ?”

 तो लोमड़ी बोली ” उस भेड़िए के मारे जाने से। “

  तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह  शिक्षा मिलती है कि हमें परिस्थिति के हिसाब से सीखना चाहिए।

 

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3-कौडे का दर्द – (Hindi Short Stories With Moral)

ईरान देश में एक बूढ़े काजी के पास खलीफा पहुंचे।    राजकीय कामकाज का प्रशिक्षण लेने शहजादा बूढ़े का जी के पास टिका हुआ था।

खलीफा बोले”  किबला,   क्या इस ने सब कुछ सीख लिया ? ” (15 Hindi Short Stories With Moral)

 काजी बोला, ” जी हां बस आखरी बात बतलानी  नहीं रह गई है।  यह कहकर काजी ने शहजादे के कपड़े उतरवा दिए और उसकी नंगी पीठ पर 2 कोड़े मारे।

 खलीफा दंग रह गए।   पूछा” कि  यह आपने क्यों किया हजरत ?”

 काजी बोले, ” जब यह बादशाह बनेगा,  तब यह लोगों को कोड़े लगवाने की सजा दिया करेगा।  मैंने इसे  कोड़े की मार के दर्द का एहसास करा दिया है।  जिससे सजा सुनाने से पहले इसे तकलीफ का अंदाज हो सके।

4-दुल्हन की तलाश (15 Hindi Short Stories With Moral for kids)

पोलैंड में एक सुंदर युवक रहता था। वह युवक हर प्रकार से संपन्न था।  लेकिन अभी उसकी शादी नहीं हुई थी।  क्योंकि उसे सर्वगुण संपन्न वाली पत्नी की तलाश थी।  लेकिन कैसे मिले ? ”  इसके लिए उसने एक योजना बनाई। (15 Hindi Short Stories With Moral )

वह  भिकारी के रूप में एक घर में गया।  वहां लड़की से उसने कहा , ” मैं 2 दिन से भूखा हूं , मुझ गरीब पर दया करो। ” लड़की पसीज गई , उसने उसे पनीर और रोटी खिलाई।  इसी प्रकार वह अब दूसरे घर के दरवाजे पर गया।  वहां भी युवक ने वही शब्द  दोहराया।  लड़की अंदर से निकल कर आई।  और लड़की ने कहा की रसोई घर बंद हो चुका है खाना अब नहीं बन सकता।

पर उसकी जगह वह उसे एक ऊनी कोट दे गई।  युवक आगे चलता रहा।  इसी प्रकार व तीसरे घर के दरवाजे पर था,  वहां पर भी उसने   भिक्षा के लिए याचना की। लड़की ने युवक को बुरी तरह से  लताड़ा  और कहा ! ” हट्टा कट्टा नौजवान हो , तुम्हें भीख मांगते शर्म नहीं आती। “

 इस तरह पत्नी की तलाश में उसे तीसरे घर की लड़की  ने प्रभावित किया और खुशी-खुशी युवक अपने घर लौट आया।  और शादी के लिए उसके पास प्रस्ताव भेज दिया।  और कुछ दिनों में ही उस युवक की तीसरी लड़की से शादी हो गई।

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5- 3 चूहों की कहानी – (Hindi Short Stories With Moral)

 एक  बनिया के घर में 3 चूहे रहते थे। 1 दिन 3 चूहों को एक बड़े और ऊंचे पात्र में तेल की गंध मिली  और वे उसे पीने के लिए बहुत ही  व्याकुल थे।  लेकिन तेल तो बर्तन की सतह से लगा हुआ था।  चूहों ने सोचा , वे बारी-बारी से एक दूसरे की पूछ पकड़ कर नीचे उतर आएंगे, और अपने – अपने हिस्से का तेल पी लेंगे।  तीनों ने मिलकर कसम खाई की हुए स्वार्थी नहीं बनेंगे।

और एक दूसरे की बात मानेंगे।  और वह तेल पीने के लिए चल दिए।   वे एक -दूसरे की  पूछ पकड़ कर पात्र में लटक गए। सबसे पहले तेल पीने वाले चूहे ने सोचा , ” तेल तो काफी कम है,  क्यों ना  सारा तेल मैं ही पी लूं। ”  बीच वाले चूहे ने सोचा ‘ अगर नीचे वाले ने  सारा तेल पी लिया।  तो मेरे लिए कुछ भी न बचेगा,  क्यों न में कूदकर उससे पहले  तेल पी लूं।

 

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 ठीक यही बात पीछे वाले चूहे ने सोची और दोनों बिना आगा पीछा सोचे  उस पात्र में कूद पड़े।  नतीजा यह हुआ की तीनों उस गहरे पात्र में गिर पड़े , जहां से वह फिर कभी नहीं निकल सके।  और वही उसी पात्र में अपने प्राण गंवाने पड़े।

 तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है  कि  किसी भी  प्रतिकूल परिस्थिति में हमें एक दूसरे का साथ देना चाहिए और स्वार्थी नहीं बनना चाहिए क्योंकि स्वार्थ  कभी-कभी हमारे लिए ही नुकसानदायक हो जाता है। (15 Hindi Short Stories With Moral )

6-सारस और बत्तख – (15 Hindi Short Stories With Moral for kids)

 प्राचीन समय की बात है। चीन में एक महान डॉक्टर रहते थे। वह एक कुशल सर्जन भी थे।  उन्हें पक्षी पालने का बहुत शौक था।  तो वह 1 दिन बाजार गए थे।  उन्होंने बाजार से एक जिंदा बतख और एक सारस खरीदा।  उन दोनों का डॉक्टर साहब बहुत ही ख्याल रखते थे।

 डॉक्टर साहब जब भी उन दोनों को देखते थे तो उन्हें बड़ा अजूबा सा लगता।  क्योंकि सारस तो लंबा था और बतक छोटी सी।  एक दिन उनके दिमाग में आया क्यों ना हम इनको बराबर कर दें।  उन्होंने सोचा कि यह दोनों देखने में अच्छे और एक जैसे लगे ,   इसलिए क्यों ना हम इसके लिए इनके पैर काटकर बराबर की नाप कर दें।

” और उन्होंने ऐसा ही किया  उसने सारस के लंबे पैरों को काटकर आधा कर  दिया।  और आधे बचे पैरों को बत्तख के पैरों के साथ जोड़कर सिल दिया।  दोनों की बराबर ऊंचाई देखकर वह अपनी सफलता पर बहुत खुश हुए। और दोनों से  बोले , तुम दोनों को अब अपनी बराबर की ऊंचाई पाकर खुश होना चाहिए।  मैं तुम दोनों को आजाद करता हूं।  ताकि अन्य पक्षी तुम्हें देखें।  और मेरे कौशल की प्रशंसा करें।

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” लेकिन यह हमारे लिए खुशी कि नहीं बल्कि दुख की बात है,” दोनों ने एक साथ जवाब दिया।

 डॉक्टर बोले – लेकिन क्यों?”

 जवाब में कहा – “इसलिए कि” सारस ने अपनी लंबी नुकीली चौंच दिखाते हुए कहा , देखिए” अब छोटी टांगों के कारण  मैं नदी में खड़ा नहीं रह सकता।  और इसी कारण मछली नहीं पकड़ सकता।  तो जिंदा कैसे रहूंगा।

इसी प्रकार बत्तख ने भी  अपनी चपटी चौच  दिखाते हुए कहा, ” आप जानते हैं, मैं पानी में तैर कर शिकार करती थी।  अब मैं इन पैरों के कारण तैर नहीं सकती। ” और मैं इस प्रकार अपना भोजन ग्रहण करने में असमर्थ हूं।  और मैं भूख से मर जाऊंगी।

 तो दोस्तों इस कहानी का  निष्कर्ष यह निकलता है कि- नैतिक नियमों के विरुद्ध कार्य करने के परिणाम बुरे ही होते हैं।

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7- क्रूर की दया – (Hindi Short Stories With Moral)

 एक सांप था।  जो अपने आप को बहुत ही दयालु समझता था।  एक बार उसने एक गौरैया चिड़िया को पकड़ा।  वह उसे निकलना तो चाहता था।  लेकिन उसके साथ क्रूरता नहीं बरतना चाहता था।

इसलिए उसने कुंडलियां बनाकर उसे जोर से कस लिया ,और एक कोशिश करने लगा  कि  किसी तरह गौरैया ही आत्मसमर्पण करके उसके मुंह में चली जाए।  इस कोशिश में जब गौरैया  अध मरी  हो गई, तब वह उससे बड़ी विनम्रता के साथ यह कहते हुए निगल लिया ,” देखा” मैं और दूसरे सांपों की तरह क्रूर नहीं हूं, मैं उनसे बिल्कुल अलग हूं।  मैं क्रूरता के साथ शिकार नहीं करता।  इसलिए मैं बहुत ही दयालु हूं। (15 Hindi Short Stories With Moral )

 इसलिए दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है  कि – क्रूर मनुष्य कभी दयालु नहीं हो सकता।

 

8- कर्म – (Karm)

 

 एक बार एक तूफानी संध्या थी।  लोग अपने-अपने घरों में छुपे बैठे पश्चाताप कर रहे थे और पुजारी प्रार्थना कर रहा था।  तभी पूजा स्थल के द्वार पर एक दस्तक हुई।  पुजारी की अनुमति पाकर एक स्त्री अंदर आई लेकिन उसका धर्म भिन्न  था।  पुजारी ने उपेक्षा से उसकी ओर देखा और चीख कर कहा , ” दुष्टा, यहां से चली जा !

  यहां केवल मेरा धर्म मानने वाले ही आ सकते हैं।  वह स्त्री कांपती हुई पूजा स्थान से बाहर हो गई।  उसी क्षण भयानक गरज के साथ बादलों में बिजली  प्रकट हुई और लहराती हुई उस पूजा स्थान पर गिरी।  लोग तुरंत वहां दौड़े।  देखा पुजारी जलकर राख हो चुका है।  और दूसरे धर्म को मानने   वाली वह स्त्री जंग लगी बाल्टी हाथ में लिए रोते हुए आग बुझाती फिर रही है।

 दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए।  दूसरों में धर्म की जगह इंसानियत को पहचानना चाहिए।

 

9- सूडान की लोककथा  -15 Hindi Short Stories With Moral for kids

 

 सूडान के एक नगर में एक फकीर की बहुत ख्याति थी।  वह फकीरों का उस्ताद माना जाता था।  1 दिन बादशाह को उस फकीर से मिलने की इच्छा हुई।  तो बादशाह ने फकीर को अपने दरबार में पधारने का निमंत्रण भेजा ,लेकिन फकीर नहीं गया।

आखिर एक दिन बादशाह स्वयं फकीर से मिलने के लिए पास आया।  उसने उपहार स्वरूप पकवान फकीर को भेंट किए।  फकीर ने आईना निकाला और उस पर एक ग्रास  मल  दिया।   उससे उस फकीर का आईना धुँधला  हो गया।  उसके बाद फिर उसने सूखी रोटी निकाली ,और उससे  धुँधला आईना साफ किया।  और उस रोटी को वह बड़े चाव से खाने लगा।

यह सब कुछ देख कर बादशाह हैरान रह गए।  और आखिर पूछ ही लिया। यह सब क्या है?” फकीर ने समझाया ” आपका भोजन मेरा आईना धुंधला कर  देता है।  लेकिन मेरी जौ  की रोटी उसे साफ कर देती है।  अब आप ही बताइए उसे में क्यों त्यागूं।  इसी प्रकार यह जौ  की रोटी मेरे शरीर को साफ करेगी जिससे मेरा मन  साफ और शुद्ध रहेगा।  अतः बादशाह उस फकीर का जवाब पाकर अपने राज्य में लौट आए।

 तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है  कि – हमेशा मनुष्य को अपनी मेहनत का खाना ही खाना चाहिए।

 

10- मुंह  लगी मक्खी !

 

 एक मक्खी थी।  वह दिन भर बिना किसी उद्देश्य के घूमती रहती थी।  वह जहां भी जाती लोग  उसे  मार-मार कर भगा देते।  इस दयनीय दशा के कारण उसे अपने आप से नफरत हो गई।  1 दिन घूमते हुए उसने एक सोते हुए शेर को देखा  तो हिम्मत करके उसके सिर पर जाकर बैठ गई।  सोते हुए शेर को जंगल के बहुत से  पशु पक्षी देख रहे थे।  उन्होंने मक्खी को देखा और मक्खी ने उन्हें देखकर अपने ऊपर गर्व किया।

तभी शेर जाग गया।  शेर को जगा  देख मक्खी ने उसके कान में भिन -भिनाते  हुए  कहा ?” हे जंगल के राजा, तुम महान हो , जब तुम चलते हो तो धरती पर भूचाल आ जाता है।   समुद्र  गरजने लगता है।  जब आप  दहाड़ते  हो, तो पृथ्वी  दहलने लगती है।  और पहाड़ हिलने लगते हैं और जंगल में सन्नाटा छा जाता है।  आप तो जंगल के राजा हैं।  या का सब कुछ आपका ही है।

शेर अपनी तारीफ सुनकर बहुत ही खुश हुआ।  और बोला,  मक्खी हालांकि तुम बहुत नन्ही हो लेकिन बातें बहुत ही समझदारी की करती हो।  तुम ऐसा करो कि आज से मेरे सिर पर ही बैठी  रहा करो।  और मुझ से मीठी-मीठी बातें करती रहा करो।  इससे मुझे खुशी मिलेगी।  और मेरा मन भी  बह -लता रहेगा।  इस तरह कुछ दिनों में मक्खी शेर की मुँह  लगी  दरबारी बन गई और हमेशा शेर के पास ही रहने लगी।

तब से फिर किसी की भी हिम्मत नहीं हुई की कोई उसे भगा सके।  तब से वह  अपनी मर्जी से  कहीं की बैठती है। इस प्रकार  हमारे घर में रहने वाली घरेलू मक्खी मुँह  लगी मक्खी  बन  गई।

तो दोस्तों इस कहानी से यह निष्कर्ष निकलता है कि- हम अपनी  प्यार की भाषा से किसी को भी अपना बना सकते हैं।  चाहे दुश्मन क्यों ही ना हो।

11- दंभी  चूहा !

एक बार एक खोखले सींग  मैं एक घमंडी चूहा घुस गया था।  वह बिल बनाने में बहुत ही माहिर था।  इसलिए उसे अपने ऊपर गर्व था।  एक दूसरा चूहा उसका मित्र था।  उसने उसे समझाया।  कि तुम गलत जगह जा रहे हो।  यह तुम्हारा बिल नहीं है।  यह सींग  है।  तो इसमें फस सकते हो।  पर छुआ था बहुत ही  घमंडी।  वह अपनी भूल न स्वीकार करने वाला था।

और बोला ” नहीं, मैं सही रास्ते पर हूं।  मैंने सारी जिंदगी बिलों में ही गुजरती है।  मैं गलत नहीं हो सकता।  और वह यह कह कर आगे बढ़ता चला गया।  सींग  निरंतर सकरा होता चला गया।  अंत में वह घमंडी चूहा उसमें फंस गया।  और दम घुटने के कारण मर गया।

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि – अपना अनुभव कभी गलत साबित भी हो सकता है।  इसलिए हमें दूसरों की बात पर भी अमल करना चाहिए।

 

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12- दर्द बांटना अच्छी बात – (Short Stories in Hindi)

एक बार सिपाहियों ने एक चोर को पकड़ा ,और उसके हाथ और पांव बांधकर कारागार में डाल दिया।   वह सारी रात बड़ी यातना से भी  पीड़ित रहा।  उसी  समय  उसके कान में बाहर से किसी व्यक्ति के रोने की आवाज आई।   वह अपनी दरिद्रता और हाथ तंग होने की खुदा से शिकायत कर रहा था।  तब चोर ने कारागार से पुकार कर कहा। ”  अरे कमबखत” !  मुझे देख और खुदा का शुक्रिया अदा कर ! तेरे हाथ तंग है तो क्या हुआ।  मेरी तरह बधे  हुए तो नहीं है।

तो दोस्तों इस  इन चार लाइनों से हमें  यह संकेत मिलता है  कि – हमेशा मनुष्य को अपने दर्द से  दूसरों का दर्द अधिक समझना चाहिए।  और खुदा का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि हमें मनुष्य का जन्म मिला है।  हम दूसरों के दर्द को बांट सकते हैं और समझ  सकते हैं।  मनुष्य का जीवन सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है।

13- गुलाम  –  (New Moral Stories in Hindi)

एक गुलाम था। वह भी गुलामों का गुलाम !  उसके गले में लोहे का एक  भारी  टुकड़ा लटका रहता था।  इसलिए वह उसके भारी बोझ तले दोहरा हो गया था।  एक मुसाफिर ने उसे रास्ते में देखा तो उसके मालिक को बहुत भला बुरा कहने लगा।

गुलाम ने अपने  दोहरे बदन को कुछ  तिरछा कर मुसाफिर की और देखा  और  कहा ,” मालिक हो भला बुरा मत कहो।  उसका मुझ पर बहुत विश्वास है।  तभी तो उन्होंने लोहे का एक टुकड़ा हर वक्त मेरे अधिकार में रहने दिया है।  गुलाम के यह शब्द उसके  स्वामी तक पहुंचे , तो  उसने गुलाम के गले से लोहे का टुकड़ा उतारने का हुक्म दिया।  और  कहा ! ” अब इसकी जरूरत नहीं  रही।  आज से यह  मेरी तरफ से आजाद हो गया है।

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14- सेब का पेड़ – (Moral Stories for Children in Hindi)

एक बार जाड़े के मौसम में सेब के पेड़ के सारे पत्ते झड़  गए।   उस सेव के पेड़ के   बूढ़े मालिक को ठंड से बचने के लिए लकड़ियों की जरूरत पड़ी।  उसने सेब के पेड़ को देखा।  तो सोचा फिर तो आंगन में ही है फिर इतनी कड़कड़ाती ठंड में दूर पहाड़ी जंगल से लकड़ी काटने क्यों जाएं।  क्यों ना हम एक पेड़ की एक दो शाखाएं काट लें।

 

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 उसने  अपने मन में  सोचा इतने विशाल पेड़ की 1,2 शाखाएं काटने से क्या फर्क पड़ेगा।  और उसने एक दो शाखाएं काट  ली।  कुछ महीनों बाद सेब के फलों का मौसम आया।  तो बूढ़े ने देखा कि  पेड़ पर सेव तो लगे हैं।  लेकिन कुछ कम है।  इसे देखकर उसने निश्चय किया।  कि अब आगे से वह  पेड़ की साख नहीं काटेगा।  कुछ महीनों बाद जाड़े का मौसम आया।

15 Hindi Short Stories With Moral for kids  !

और बूढ़े ले अपने निश्चय से हटकर फिर यही सोचकर कि एक या दो   शाखा से पेड़ को क्या फर्क पड़ेगा।  और दो तीन शाखाएं काट ली।    सेव के फलों का फिर मौसम आया।  अबकी बार सेव और कब पैदा हुए।  तो उस बूढ़े आदमी ने फिर अपना पहले वाला निश्चित  दोहराया।

लेकिन फिर जाड़ा आया और बूढ़े ने पेड़ की 2से 4 शाखाएं फिर से काट ली।  और इस प्रकार नतीजा यह निकला कि  एक दिन पेड़ बिल्कुल सुख कर मर गया।  इसके लिए  वह बूढ़ा आदमी  स्वयं जिम्मेवार था।

अतः इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि – हमें अपने दृढ़ निश्चय से नहीं भटकना चाहिए।  चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो।  दृढ़ निश्चय करने वाले को कोई काम बड़ा नहीं लगता।  और   कामचोर  और  आलसी आदमी को कोई काम छोटा नहीं लगता।

15- बेगानी छाछ पर मूंछे मुड़ाना – (Short Moral Stories in Hindi for Class 1)

एक समय की बात है।  एक किसान किसी दूर के  गांव में भैंस खरीदने के लिए गया।  उस समय गांव में न सड़कें थी और ना ही बिजली थी और ना ही मवेशी लादने के लिए टैंपू आदि  ही होते थे। इसलिए जब  वह किसान भैंस खरीद कर चला।  तो रास्ते में उसे शाम हो गई।  अधीरा बढ़ता हुआ देख कर ओए रास्ते के एक गांव में अपने एक रिश्तेदार के घर पर ठहर गया।  वह लोग  भैंस को देखकर बहुत प्रसन्न हुए। (15 Hindi Short Stories With Moral )

उस रिश्तेदार की घरवाली ने रात में भैंस को चारा खिलाया और फिर उसका दूध दोहा।  पूरे परिवार ने दूध पिया और शेष दूध का दही जमा दिया सुबह उसने यही दही  बिलो कर कर माखन निकाला और छाछ आस-पड़ोस के लोगों में बांट दी।  गली का एक बूढ़ा भी  छाछ ले गया।  जब वो छाछ पीने लगा तो उसकी मूंछें छाछ में भीग गई।  इसकी उसे बहुत कोफ्त हुई।

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अब हुआ है कि उस भैंस वाले किसान के रिश्तेदार ने उसे अगले दिन भी न जाने दिया और फिर उसने अगले दिन भी वह वही रहा।  उस बूढ़े को अगले दिन भी छाछ पीने के लिए मिल गई।  और उसने अगले दिन भी छाछ का आनंद उठाया लेकिन उसने सोचा  पीने के लिए छाछ तो रोज ही मिलेगी।  मगर मूछें !  हर रोज ही छाछ में डूबती हैं।  तो उसने सोचा क्यों न में मूछें मुड़वा लू।

और यह सोच कर उसने अपनी  मूछें को  कटवा दिया।   और सोचने लगा अब छाछ को बिना किसी  बाधा के पिया करूंगा।  मगर भगवान की इच्छा से अगले ही दिन  वह भैंस वाला किसान का रिश्तेदार अपनी भैंस लेकर अपने गांव को चला गया।  उधर जब वह बूढ़ा छाछ लेने के लिए गया तो उसे भैंस वाले के चले जाने का समाचार मिला।  वह बहुत दुखी होकर लौटा।   वह  दुखी मन  से सोचने लगा। ” सच ही कहते हैं    “बेगानी  छाछ पर मूछें नहीं मुड़वानी चाहिए”

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