Hard work is the key to success- हार को भी हरा कर पाई मंजिल – कठिन परिश्रम की कहानी !!!

Hard work is the key to success  दोस्तों आज हम आपको ऐसे व्यक्ति के बारे में बताएंगे जिसके घर में कुछ खाने तक को भी नहीं फिर भी उसने इतनी कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए भी अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। कहते हैं कि ,कठिन परिश्रम सफलता की कुंजी है,संघर्ष ही जीवन होता है जो लोग संघर्ष को अपनी हिम्मत और ताकत के साथ पार कर जाते हैं वे लोग जीवन में सफलता अवश्य हासिल कर लेते हैं।

Hard work is the key to success

 

दोस्तों किसी कवि ने एक पंक्ति में कहा है- कि भरी बरसात में उड़कर दिखा ऐ माहिर परिंदे, क्योंकि खुले आसमान में तो तिनके भी सफर कर लेते हैं, आज हम कुछ ऐसे ही व्यक्ति की कहानी सुना रहे हैं जो बरसात में तूफान में और तेज आँधियों के बीच अपने मुकाम तक पहुंचा और अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।

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Hard work is the key to success !

राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव में एक गिरधर सिंह नाम का एक व्यक्ति रहता था गिरधर सिंह बहुत गरीब परिवार से था उसके पिताजी जो कुछ भी मजदूरी करके पैसे कमाते थे उसकी शराब पी लेते थे और गिरधर सिंह का बड़ा भाई दोनों पैरों से विकलांग था घर की ऐसी स्थिति थी कि कभी रोटी मिल जाती थी तो कभी नहीं मिलती थी। Hard work is the key to success

इसलिए गिरधर सिंह का बचपन बड़े ही संघर्षों के बीच बीता । गिरधर सिंह सीमेंट के खाली कट्टे के बने हुए थैले में किताब डालकर फटे पुराने कपड़े पहनकर नंगे पैरों स्कूल जाता था। दोस्तों राजस्थान की तपती हुई जमीन की रेत में गिरधर नंगे पैर जाता था इसलिए पैरों में छाले तक पड़ जाते थे। दोस्तों गिरधर सिंह के घर की आर्थिक व्यवस्था बहुत बुरी तरह से बिगड़ चुकी थी जब वह नवमी और दशमी कक्षा में आया तो स्कूल से आकर आइसक्रीम बेचता था या सब्जी बेचता था तब अपनी पढ़ाई का खर्चा चलाता था ।Hard work is the key to success

Floor was defeated by defeating defeat- हार को भी हरा कर पाई मंजिल !

दोस्तों कुछ दिन बाद गिरधर सिंह के परिवार में सबसे पहले उसकी दादी ने आत्महत्या कर ली और उसके बाद उसके चाचा ने आत्महत्या कर ली और उसके बाद उसके दूसरे चाचा ने भी आत्महत्या कर ली परिवार में कई सालों तक शोकः सा छा गया । लेकिन इतनी भयंकर परिस्थितियों को झेलते हुए भी गिरधर सिंह का लक्ष्य डगमग नहीं हुआ। वह एक बहुत बड़ा सरकारी अफसर बनना चाहता था। दोस्तों आप यह बात तो जानते ही होंगे कि जिस घर में तीन तीन लोग सुसाइड कर ले तो पूरे घर की हालत कैसी हो जाती है।

इसलिए गिरधर सिंह के घर में कई सालों तक निराशा का माहौल रहा अब तो गिरधर सिंह के पिताजी भी उससे कहने लगे कि तू पढ़ाई छोड़ दे और कुछ काम कर ले जिससे कुछ पैसों की व्यवस्था हो जाए और घर का खर्च चल सके। लेकिन गिरधर सिंह के मन में तो यह बार टूट उसके भरी थी कि मैं अच्छे से पढ़ाई करूंगा और एक बड़ा अधिकारी बनूंगा। उसके पिताजी उसको गाली भी बहुत देते थे लेकिन उसका मन टस से मस नहीं होता था ।Hard work is the key to success

गर्मियों की छुट्टी में जब सभी स्कूल के बच्चे अपनी नानी नाना या अन्य कहीं तीर्थ स्थल पर घूमने जाते थे तो उन छुट्टियों में गिरधर सिंह एक कपड़े की फैक्ट्री में सुबह 7:00 से रात के 10:00 बजे तक बहुत काम करता था या किसी ढाबे पर खाना बनाता था। इतनी सारी मुसीबत का सामना करते हुए भी उसने कभी अपने मुकाम से हार नहीं मानी और आगे बढ़ता रहा कुछ दिन बीत जाने के बाद उसका जो बड़ा भाई विकलांग था वह भी बीमारी होने के कारण मर गया।

Hard work is the key to success – कठिन परिश्रम की कहानी !

अब तो गिरधर सिंह बहुत घबराया हुआ था कह रहा था कि मैं अपने मुकाम तक कैसे पहुंचेगा कहीं ऐसा ना हो कि मुझे पूरी जिंदगी कपड़े की फैक्ट्री या ढाबे पर खाना न बनाना पड़े। और सोचने लगा कि मैं भी आत्महत्या कर लूंगा अब मेरी जिंदगी में कुछ रहा नहीं है लेकिन बाद में उसे ज्ञान आया कि नहीं गिरधर एक संघर्ष ही जिंदगी है जिसके जीवन में संघर्ष ही नहीं है तो उसकी जिंदगी भी क्या है यानी संघर्ष ही जीवन है। Hard work is the key to success

 

Hard work story

 

 

और उसने अपने माता-पिता के चेहरे पर उदासी की लकीरें देखें और उनके फटे हुए कपड़े देखे तो उसने सोचा कि मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करूंगा और मैं बिल्कुल मरने की नहीं सोचूंगा और मैं आगे बढूंगा और अपना लक्ष्य पूरा करूंगा अपनी झोपड़ी को एक मकान में बदल दूंगा और अपने माता-पिता के चेहरे पर जो चिंता की लकीरें हैं इनको मैं खुशियों में बदल दूंगा लेकिन आज नहीं तो कल बदल दूंगा लेकिन मैं बदल कर ही रहूंगा।

haar ko bhee hara kar paee manjil – kathin parishram kee kahaanee !

अब तो गिरधर सिंह यह दृढ़ संकल्प करके आगे बढ़ने लगा और सरकारी नौकरी में फॉर्म भरने लगा लेकिन उसे लगातार निराशा ही हाथ लग रही थी लेकिन फिर भी वह आगे बढ़ता रहा उसने लगातार 21 सरकारी नौकरी की परीक्षाएं दी लेकिन वह फेल ही होता रहा । अब उसका मन कुछ घबरा गया था पता नहीं अब क्या होगा। अब उसके दोस्त रिश्तेदार एवं गांव वाले सभी कहने कि गिरधर सिंह सरकारी नौकरी तेरी किस्मत में नहीं है अब तू कोई काम कर ले जिससे तेरे घर का खर्च चल सके।Hard work is the key to success

ऐसा सुनकर उसके मन में एक ही ख्याल आता था कि रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी एक प्रधानमंत्री बन सकते हैं, एक छप्पर वाले घर में रहने वाले रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति बन सकते हैं एवं अखबार के बंडल उठाने वाले अब्दुल कलाम एक राष्ट्रपति बन सकते हैं एवं जिनके मां-बाप का बचपन में कत्ल हो गया हो ऐसे मिल्खा सिंह जब देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत सकते हैं तो मैं क्यों नहीं बन सकता मैं भी बनकर दिखाऊंगा।

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कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है !

गिरधर सिंह दुबारा दृढ़ संकल्प बनाकर कठिन परिश्रम करने लगा और दिन रात पढ़ने लगा । अगली बार अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने ग्राम विकास अधिकारी पद की नौकरी निकाली गिरधर सिंह ने इसमें फॉर्म भर दिया और उसने पिछले परीक्षाओं में कमी रही उसको दूर करके इस बार कठोर मेहनत की और परीक्षा दी। जब कुछ महीनों बाद इसका रिजल्ट आया तो हर बार गिरधर सिंह को हार हराती थी लेकिन इस बार गिरधर सिंह ने हार को ही हरा दिया और उस न्यूज़ परीक्षा को पास कर लिया और ग्राम विकास अधिकारी के पद पर उसका चयन हो गया । Hard work is the key to success !

दोस्तों इतनी सारी भयंकर परेशानी झेलते हुए भी गिरधर सिंह अपने मुकाम तक आखिर पहुंच ही गया तभी तो किसी ने कहा है ,,कि लक्ष्य कोई बड़ा नहीं, मिला उसे जो डरा नहीं, दोस्तों अपने अंदर जोश रखिए, हौसला रखिए, जुनून रखिए, आपकी बाहर की परिस्थितियां कैसी भी हो लेकिन जब तक आपके अंदर कि आग जिंदा है तब तक दुनिया की कोई भी ताकत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

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