Guru purnima kyu manate hai in hindi | नारद ने मछुआरे को गुरु क्यों बनाया ?

एक प्राचीन समय  की बात है। Guru purnima kyu manate hai in hindi ? एक दिन नारद जी छीर  सागर  में  भगवान बिष्णु  की सभा में  गए थे। वहां बड़े – बड़े ऋषि मुनि व् सभी देवता-गण  बैठे हुए थे। नारद जी को आते देख किसी ने भी नारद जी को प्रणाम नहीं किया। और उनके गुरु नहीं होने कारण उनका तिरस्कार किया। और उन सबने नारद जी से कहा की आप निगुरा है। इसलिए आप सवसे पहले अपना गुरु बनाइये इसके बाद आपको इस सभा में स्थान दिया जायेगा। इस बात का भगवान बिष्णु  ने भी समर्थन किया।  तो इसके बाद  नारद जी वहां चल पड़े  और एक अच्छे गुरु की तलाश में चारो तरफ भ्रमण करने लगे। 

लेकिन उन्हें कोई उनके अनुसार गुरु नहीं मिला। Guru purnima kyu manate hai in hindi ?तव नारद जी वापस लौट  कर भगवान बिष्णु  के पास गए ,और  उन्होंने पूरा हाल कह सुनाया। तब  भगवान बिष्णु  बोले ,की तुम पृथ्वी लोक पर जाओ और कल सुवह आपको सवसे पहला व्यक्ति मिले ,आप उसको अपना गुरुः  बना लेना। भगवन बिष्णु  के वताये हुए रास्ते  के अनुसार नारद जी वहां   से पृथ्वी लोक पर आये । (What happened when Narad made fisherman his mentor)

 

Guru purnima kyu manate hai in hindi  

Guru purnima kyu manate hai in hindi ?

और अब  नारद जी सुवह होने का  इंतजार  लगे। तब एक मछुआरा सुवह -सुवह मछली पकड़ने के लिए जाल  को अपने कंधे पर रखकर  नदी की तरफ  जा रहा था।  तभी उस मछुआरे से नारद जी की भेंट हुई  तो नारद जी ने उस मछुआरे से कहा की आपको  में अपना गुरु  बनाना चाहता हु। और नारद जी ने उस मछुआरे के चरण स्पर्श करते हुए प्रणाम किया।

तो  मछुआरे ने भी नारद जी को अपना चेला  बना लिया। और अपने कंधे पर रखे मछली पकड़ने के जाल को अब उसने नारद की के कंधे पर रख दिया। और उस मछुआरे ने नारद जी को उस नदी के पास चलने के लिए कहा जहां  से वह मछली पकड़ता था।  नारद जी ने उस मछुआरे के साथ नदी में जाल फैंका  और  मछली पकड़वाई। लेकिन नारद जी  अपने मन ही मन यह सकोच करते रहे। 

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कि  यह कैसा गुरु है जो खुद पाप कर रहा है और मुझसे भी करा रहा है। नारद जी मन  ही मन उस मछुआरे व् गुरु  से घृणा करने लगे।लेकिन गुरु बनाने के चक्कर में कुछ कह नहीं सके। अब नारद जी  का मछली पकड़ना डेली का काम था।  धीरे -धीरे नारद जी को  मछली पकड़ते पन्द्रह  दिन  गुजर गए।

नारद जी को सबसे ज्यादा परेशानी तब होती जब मछुआरा मछली पकड़ने के जाल को नारद जी के शिर पर रख देता।   क्योंकि  जाल से दुर्गन्ध जो आती।  एक दिन नारद जी से रहा नहीं गया और वे चुपचाप वहा से निकलने का प्लान सोच  लिया और रात  में  ही मछुआरा का घर छोड़ दिया। और वह से भाग खड़े हुए। और  भगवान  बिष्णु  के पास आये।

Guru kyon banana chahiye | Guru purnima kyon manate hain ?

जब भगवान  विष्णु  ने नारद जी से गुरु बनाने  बारे में पूछा तो  नारद जी कहा की गुरु तो ठीक है लेकिन गुरु पाप कर्म करता है और करवाता है। इस प्रकार नारद जी अपना सारा हाल कह सुनाया। इस पर भगवान विष्णु बोले की नारद जी आपने तो बहुत बड़ा पाप कर दिया। अपने गुरु के प्रति संकोच किया है ,गुरु के प्रति संदेह करना  सबसे बड़ा पाप है। आपने  तो अनर्थ कर दिया। इस पाप की वजह से आपको नरक में जाना पड़ेगा। इस बात पर नारद जी घवड़ा गए। और इस पाप से छुटकारा पाने का उपाय भगवान  विष्णु से  पूछने लगे।   

तब भगवान बिष्णु  बोले कि  आपको नरक व पाप से आपका गुरु अर्थात  मछुआरा ही बचा  सकता है। और आप अपने उसी गुरु के पास जाये। तो आपका गुरु ही कोई रास्ता निकल सकता है। इस प्रकार नारद जी फिर पृथ्वी लोक पर उसी मछुआरे के पास आये। और उसके चरण पकड़ कर माफी  माँगी। और अपने पाप के बारे में उस मछुआरे को बताया।

तब उस मछुआरे ने नारद जी को नरक जाने से बचने का उपाय बताया। और समझा बुझा कर नारद जी को विदा कर दिया। जब नारद जी  भगवान  विष्णु के पास आये। और मछुआरे के बताये अनुसार नारद जी ने भगवान  विष्णु से कहा की में नरक में जाने के लिए तैयार हु। कृपया करके मुझे बताये कि  नरक कैसा होता है। Guru purnima kyu manate hai in hindi ?

 

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और जाने का रास्ता किधर से है। तब भगवान् विष्णु एक लकड़ी के टुकड़े से नरक का नक्सा बनाने लगे। और नारद जी से कहने लगे कि  नरक इस प्रकार होता हैं। नारद जी झट से भगवान  विष्णु द्वारा बनाये गए नरक के नक्से पर बैठ गए और कहने लगे की में नरक में पहुंच गया हु। तब भगवान  विष्णु बोले  यह कैसे सम्भव  हो सकता है।

Guru purnima in hindi | Story of guru purnima in hindi !

तब नारद  जी ने विस्तार से बताया और कहा कि  भगवन वह नरक भी आपका बनाया हुआ है और यह नरक  भी। आपके  बचन के अनुसार में नरक में पहुंच गया हू। अब भगवान विष्णु नारद जी के बचन में फंस गए और नारद जी को नरक से मुक्त कर दिया। तब नारद जी ने अपने मन ही मन गुरु पर गर्व किया।

तब उनकी समझ आया की गुरु भगवान  से भी महान  होता है। वही परमात्मा   से मिलाने व् अन्य आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कराता  है। Guru purnima kyu manate hai in hindi ?तो दोस्तों गुरु कैसा भी क्यों न हो, गुरु महान होता है। क्यों की  आत्मा को परमात्मा से  मिलाने  का रास्ता गुरु द्वारा ही तय किया जाता है। 

 इसलिए हमारा उद्देश्य  केवल गुरु से  ज्ञान प्राप्त करना होता है न कि उसके पाप कर्मो से ,क्योकि उसके पाप कर्म का फल गुरु को ही मिलेगा, उसके  शिष्य को नहीं।  इसलिए  हमेशा एक अच्छे गुरु का ही चयन करें। और गुरु बनाने के बाद गुरु पर  सन्देह  कभी न करें। क्योकि गुरु पर संदेह करना  अथवा गुरु की निंदा करना  एक बड़ा  पाप होता है। 

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तो दोस्तों  Guru purnima kyu manate hai in hindi ? क्या हुआ, जब नारद जी ने मछुआरे को अपना गुरु बनाया ?आपको यह धार्मिक कहानी  कैसी लगी ,कृपया कमेंट बॉक्स मेँ  कमेंट करके बताये ,यदि इस कहानी ने आपके दिल को छुआ हो तो कृपया इस कहानी को लाइक  और शेयर जरूर करें। 

तो फिर मिलेंगे दोस्तों कोई नई धार्मिक  कहानी लेकर तब तक के लिए अलविदा। 
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