Story of brother-brother sharing | भाई – भाई के बंटवारे की एक सराहनीय कहानी !

दोस्तों Story of brother-brother sharing आज हम आपको ऐसी कहानी से रूबरू करा रहे हैं जिसे पढ़कर आप चकित रह जाएंगे।  एक गांव की बात है उस गांव में दो भाई रहते थे। उनमें जो बड़े भाई थे वह तो पढ़े लिखे थे और छोटे भाई अनपढ़ थे।  इसलिए जो बड़े भाई थे उनकी घर में सब लोग बात मानते थे।

बड़े भाई घर का कोई काम बिल्कुल नहीं करती थे।और जो छोटे भाई थे। वह घर का सारा काम देखते थे और खेतों का पूरा काम भी करते थे, फिर भी इतना काम करने के बावजूद भी अपने बड़े भाई की फटकार सुनते थे। दोस्तों जो बड़े भाई थे वह अपने छोटे भाई पर बात बात पर चिल्लाते थे और कहते थे।(story of brother-brother sharing)

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बेवकूफ तू कब सुधरेगा दुनिया सुधर गई छोटा भाई सुबह उठकर अपनी भैंस को चारा डालता था और गोबर को खेतों पर डालने जाता था यानी घर का सारा काम करने की जिम्मेदारी इसी के पास थी फिर भी घर में इसकी कोई इज्जत नहीं थी।  बड़े भाई तो आराम से नेताजी बन कर बाहर घूमते रहते थे ,और घर पर आकर अपने भाई पर अपना पूरा रुबाब जताते थे।
कुछ दिनों के बाद बड़े भाई ने छोटे भाई की शादी करा दी।  दोस्तों छोटी वाली बहु जो भगवान की कृपा से बहुत चालाक और समझदार थी, जब छोटी बहू घर में आती है। और देखती है कि मेरे पति भैंस का गोबर डालते हैं और इनके बड़े भाई आराम से नेताजी बनकर घूमते हैं तो सोचती है। (story of brother-brother sharing)

A commendable story of brother-brother sharing – भाई – भाई के बंटवारे की एक सराहनीय कहानी। 

अभी मैं कुछ नहीं बोलूंगी क्योंकि यह लोग सोचेंगे कि छोटी बहू ने आते ही आते लड़ाई करना शुरू कर दी जब कुछ दिन बीत जाते हैं तो छोटी बहू ने अपने पति को अपने पास बुलाया और कहा कि अब हम ऐसे नहीं रहेंगे क्योंकि तुम दिन भर काम करते रहते हो और तुम्हारे बड़े भाई आनंद से घूमते रहते हैं।  यह मुझसे बिल्कुल नहीं देखा जाता अब तुम अपने भाई से जाकर बोलो कि हमारा बंटवारा कर दें हम अलग रहेंगे तो वह बोला नहीं घर में मेरे भाई की चलती है। मैं उनसे नहीं कह सकता दोस्तो छोटा भाई सीधा और ज्यादा होशियार नहीं था।

जब उसकी पत्नी ने बार-बार कहा कि तुम अपने भाई से जाकर कहो तो वह अपने बड़े भाई के पास चला जाता है और कहता है कि भैया हमारा बंटवारा कर दो हम तुमसे अलग रहेंगे हमारी पत्नी ने हमसे आज ऐसा कहा है तो भाई बोले वाह भाई वाह इतनी जल्दी अपनी पत्नी की बात को मानने लगा अरे बेवकूफ यह औरत तो घर में फूट डालने वाली होती है उसने कहा कुछ भी सही हमें अलग रहना है।

आपसे ।हमें अलग कर दो तब बड़े भाई ने कहा चलो ठीक है अब बड़ा भाई बात करने लगा और बोला जो 12 बीघा ईख खड़ी है उसके ऊपर का हिस्सा मेरा है और नीचे का तेरा है और 16 बीघा गेंहू खड़े हैं उसमें ऊपर का हिस्सा मेरा है।

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और नीचे का तेरा है और जो घर पर भैंस है उसमें पीछे की तरफ मेरी है और आगे की तरफ तुम्हारी है और जो घर पर बिस्तर करने वाले कपड़े हैं वह दिन में तुम रखना रात में मैं रखूंगा छोटा भाई बहुत सीधा था वह इस बात पर सहमत हो गया और बात मान ली फिर वह तुरंत अपनी पत्नी के पास खुश होकर जा पहुंचा और बोला अब तो सब कुछ भाई ने बंटवारा कर दिया है।

और वह बटवारा उसने अपनी पत्नी को सुना दिया छोटी बहू सिर पर हाथ रखकर रोने लगी और बोली हे भगवान यह मेरे साथ क्या हुआ यह तो बिल्कुल पागल है तब उसने अपने पति को समझाया और कहने लगी अपने भाई के पास दोबारा जाओ और कहो यह बटवारा हमें मंजूर नहीं है।

इसको दोबारा करो तो उसने कहा नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता मेरा भाई जो कुछ भी करता है।एक ही बार करता है वह हम सब लोगों को माननी पड़ता है तो उसकी पत्नी ने थोड़ी देर सोचा और बोली चलो ठीक है मत जाओ लेकिन जो मैं कह रही हूं उसे ठीक से सुनो । जो 12 बीघा ईख खड़ी है उसे अभी से काटना शुरु कर दो तो उसका पति बोला पागल हो गई हो अभी तो ईख पकी भी नहीं है।

तो उसकी पत्नी बोली हमें क्या मतलब हमारा तो ऊपर का हिस्सा है हम तो ऊपर का काट ले रहे हैं तो फिर उसके पति के कुछ समझ में आया फिर उसने कहा ठीक है फिर पत्नी बोली जो मैं कह रही हूं।

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उसे कान खोल कर सुन लो और बोली गेंहू अभी नीचे से कच्चे ही काटना शुरू कर दो और जब तुम्हारे भाई की पत्नी भैंस के दूध निकालने के लिए आए तो भैंस के मुंह की तरफ भैंस के डंडा मारना शुरू कर दो और जो कपड़े रात में इस्तेमाल करने वाले हैं।

उनको शाम के टाइम पानी में भिगोकर डाल दो यह बात सुनकर छोटे भाई की आंखें खुल गई और बोला तुम बिल्कुल सही कह रही हो ऐसा ही करूंगा जब छोटे भाई ने ऐसा ही किया और गेहूं कच्चे ही काटने लगा तो बड़ा भाई खेत पर पहुंच गया और बोला कि पागल हो गया है।

तू अभी तो यह कच्चे हैं तो छोटे भाई ने कहा तुम्हें क्या मतलब हम तो अपने गेहूं काट रहे हैं। हमारा तो नीचे का हिस्सा है हम तो नीचे ही गेहूं काट रहे हैं फिर वह माथे पर हाथ रख कर चला गया। शाम का समय हुआ पूरा विस्तर छोटे भाई ने पानी में भीगा कर रख दिया।

तब बड़ा भाई बोला तू क्या कर रहा है छोटे भाई ने कहा मैं तो कुछ नहीं कर रहा हूं। मैं तो वही कर रहा हूं जो मेरे हिस्से में है तब लज्जित होकर बड़े भाई ने दोबारा हिस्सा बांट सही तरीका से किया।

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कभी भी अपने भाई के प्रति चालाकी नहीं चलनी चाहिए।
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