best Prernadayak kahaniya in Hindi – 7 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां !

प्रेमिका बन गई बाघ कहानी ! (best Prernadayak kahaniya in Hindi)

best Prernadayak kahaniya in Hindi ! कहते हैं एक बार  पावी जनजाति का एक युवा शिकारी अपने ही गांव की किसी वन सुंदरी पर मुग्ध हो गया।  वह उससे मिले बिना एक  दिन भी नहीं रह सकता था।  लड़की  भी उससे मिले बिना अन्न – जल ग्रहण नहीं करती थी।  प्रेम गहराता गया और 1 दिन दोनों ने अपने माता – पिता से यह राज खोल दिया।  मां बाप ने प्रतिभाग नहीं किया और विवाह की तिथि तय कर दी गई।  पावी  प्रेमी-प्रेमिका विवाह की तिथि की प्रतीक्षा में और भी अधीर होते गए।  और झूम  के खेतों में छुप छुप कर मिलते रहते।  खेत गांव से थोड़े फासले पर ही थे।  एक दिन बड़ी गर्मी थी।

 

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लड़की को जोर की प्यास लगी।  उसने अपने प्रेमी से कहा कि वह पास के गड्ढे पर जाकर अपनी प्यास बुझाना चाहती है।  शिकारी ने उसे वहां जाने के लिए मना किया।  क्योंकि उसे पता था कि वहां के पानी में कुछ ऐसा जादू है।  जो व्यक्ति का रूप बदल सकता है।  युवती ने प्रेमी की सलाह मान ली, किंतु अपनी प्यास पर काबू न पा सकी ।  अंततः उसी गड्ढे के पास गई।  और उसने अंजली भर कर पानी पिया।

पिपासा शांत हुई। वह  अपने प्रेमी के पास पहुंच गई।  प्रेमी अपनी प्रेमिका से अगले दिन मिलने के बारे  में कुछ कहने वाला था, कि अचानक प्रेमिका का रूप बदलने लगा।  पहले उसके  पांव लंबे हुए फिर हाथ  और फिर उसके  चार पैर  बन गए।  बड़े बड़े नाखून और देखते ही देखते वह बाघिन बन गई, जंगल का खूंखार बाग। ! शिकारी घबरा गया।  अपनी प्रेमिका को इस रूप में देखकर उसका  हिर्दय  विशाद  से भर गया।

prernadayak kahani in hindi | प्रेरणादायक हिंदी कहानियां !

उसे उस पर क्रोध भी आया।  क्योंकि उसने उस गड्ढे का पानी पीने से मना किया था।  पर अब तो बहुत देर हो चुकी थी।  क्या करता बेचारा !  माथा ठोक कर घर की तरफ चल पड़ा।  उसकी  बाघ – प्रेमका भी  पीछे-पीछे चलने लगी।  लेकिन उसे गांव में कैसे रखा जाता।  अतः  पास के जंगल में छोड़ आया।  इस घटना से गांव के सब लोग आश्चर्य थे।  लड़की के माता-पिता तो बहुत ही दुखी थे।  उन्होंने अपने पशु, बाघ लड़की को खिलाने के लिए भेजने शुरू किए।  वह पूरा पशु एक या 2 दिन में खा जाती।  आखिर पशुओं की संख्या घटने लगी।

उसने आदमियों का शिकार करना भी शुरू कर दिया।  गांव के लोग घबराए हुए थे।  उन्होंने बाघ- लड़की को मारने के लिए योजना तैयार की।  एक दो बार कुछ शिकारी उनके पीछे दौड़े, लेकिन सफलता न मिल सकी।  एक शिकारी तो खुद उसका शिकार हो गया।  जंगल के हिंसक पशु भी घबराए हुए थे।  गांव के पशु तो पहले ही समाप्त हो गए थे।  अब जंगल के पशु भी खत्म होने लगे।  तूफान सा मचा हुआ था।

लोग त्राहि -त्राहि  कर उठे।  आखिरकार गांव के लोगों ने निर्णय किया कि बड़े शिकारी को ही यह काम सौंपा जाए।  गांव का मुखिया पंचों को लेकर उसके घर गया।  उसने अनुरोध किया कि  बाघ -लड़की को यथाशीघ्र मार भगाए।  शिकारी परेशान था।  क्या उसे अपनी प्रेमिका का ही शिकार करना पड़ेगा ?  उसने गांव वालों से कहा  ! “मुझे गांव से निकाल दो लेकिन यह जघन्य  कर्म  मुझसे ना कराओ।  मैं अपनी प्रेमिका को नहीं मारूंगा। best Prernadayak kahaniya in Hindi

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भले ही वह  बाघ  बनकर पशुओं तथा आदमियों का शिकार कर रही हो।  गांव के लोगों ने कहा, लेकिन वह अब तुम्हारी प्रेमिका कहा  रही।  वह तो क्रूर हिंसक पशु है, जो आवाल  वृद्ध सबको खाए जा रही है।  कल हम भी जिंदा नहीं बचेंगे और एक दिन तुम भी उसके शिकार बन जाओगे।

शिकारी तर्कों के आगे नहीं झुका।  तभी एक बुड्ढी  आदिवासी दौड़ी – दौड़ी आई उसने कहा शिकारी बेटे ! अब हमसे नहीं सहा जाता।  तुम्हारी प्रेमिका बाघ  पहले मेरे पशुओं को खा गई, फिर मेरे पति को, आज मेरा इकलौता बेटा भी उसकी बलि चढ़ गया। क्या अब  भी तुम उस पर तरस खाते रहोगे।  शिकारी विवस था। उसने अपने अस्त्र – शस्त्र उठाए और जंगल की ओर चल पड़ा।  वह दुखी था अपने ही प्रेम का शिकार करने के लिए।

लेकिन वह प्रेमिका कहाँ  रही ? वह तो अब शिकारी  बन गई है।  आखिर एक शिकारी ने दूसरे शिकारी की जान ले ही ली।  बाघ – प्रेमका सदा के लिए सो गई।  कुछ लोगों का कहना है कि शिकारी भी अपार दुख को सहन न कर सका और उसने उसी सत्र से स्वयं अपने को ढेर कर दिया। आज भी पावी  जनजाति में इस लोककथा को बड़े दर्द के साथ  स्मरण किया जाता है।

 

मेरी बाहों में चिनाई मत करना,  एक कश्मीरी लोक कथा ! prernadayak kahani in hindi !

 

एक राजा था।  और एक उसका प्यारा सा बेटा था।  जो दूर सरहद पर सेनापति था।  राजकुमार की पत्नी थी रत्ना।  रत्ना देखने में अत्यंत सुंदर और गुणवान थी।  बड़ी-बड़ी भावपूर्ण आंखें व तीखी  नाक के कारण वह अत्यंत सुंदरता का प्रतीक थी।  राजकुमार के प्राण हमेशा  रत्ना में ही अटके रहते थे।  रत्ना ने अपनी सेवा – भावना तथा स्नेह से अपने ससुराल में सबका मन जीत लिया था।  एक बार की बात है रत्ना अपने मायके गई हुई थी।  राजा को रात के समय सपना आया कि उनका कुलदेवता उसके सम्मुख खड़ा है।  उसने हाथ जोड़कर प्रणाम किया।

तब कुलदेवता बोले कहो, तुम्हें कोई कष्ट तो नहीं।  नहीं महाराज मैं सुखी हूं, मेरी प्रजा सुखी है, सब आपकी कृपा है !  कुलदेवता ने कहा  तुम्हारे माथे पर कुछ रेखाएं खींची हुई हैं जो बताती हैं कि तुम्हें कोई न कोई कष्ट है।  मुझे सिर्फ एक ही कष्ट है, मैं पश्चिम में एक नहर निकालना चाहता हूं।  बहुत कोशिश की नहर बनाई पर पानी नहीं चढ़ा।  अगर पानी आ जाता, तो पश्चिम क्षेत्र की जमीन हरी-भरी हो जाती।  कितने ही लोगों को काम मिल जाता। और मजदूर लोगों को सुख संतोष मिल जाता। बस यही दुख मुझे कांटे की तरह चुभ रहा है।  राजा ने कहा।

कुलदेवता बोले इसके लिए तुम्हें बलि देनी होगी।  काम बहुत मुश्किल है।  राजा ने तुरंत  कहा,  प्रजा की भलाई के लिए तो मैं अपने प्राणों की भी बलि दे सकता हूं आप आज्ञा दीजिए।  कुलदेवता ने कहा यदि तुम अपनी  बहू  रत्ना की बलि दे दो तो आशा पूरी हो जाएगी।  और यह कहते ही  कुल देवता अंतर्ध्यान हो गए।  राजा की एकदम नींद खुल गई।  वह भौचक्के से रह गए।  बार-बार आंखों के सम्मुख कुलदेवता आ जाते।

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उनके शब्द राजा के कानों से टकराते।  राजा ने आखिर निश्चय कर लिया कि वह अपनी बहू रत्ना की बलि देकर पश्चिम की नहर का काम जरूर पूरा करेगा।  उसने रत्ना को उसके मायके से एक खत भेजकर बुला लिया।  सीधे – सादे  शब्दों में, नहर के लिए अपनी बलि दे सकती हो तो अभिलंब चली आओ।  यह पत्र  पढ़कर रत्ना की आंखों से दो मोती लुढ़क आए।  best Prernadayak kahaniya in Hindi

अभी तो उसने अपने प्रियतम को जी भर कर देखा भी नहीं था।  लेकिन इस खत से उसके मन में बलि  देने की भावना जोर पकड़ने लगी।  मायके में उसकी मां ने उसे रोका पर वह न रुकी।  राजा के पास जा पहुंची।  राजा अपनी बहू को सामने पाकर एकदम कांप गया।  लेकिन उसे अपना वचन तो पूरा करना ही था।  बलि देने का दिन आ गया।  रत्ना  को पालकी में  नहर पर ले जाया गया।

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प्रेरणादायक हिंदी कहानियां !

रत्ना का उस समय नववधू के जैसा श्रंगार किया गया था।  नहर के किनारे उसकी चिनाई का काम शुरू हो गया था।   रत्ना के मन में अपने भाई के लिए ममता जागी।  वह चिनाई करने वालों से बोली।  सब कुछ चिंन दो किंतु मेरी बाहों के गिर्द चिनाई मत करना।  मेरी बाहों मेरे भाई के लिए फैली रहने दो, वह आएगा तो मैं उसे गले लगा लूंगी। best Prernadayak kahaniya in Hindi

मेरी दोनों आंखें भी खुली रहने देना मैंने अपने प्रिय को भी जी भर कर नहीं देखा।  वह आएंगे तो मैं एक बार तो उन्हें देख लूंगी।  पर चिनाई करने वालों ने कुछ ना सुना ! रत्ना  ईटों में में चिंन दी गई।  रत्ना  के लिए जैसे हर पक्षी रो रहा था।  नहर में पानी चढ़  आया, फिर एक पैर बाद उस नदी में  दूध बहने लगा।  कहते हैं लोग आज भी उसी स्थान पर बड़ा मेला लगता है।  रत्ना  की आवाज आज भी एक गीत बनकर वहां गूंज रही है।

 

अनाज की बालियां भीलो की लोक कथा ! (best Prernadayak kahaniya in Hindi)

 

किसी वन में एक भील परिवार रहता था।  उनका काफी बड़ा परिवार था।  इस परिवार में पचास  स्त्री पुरुष और बच्चे भी थे।  एक छोटा सा गांव भी बस गया था वहां।  अपने परिवारों को  पालने के लिए  हिरणों का शिकार करना ही उनकी आजीविका का साधन था।  बड़ा कठोर जीवन था उनका।  महिलाओं को दूर-दूर से, झरनों, तालाबों से पानी ढोकर लाना पड़ता था।  पुरुषों को शिकार करना पड़ता था।

एक समय ऐसा आया कि एक परिवार को निरंतर कई दिन के प्रयास के बाद भी कोई शिकार के लिए हिरण नहीं मिला।   सभी परिवार के लोग भूख से तड़पने लगे।  परिवार का मुखिया भील चिंता में डूबा था।  आशा की  जोत जलाएं  वह रोज की तरह चल दिया।  साथ में पीने का पानी भी था।  वह एक जलाशय के पास रुका।  अचानक कुछ आहट मिली।  वह झट्ट  से एक पेड़ की ओट में हो गया।  पेड़ के नीचे एक पत्थर पर पानी का पात्र रख दिया।  झटपट तीर कमान पर तीर चढ़ाया निशाने के लिए तैयार हो गया।  तभी पास से एक हिरनी आई।

और शिकारी को बार करने के लिए तैयार देख, बोल पड़ी।  मुझे मत मारो !  मेरे बच्चे मेरा इंतजार करते होंगे।  और मेरे न पहुंचने पर तड़प तड़प कर जान दे देंगे।  पहले मैं उन्हें किसी को सौंप कर आती हूं तब मुझे मार देना।

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मृर्गी  को बोलता सुन शिकारी घबरा गया।  हाथ से तीर छूट गया।  तीर पेड़ के पत्तों में जा लगा।  कुछ पत्ते टूट कर नीचे पत्थर पर गिर पड़े।  जहां उसका पानी का पात्र रखा था। वह पत्थर का शिवलिंग और वृक्ष था बेलपत्र का।  अनजाने में ही शिकारी ने शिवजी पर बेलपत्र और जल चढ़ा दिया।  संयोग की बात उस दिन भी शिवरात्रि !  शिव जी प्रसन्न हो गए।  एक बूढ़े के रूप में भील के सामने प्रकट हो गए।  और बोले बेटा उस मृर्गी को जाने दो।  तुम्हारा परिवार कई दिनों से भूखा है।  पर पशु मारकर खाने से ही पेट नहीं भरा जाता।  दूसरे तरीके भी हैं यह लो  कुछ दाने है । best Prernadayak kahaniya in Hindi

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एक-एक दाना खा लेना, इस समय की भूख मिट जाएगी।  बाकी को भूमि में बो  देना, पानी डालकर  देखभाल करना।  जो दाने पौधे पर लगेंगे वह  अनाज होगा।  उसे खाकर भूख मिटा लिया करना।  बूढ़ा सारी बातें समझा कर गायब हो गया।  शिकारी लौटा।  कुटुंब के साथ मिलकर दाने बॉय और अनाज की बालियां लहराई, तो  भील के परिवार में खुशियां भी लहलहा  उठी।

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प्रेम की अमर निशानी  एक प्रेम कहानी ! best Prernadayak kahaniya in Hindi

 

बहुत पुरानी बात है।  भरमौर के ऊंचे पहाड़ों में एक गांव था।  ऊपर बर्फ से ढके शीतल शिखर, और नीचे घास  से लदी पहाड़ी ढलान,  कल – कल करते झरने चौबीसों घंटे बहते रहते थे।  बकरियों के गले में  बधी  घंटियां बजती रहती थी।  इसी बीच दो बच्चे रंजू और  फेमिना एक साथ खेलते थे।  रंजू गांव के जमीदार का लाडला बेटा था।  और फेमिना मामूली गडरिया की बेटी।  लेकिन बचपन क्या जाने ऊंच-नीच।

धीरे-धीरे दोनों बड़े हो गए।  रंजू बन गया सजीला नौजवान।  और फेमिना की थी, बड़ी – बड़ी आंखें और गोरा रंग और गुणवान भी थी।  पहाड़ी झरने कैसी चाल थी।  बचपन का खेल प्रेम में बदलने लगा। दोनों  ने एक साथ रहने की कसमें खाई।  रंजू ने फेमिना की उंगली में अंगूठी पहना दी। वह अपने प्रेम का गीत गाता था। लेकिन रंजू का बाप था जमीदार, और फेमिना थी कंगाल की बेटी। best Prernadayak kahaniya in Hindi

जमीदार कैसे करता अपने बेटे का रिश्ता।  उसने  पुरोहित से रंजू के लिए दुल्हन ढूंढने के लिए कहा।  पुरोहित ने दूसरी दुल्हन ढूंढ दी।  जमीदार की बेटी से रंजू का रिश्ता पक्का हो गया।  रंजू बेचारा चुप, लेकिन फेमिना बेचारी खूब रोई।  दोनों का मिलना जुलना बंद हो गया।  फेमिना रंजू की याद में घूमती रहती और वियोग के गीत गाती रहती थी।  लेकिन गांव में उसकी पीड़ा समझने वाला कोई नहीं था।

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रंजू के विवाह की तैयारियां होने लगी।  सब रिश्तेदार जुड  गए।  रंजू के शरीर पर  हल्दी  मली जाने लगी।  अब फेमिना से रुका नहीं गया।  वह रंजू के घर पहुंची और परदे की ओट से हल्दी चढ़ते देखने लगी।  रंजू ने उसे, पर्दे के पीछे छिपे हुए देख लिया।  फेमिना वहा  क्यों खड़ी हो।

यहां आओ, और मेरी मदद करो , हल्दी  लगवाने में।  फेमिना बहुत दुखी हुई,  उसने  कहा में हल्दी नहीं लगाऊंगी।  अपनी चाची और  मौसी को कहो कि हल्दी लगाएं।  क्यों नहीं लगाती हल्दी।  मैं तुम्हारी शादी से खुश नहीं हूं।  रंजू !  फेमिना बोली ! किसने तुम्हारी शादी पक्की की है।  सगाई किसने  ली है।  रंजू ने फेमिना को सब कुछ बता दिया।  शादी  वंश पुरोहित ने पक्की की है और सगाई मेरे बापू ने ली है।  फेमिना घर लौट गई।

उसका दिल टूट गया।  उसने जहर खाकर जान दे दी।  अगले दिन रंजू बारात लेकर जा रहा था।  रास्ते में दिखाई दी फेमिना की शव यात्रा।  उसने चिल्लाकर बारातियों को रुक जाने के लिए कहा।  और खुद फेमिना की लाश की ओर दौड़ा।  और जोर-जोर रोने लगा।  फिर उसने बरा तियों को दुल्हन के घर जाने के बजाय शमशान चलने का आग्रह किया।  रंजू ने बाएं हाथ से  फेमिना की चिता सजाई।  दाएं हाथ से उसे अग्नि दी।  लपटें उठने लगी।  वह कह रही थी कि किसी प्रपंच से प्रेम विवाह नहीं करना चाहिए।

 

 शिव जी और भस्मासुर की कहानी !  (best Prernadayak kahaniya in Hindi)

 

यह एक काशी नगरी की हास्य रस कहानी है।  प्रचलित कथा के अनुसार।  जब विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के लिए, औरंगजेब की सेनाएं पहुंची तो बाबा विश्वनाथ भंग की तरंग में कुएं में कूद पड़े। पर बात ऐसी नहीं थी।  यह कहानी तो औरंगजेब की सेना को मूर्ख बनाने के लिए काशी के पंडों ने गढ़ ली थी। शंकर चाहते तो औरंगजेब की सेना को त्रिनेत्र से तत्काल भस्म कर सकते थे जैसे उन्होंने कामदेव को छड़ भर में ही भस्म कर दिया था। इस कथा के क्रम को आगे बढ़ाने के लिए यह तर्क भी उपस्थित किया गया कि शिवजी को कुएं में इसलिए  कूदना पड़ा।

क्योंकि उन्होंने औरंगजेब को पूर्व जन्म में वरदान दे दिया था।  वैसा ही वरदान, जैसा उन्होंने भस्मासुर को दे दिया था।  भस्मासुर पर प्रसन्न होकर शिवजी ने वरदान दे डाला के जिसके सिर पर तुम हाथ रख दोगे वह भस्म हो जाएगा।  भगवान शंकर ने यह वरदान तो दे डाला पर उन्हें आशंका थी कि भस्मासुर उनके वरदान का प्रयोग उन पर ही करने लगेगा।  वरदान प्राप्त कर भस्मासुर शिव के मस्तक पर ही हाथ रखने के लिए उत्साहित हुआ।  यह देखकर शिव घबरा गए,  भंग की तरंग हिरण की तरंग हो गई। best Prernadayak kahaniya in Hindi

कुपात्र को वरदान देने की भूल उन्हें स्वयं त्रस्त कर रही थी।  शिवजी को संकट से बचाने के लिए विष्णु जी को आगे आना पड़ा।   उन्होंने मो हनी का रूप धारण किया।  अब शिव का पीछा छोड़ भस्मासुर मोहिनी के अलौकिक सौंदर्य पर मोहित हो गया।  मोहिनी ने जब नृत्य की मुद्रा का संचालन आरंभ किया तो भस्मासुर भी उनका अनुसरण करने लगा।  नृत्य करते-करते मोहनी ने अपने सिर पर हाथ रखा।

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भस्मासुर ने वैसा ही किया।  अगले क्षण देखते ही देखते भस्मासुर भस्म हो गया।  उधर शिव का यह हाल देखकर उनके तबेले में भारी हड़कंप मच गया।  शिवजी का तबेला अपने ढंग का अलबेला है।  जिस में शिव का वाहन नंदी है।  माता पार्वती का वाहन  बाघ है।  विघ्नेश्वर गणेश जी का वाहन मूषक और स्वामी कार्तिकेय का वाहन मयूर है।  शंकर के गले की माला के सर्प भी उनके तबेले में रहते हैं।

काशी के कोतवाल भैरव नाथ का बाहन कुत्ता भी हाजिरी देता है।  जब भस्मासुर भस्म हो गया तो शिव और बिष्णु  गले मिले।  विष्णु ने कहा  महाराज भंग की इतनी गहरी तरंग में कृपया प्रवाहित ना हुआ करें। आप बहुत बड़े दानी हैं।  आपको याचक सदा सुहाता हैं।  कहते हैं उसी दिन से भगवान शंकर ने भंग की मात्रा सीमित कर दी। और अपने  वाहन वृषभ को भी अनाधिकारियों के प्रवेश पर सावधान रहने का आदेश दिया।

 

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 दो भाई –  वर्मी लोककथा ! | best Prernadayak kahaniya in Hindi

 

बर्मा के शान प्रांत में एक घनी किसान रहता था।  मरते समय उसने अपने दोनों बेटों को बराबर – बराबर संपत्ति बांट दी।  और सीख देते हुए कहा कि तुम हमेशा दोनों अच्छे से अच्छा खाना खाने की कोशिश करना।  इसी से तुम हमेशा मेरी तरह सुखी रह सकोगे।  किसान के मरने के बाद छोटे भाई ने बड़े भाई से कहा।  भैया चलो किसी बड़े शहर में चलकर रहते हैं।  वही हमें अच्छे से अच्छा खाना मिल सकता है।  अगर तुम चाहो तो शहर जा सकते हो मैं तो यही गांव में रहूंगा।  और जो अच्छे से अच्छा खाना यहा  मिलेगा वही खाऊंगा बड़े ने कहा।

छोटे ने अपनी जमीन जायदाद बेच दी और सारा पैसा लेकर शहर चला गया।  शहर में उसने बड़ा सा घर लिया और अच्छे से अच्छे रसोइए व नौकर रखें। और उसने अच्छे से अच्छा खाना बनवा कर खाने व आराम से रहने लगा।  और सोचने लगा कि वह जल्दी ही मालदार हो जाएगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा।  जल्द ही सारा पैसा खत्म हो गया और फिर सारा सामान ख़त्म  हुआ, अन्त में मकान भी बिक गया।

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अतः उसे गांव में लौटना पड़ा।  गांव आकर उसने देखा कि बड़ा भाई और भी अधिक मालदार हो गया है।  तो उसने कहा भैया मुझे वह खाना दिखाओ जिसे खाकर तुम और भी मालदार हो गए।  मैंने अच्छे से अच्छा खाना खाया फिर भी कंगाल हो गया।  खाना दिखाना क्या मैं तुम्हें खिलाऊंगा भी।  लेकिन चलो पहले खेतों पर चलो।  बड़े ने  कहा, और उसे खेतों पर ले गया।  वह खेतों में काम करने लगा। और छोटे को भी काम पर लगा दिया।  काम करते-करते घंटो बीत गए।  दोनों भाई पसीने से तरबतर हो गए।

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तो छोटे ने कहा भैया बहुत देर हो गई काम करते करते।  अब तो अपना अच्छे से अच्छा खाना खिलाओ।  अभी खिलाते हैं जरा यह अधूरा काम तो पूरा कर ले।  कहकर बड़ा फिर काम में जुट गया और छोटे को भी लगा दिया।  काम करते-करते फिर घंटो बीत गए तो बेहद थके और भूखे प्यासे छोटे ने कहा।

भैया अब तो काम बंद करो।  अब मुझ में हाथ पैर चलाने की बिल्कुल ताकत नहीं रही है।  थोड़ा सा काम और बाकी था।  खैर छोड़ो कहकर बड़े ने काम बंद किया।  हाथ पैर धोए और पेड़ की छाया में बैठ गया।  फिर पोटली खोली और उसमें से रोटी निकाल कर एक खुद ले  ली और दूसरी उसे देकर बोला।  बहुत भूख लगी है ना !  तो पहले इसे खा लो फिर घर चलते हैं।  छोटे का भूख के मारे तो बुरा हाल था।  उसने फौरन उस मोटी सी रोटी के टुकड़े किए और खाने लगा।  भूख के मारे उसे उस रोटी में बहुत ही स्वाद आया।  बड़े ने पूछा कहो रोटी का स्वाद कैसा है।

बहुत अच्छा, बहुत अच्छा !  कहते हुए उसने पूरी रोटी खत्म कर दी।  इस रोटी से मुझ में जरा सी जान आ गई।  अब चलिए घर चल कर मुझे अपना अच्छे से अच्छा खाना खिलाइए।  यह तो मेरी सबसे अच्छा खाना है क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लगा  ? ”  रोटी तो बहुत अच्छी लगी लेकिन क्या यही आपका सबसे अच्छा खाना है। best Prernadayak kahaniya in Hindi

आश्चर्य से उसने पूछा !  मेरे प्यारे भाई, मेहनत करने के बाद कड़कडाकर भूख लगने पर खाया गया खाना ही दुनिया का सबसे अच्छा खाना होता है।  चाहे वह रूखी – सूखी रोटी ही क्यों न हो।  पिताजी के कहने का यही मतलब था।  शायद उसे बाद में समझ आया।

 

नासमझ बेटा एक मजेदार लोक कथा ! (best Prernadayak kahaniya in Hindi)

 

एक था बुढ़ा  पाला (कोहरा), जिंदगी के अनुभवों से समझदार।  उसका एक जवान बेटा था।  वह बाप के बिल्कुल विपरीत था।  नासमझ और  शेखी मारने वाला भी था।  उसे घमंड था कि वह अपने प्रभाव के कारण सब को ठंड से अकड़ा  सकता है।  एक बार उसने एक अमीर जागीरदार को ठंड से बीमार कर दिया था।  जागीरदार बग्गी में बैठा जा रहा था।  गर्म कपड़ों से  लधा  हुआ था।  फिर भी उसने उसको बीमार कर दिया था। पर जवान पाले के कारण वह  ठंड से सिकुड़ गया।  और अकड़ भी गया।  जवान पाला यह देखकर बहुत खुश हुआ।

पिता के पास जाकर बोला। देखो उस पहलवान से जागीरदार को मैंने कैसे ठंड से अकड़ा दिया।  पिता  बोला , और  बेटे की नासमझी पर हंस पड़ा।  बोला तू नासमझ है।  भले तूने उस मोटे  जागीरदार को ठंड से अकड़ा दिया।  पर उस किसान को ठंड से आंकड़ा दे तो जानू।  जवान पाले ने देखा एक मरियल सा किसान फटा पुराना कोट पहने घोड़े पर बैठकर जा रहा था।  वह तुरंत उड़ता हुआ उसके पास जा पहुंचा। और उसने उस पर हमला बोल दिया।

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पर किसान रुका नहीं।  अब जवान पाले ने किसान के पैरों में चुटकिया  काटने शुरू कर दी।  किसान घोड़े से उतर गया।  और घोड़े के साथ साथ दौड़ने लगा।  जवान पाला परेशान हो उठा।  उसने सोचा जंगल में इसे ठंड से आंकड़ा दूंगा।  किसान ने जंगल में पहुंचकर एक पेड़ पर कुल्हाड़ी चलानी शुरू कर दी।  अब जवान पाला पूरी ताकत से किसान को परेशान करने लगा।

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जवान पाले ने किसान को ठंड से जितना परेशान करने की कोशिश की।  उसने उतने ही ज्यादा जोर – जोर से कुल्हाड़ी चलाई और कई वृक्ष काट डाले।  वह पसीने – पसीने हो गया। उसने अपने दस्ताने उतार दिए।  जवान पाला  निरास होकर घोड़े की सिलेज की ओर भागा।  और किसान के दस्ताने पड़े देखकर उस में जा घुसा।  ठंड के कारण चमड़े के दस्ताने अकड़ गए।  किसान ने घर लौटने की तैयारी की।  मगर वह पत्थर की तरह सख्त थे।  जवान  पाले को हंसी आई।  जब किसान ने यह देखा कि दस्ताने ठंड से अकड़ गए हैं। best Prernadayak kahaniya in Hindi

तो उसने कुल्हाड़ी लेकर उन पर चोट करना शुरू कर दिया।  चोटों के कारण पाले को रुलाई आने लगी।  वह निकल कर भागा।  बुढ़ा पाला उसकी दशा पर हंस पड़ा।  बोला बेटे , आराम करने वाले लोगों को तुम आसानी से सता सकते हो।  परंतु मेहनती लोगों के आगे किसी मुसीबत की नहीं चलती।

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