Avasar kee Prateeksha – Motivational Story in Hindi for Success !

💥 अवसर की प्रतीक्षा – एक प्रेरणादायक हिंदी कहानी 💥

[Avasar kee Prateeksha – Motivational Story in Hindi for Success ] भेड़ों का झुंड चरता हुआ न जाने किधर निकल गया। एक भेड़ का छोटा सा बच्चा सोता रह गया ।जब उठा। तो अपने आप को अकेला देखकर बहुत घबराया। वह मिमिया कर अपनी मां को पुकारने लगा। (Avasar-kee Prateeksha) 

उसकी आवाज एक बड़े बूढ़े भेड़िए ने सुनी और वह दौड़ता हुआ उसके पास आ गया।

ओहो,प्यारे मेंमने, तुम बहुत ही ताजे़ और नरम हो।आज मैं तुम्हें बहुत स्वाद से खाऊँगा। यह सोच-सोचकर उसके मुँह से लार टपकने लगी।वह अपनी लम्बी जीभ अपने होठों पर फेरने लगा।

Avasar kee Prateeksha - Motivational Story in Hindi for Success

 

भेड़ का मेमना बहुत डरा।परन्तु उसने अपनी बुद्धि से काम लिया।मेमना वोला:-भेडिया मामा, तुम मुझे खाओगे, यह तो मेरे लिए खुशी की बात है।मुझे तो कोई ना कोई खाएगा ही।तुम नहीं खाओगे तो कोई और जानवर खाएगा मुझे। इसलिए अच्छा है तुम ही खाओ मुझे। पर मुझे एक बात का बहुत दुख हो रहा है। (Avasar-kee Prateeksha)
भेड़िया बोला किस बात का  दुख ?

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Avasar kee Prateeksha | College ke chhatro ke liye prernadayak kahaniya

यही कि मैं बहुत छोटा हूं मुझमें दो कौर भी तो मांस नहीं निकलेगा। बस बाल खाल और हड्डी हैं।तुम्हारा पेट भरेगा नहीं और मन भी नहीं भरेगा। भेड़ के बच्चे ने कहा।
बात तो ठीक कहते हो अभी बहुत छोटे हो पर किया क्या जा सकता है भेड़िया बोला
‘ एक बात कहूं?’
 कहो?
थोड़े दिन रुक जाओ मैं जल्दी ही खा पीकर बड़ा और मोटा हो जाऊंगा। तब तुम मुझे खाओगे।तो कई दिन तक खा पाओगे। तुम्हारा पेट भी भर जाएगा और मजा भी बहुत आएगा।
   ” बात तो ठीक कहते हो लेकिन इसमें कितने दिन लगेंगे?
मेमना बोला बस यही एक डेढ़ साल।
भेडिया बोला तुम भाग जाओगे
तब मैं तुम्हें कहां ढूंढूंगा?
मेमना बोला मैं तुम्हारे हर समय आस पास ही रहूंगा यह मेरा वादा है आपसे। (Avasar-kee Prateeksha)
भेडिया बोला, ठीक है मैं तुम्हारे बड़े हो जाने की प्रतीक्षा करूंगा।
डेढ़ साल बाद मेमना भेडिये को फिर दिखाई पड़ गया। उसका आकार अब छोटा नहीं था वह पूरा कद्दावर मेढा़ बन गया था। उसका सिर बड़ा और सींग घुमावदार थे।
और इधर डेढ़ साल में भेड़िया बूढ़ा हो गया था उसके प्रति और शक्ति कम हो गई थी और वह बहुत ही दुर्लभ हो गया था उसने मेढे़ से कहा :-‘ अब तो तुम खूब मोटे ताजे हो गए हो। शरीर पर मांस भी खूब आ गया है।अब मुझसे रुका नहीं जा रहा आज तो मैं तुम्हें खूब मजे से खाऊंगा।’
मेढे़ ने कहा :-मामा , मुझे अपना वचन याद है इसलिए मैं स्वयं ही तुम्हारे पास आ रहा था तुम मुझे खा लेना परंतु मरने से पहले मुझे एक बार अपनी इस मातृभूमि को घूम लेने दो।स्वच्छ जल वाली नदियों को,पेड़ों से लदी पहाड़ियों को एक बार देख लेना चाहता हूं।जन में पलकर में इतना बड़ा हुआ हूं।

Avasar-kee Prateeksha – Motivational Story in Hindi for Success

भेड़िये ने मेढे़ से कहा तुम भाग जाओगे।
मेढा़:- नहीं मामा श्री आप मेरे साथ साथ रहना। (Avasar-kee Prateeksha)
मेंढा और भेडिया दोनों घूमने चल दिये। जवान मेढा़ फुर्ती से उछलता कूदता आगे आगे चला।बीच-बीच में वह भेड़िए से कहता पीछे मत रहो मामा ।जल्दी आओ।,मेढा़ पहाड़ियों पर कभी ऊपर चढ़ता कभी नीचे कूद पड़ता उसके साथ चलने में बूढ़े वेडियो को थकान आ रही थी मेढा़ बीच-बीच में घास पत्ती खा कर पेट भर लेता था।भेडिये की आंतें भूख से कुलबुला रही थी। अंत में उसने कहा।अब बस करो भांजे। अब मुझसे नहीं रहा जा रहा अब यहां आओ।मैं तुम्हें खाऊंगा।
मेढे़ ने कहा तो ठीक है मामा जी मैं बिल्कुल तैयार हूंँ और वह सिर टेढा़ और पांव जमा कर खडा़ हो गया।
भेडिया जैसे ही उस पर झपटा।तभी मेढे़ ने अपने धारदार सींगों से ऐसी जोरदार टक्कर मारी कि भेडिये का जबडा़ टूट गया।और वह जमींन पर गिर पडा़।और उसके प्राण पखेरु उड़ गये।

तो हमें इस कहानी से ये प्रेरणा मिलती  है कि:-काल (समय ) निर्बल को बलवान् और बलवान् को निर्बल कर देता है। अवसर की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

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