Akbar Birbal jokes in Hindi | अकबर बीरबल के 3 मजेदार चुटकुले !!!

1- Finger’s  Signal  Story -ऊँगली का संकेत  कहानी !  (Akbar Birbal jokes in Hindi)

अकबर बादशाह के दरबार में एक उच्च  घराने का एक बड़ा होनहार सरदार रहता था।  उसकी  आजीविका एवं ग्रह खर्चे करने के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं थी ।  इस प्रकार उसका खर्चा भली -भातिं नहीं चलता था।  फिर भी वह राजा के दरबार में आकर अपने बड़ों के चलाएं नियम और परंपरा का पालन किया करता था।

वह दोनों समय के दरबार में ठीक समय पर उपस्थित हुआ करता था।  बड़ी मेहनत करके एक जोडी कपड़ा बस इसी कार्य के लिए रख छोड़ा था।  दरबार से आने पर वह घर आकर चक्की पीसकर अपनी रोजी-रोटी चलाता था।  शिवा एक चक्की के उसके पास और कुछ कोई धन अर्जित करने का कोई साधन नहीं था।

Akbar Birbal jokes in Hindi

 

और ना ही उसके पास कोई धन बचा था।  ऐसी लाचारी दशा का भुक्तभोगी सरदार फिर भी अपने बाप दादों का बनाया नियम को नहीं तोड़ता था।  1 दिन सफाई का काम बहुत ज्यादा आ गया था इसलिए कार्य व्यवस्था के कारण लाचार होकर दरबार में उपस्थित न हो सका।

 तन्मय होकर चक्की चलाता ही रहा।  नृत्य के समय पर बादशाह की सवारी निकली और मियां सरदार के घर के पास होकर चली।  सरदार का घर जनसाधारण गृहस्ती की तरह कच्चा और 1 मंजिला मकान हुआ करता था।  दीवाल में कई जगह दरार   आने से  मकान अच्छा नहीं लगता था।  इस प्रकार राह में चलते हुए राही उसका उपहास करते रहते थे  और  उपहास करके निकल जाते थे।

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Akbar Birbal jokes in Hindi -अकबर बीरबल की मजेदार हिंदी कहानियां !!

मियां सरकार चक्की चलाते- चलाते दौसा बजना पूर्ण कर अपने आंगन से राजा की सवारी देख रहे थे।  अचानक  राजा की दृष्टि भी सरदार पर जा पड़ी।  राजा ने सरदार को पहचान लिया।  दूसरे दिन सरदार को दरबार में उपस्थित होने के लिए कहा।  दूसरे दिन दरबार में उपस्थित होने पर राजा के मन में मियां सरदार के संबंध में उनकी आमंदनी की स्थिति की विशेष जानकारी प्राप्त करने की इच्छा हुई।

तुरंत मन ही मन बात  को दबाकर  खामोश  रह गए।  कुछ दिन बाद 1 दिन फिर बादशाह का दरबार बड़े समारोह के साथ चला।  एक मियां साहब भी  सरदारों की तरह सज-धज कर अपने स्थान पर बैठे हुए थे।  हिंदू -मुस्लिम  सभी दरबारी भी योग्यता अनुसार अपने स्थान पर विराजमान थे इसी बीच राजा आकर सभा के मध्य एक सोने के आसन पर विराजमान हुए।  बारी बारी से सब की तरफ देखते हुए राजा ने अपनी दृष्टि उन मियाजी पर भी डाली। (Akbar Birbal jokes in Hindi)

और सरदार वाली बात फिर से स्मरण हो गई। पहली बात पूछने के लिए आज फिर भी उनका मन चंचल हो उठा परंतु विचार विनिमय के सामने हार माननी पड़ी।  बात भी सच्ची थी।  शोभा नहीं देता था।  इसलिए राजा ने अपने हाथ की अगली घुमा कर कुछ संकेत किया मियां सरदार  ने और संकेत का  मतलब अपने पर समझकर अपने पेट पर उंगली रखते हुए बादशाह को दिखलाया बादशाह की ऊगली सवालों से खाली नहीं थी।

Akbar Birbal ke kisse in Hindi | अकबर बीरबल की तीन कहानी !

अच्छी बात पर चाहे उनका ध्यान भले ही न जाता परंतु ऐसी बातें तो उनकी आंखों पर नाचा करती थी।  सभी दरबारियों ने मियां और बादशाह के उपरोक्त संकेतों को देख लिया था।  सभी दरबारियों के मन में उनको लेकर , अनेकों प्रकार के प्रश्न उठने लगे।  दरबार समाप्त होते 1 धूर्त जाकर मियां सरदार जी का घर देख आया।  दूसरे दिन कई भक्तों की मंडली बनाकर मियां जी के मकान पर पहुंचा।  जैसा ग्रस्त का धर्म है।

मियां जी ने सबको बड़े आदर सत्कार के साथ बिठाया।  थोड़ी देर बाद चांडाल चौकड़ी के मुखिया ने मियां जी से पूछा।  महाशय जी कल दरबार के समय बादशाह के आने के बाद इसारो में आपसे क्या कहा था।  एक वह संकेतक बात हम लोगों की समझ में नहीं आई।  हम उसे जानने के लिए बहुत ही लालायित हैं।  मियां सरदार के मन में संदेह हो गया उन्होंने अनुमान लगाया कि कल बादशाह के संकेत करने से इन लोगों के मन में मेरे संबंध में संदेह उत्पन्न हो गया है। (Akbar Birbal jokes in Hindi)

इनको उल्लू बनाकर फसाना चाहिए।  उसने उत्तर दिया ! वो तेरी बाते  मेरे  कहने योग्य नहीं होती उनका भेद खुल जाने से बड़ा नुकसान होता है।  चांडाल चौकड़ी का मुखिया आग्रह पूर्वक जोर-जोर पूछने लगा तब फिर मियां सरदार जी बोले।  देखो भाई बादशाह  ने आप लोगों की तरफ इशारा करके मुझसे पूछा था कि इन लोगों की कोई बात जानते हो।  मैंने उस वक्त तो वही रोक कर अपनी ऊगली पेट पर रखकर समझ समझा दिया कि हमारे पेट में है।

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Akbar Birbal ka kissa in Hindi | अकबर बीरबल की कहानी इन हिंदी !

मियां जी फिर भट्ट की बात  सुनाकर  चांडाल चौकड़ी को घबरा दिया और उस सबों ने अपनी भविष्य की भलाई के लिए उनके रिश्वत देने का विचार प्रकट किया।  सरदार  जी की गर्दन टेढ़ी की टेढ़ी बनी थी।  वह सब घर से हैसियत के अनुसार कोई सो कोई 200 कोई 500 कोई गठरी ले आकर मियां जी के सामने रख दी।

Akbar Birbal ka kissa in Hindi

 

मियां जी मजे में पक्की मारकर सब देख रहे थे।  अपनी-अपनी टोपी सरदार के कदम पर रखकर बोले सरदार जी कृपया करके हमारी यह बातें अपने पेट में ही रखना।  खुलने न पावे।  इसी के लिए आपको यह भेट  दे रहे हैं।   मियां जी बड़ी गंभीरता से बोले जो आप लोगों की इच्छा है मैं तो ऐसा ही करूंगा  ! आप लोगों पर ईश्वर पसंद है।  जो कल के संकेत की बातें समझ कर पहले से ही होशियार हो गए।

चांडाल चौकड़ी इसका घूस देकर वहां से भाग खड़े हुए।   दूसरे दिन बादशाह , मिया सरदार के घर गया।  मियां जी ने बड़े आदर सत्कार के साथ बादशाह का स्वागत किया और एक कुर्सी पर बिठाया।  फिर घूस  में मिली रकम उसके सामने रखकर बड़ी कृतज्ञता प्रकट करने लगे।  उस गरीब के घर एकाएक इतना काफी दर्द देख कर बोले मियां जी आप चक्की पीस कर अपनी जीविका चलाते थे।

Akbar Birbal Chutkule in Hindi | अकबर बीरबल के चुटकुले हिंदी में !

फिर इतना धन कहां से आया।  मियां जी मुस्कुराते हुए बोले जहाँपनाह  कल आपने दरबार में जो मेरे लिए संकेत दिया था।  यह सब उसी का फल है।  बादशाह  को इतने से संतुष्ट नहीं हुआ तो उनके मुख से सारी बातें और भी स्पष्ट करना चाहते थे।  इसलिए पूछा भाई यह तू कैसी गोल मटोल बातें कर रहा है मेरी समझ में नहीं आती।

फिर  सरदार ने सारा किस्सा कह सुनाया बादशाह उनकी चालाकी से अति प्रसन्न हुए और घूस में मिली रकम को उसको देख कर लौट गए। दूसरे दिन वही सरदार दरबार में एक खास पद पर नियुक्त कर लिया गया।  दूसरों का मन एकदम टूट गया और फिर किसी कर्मचारी को जिस भावना से नहीं देखते थे।  इस प्रकार उन सभी तत्वों की अकल ठिकाने आ गई।

2- Stingy Shoom Story – कंजूस शूम कहानी !

दिल्ली में एक  लालची शूम रहता था।  वह अपने परिश्रम और कृपडता के कारण रत्नों का एक बड़ा जखीरा  इकट्ठे किए हुए था।  यह उन रत्नों को एक  साधारण बंदूक में छुपा कर रखे हुए था।  जिसे देखने वालों को उसमें इतना धन होने का भ्रम भी ना हो सके।  उसका घर भी साधारण ग्रस्तों के समान कच्चा टूटा फूटा था।  भला ऐसे मकान में रतन होने की कोई संभावना कैसे  कर सकता था।

एक दिन  देव योग के कारण मध्य रात्रि में उसके घर में आग लगी।  कंजूस उस आग को बुझाने की कोई तरकीब न देखकर कुछ साधारण  कपड़ों को लेकर घर से बाहर निकल गया।  यह बस उसके रोजमर्रा के काम आने वाले थे।  घर जलने की चिंता में  बेचारा कंजूस छाती पीट पीट कर रोने लगा। (Akbar Birbal jokes in Hindi)

उसके रोने का शब्द सुनकर और आग की लपट देखकर उसके आस पड़ोस के बहुत से लोग इकट्ठे हुए।  और सब लोगों में एक लोहार भी था।  लोहार ने कंजूस को फटकार ते हुए कहा इस साधारण झोपड़े के लिए तू इतना रुदल क्यों कर रहा है।  इससे तेरा कौन सा बड़ा नुकसान हो जाएगा।   शूम  बोला भाई तू झोपड़ा जलता देख रहा है।  और मैं अपने सपनों को जलते देख रहा हूं।  फिर तू ही बता क्यों ना  रोता।

Akbar Birbal ki Mazedar Kahaniya Hindi !

लोहार ने कहा वह धन कहां और किस चीज में रखा हुआ है।  तब शूम बोला  बगल की एक कोठरी दिखाते हुए बोला इसी कोठरी में एक काट की पुरानी संदूक रखी हुई है।  इसमें 700000 लाख  के जवाहरात बंद हैं फिर  लोहार ने कहा।  यदि में  उन जबारातों को बाहर निकाल आऊंगा तो अपनी मनमानी तुझे दूंगा और बाकी मैं लूंगा।  सारा  संपत्ति जलते देख कंजूस ने उसकी बात मान ली।

और लोहार अग्नि से बचने की तरकीब जानता था।  इसलिए उस जलती हुई आग में आंख बंद कर कूद पड़ा और कोठरी में पहुंचकर उस काठ की संदूक को बाहर निकाल लाया।  इस प्रकार पिटारे को अपने बगल में रखकर अग्नि कांड देखने लगा।  थोड़ी देर बाद जब अग्नि का वेग  कम हुआ और लोगों के हृदय में शांति आई। तो लोहार और शूम के बीच पिटारी के  मामले  का बट्वारा  हुआ।   जिस वक्त लोहार और कंजूस में ऐसी  शर्तें हुई थी उस समय लोहार ने एक और चालाकी की थी।  (Akbar Birbal jokes in Hindi)

एक उस जगह के दो मनुष्यों को अपना गवाह बना लिया था।  गवाह के सामने ही वह पिटारी खोली गई।  पिटारी खोलते ही जवाहरातों  की चमक बाहर तक फैल गई।  जैसे धन देखकर गवाहों की दशा होती है वही दशा लोहार की भी हो गई।  उस अनमोल रत्नों की ढेरी देखकर उसका मन फिर गया।  उसने पिटारी का सारा धन तो खुद  लिया और उस खाली पिटारी को बेचारे कंजूस के हवाले किया।

Akbar Birbal ka kissa Hindi mai | अकबर बीरबल के किस्से हिंदी में !

कंजूस लोहार की ऐसी अनीति देखकर बहुत चकराया और  गिड़गिड़ा कर कहने लगा भाई  आधा धन मुझे दे दो और बाकी आधा धन आप ले लो।  इसमें मेरी राजी है।  लोहार डांट कर बोला क्यों पहले मेरे तेरे बीच ऐसी शर्ते पक्की नहीं हुई थी।  कि मैं तुझे अपनी मनमानी दूंगा।  अब ऊंची बात  क्या करता है।  दोनों में वाद -विवाद होते सारी रात ही बीत गई और सूर्यदेव का समय आया।

सुमरा ने आधे रत्नों को पाने के लिए बहुत तेरा प्रयास किया।  परंतु लोहार  ने उसकी एक भी नहीं सुनी।  शूम  ने लाचार होकर बादशाह के पास अर्जी गुजारी।  मामला पेचीदा देखकर बादशाह ने बीरबल को बुलाया।  और उन लोगों का मामला सुनकर उस न्याय करने की आज्ञा दी।  बादशाह की आज्ञा शिरोधार्य कर बीरबल ने उन दोनों से अलग-अलग बयान लिए।

और उन स्थानों को प्रथक – प्रथक दो कागजों  पर लिख कर उस पर उसके हस्ताक्षर कराए। फिर उन दोनों से भरी सभा में राजी लेकर प्रमाणित कराया।  उसका कहना बिल्कुल सत्य और उन्हें मान्य है।  तभी बीरबल ने  पहले लोहार  से पूछा तुमको इसमें से क्या – क्या लेना मंजूर है।  लोहार  बोला मेरी इच्छा जवाहरात  लेने की है।  बीरबल ने तुरंत न्याय  कर दिया।  सारे जवाहरात  कंजूस शूम को दे दो और स्वयं खाली पिटारी  ले लो।  (Akbar Birbal jokes in Hindi)

बीरबल ने  लोहार सतनामी की तरफ इशारा किया।  बीरबल बोला तू पहले अपनी शर्तों में लिख चुका है।  मैं अपनी मनमानी दूंगा।  तो तेरे मन में जवाब  लेने का है।  अबे यह तेरी जबान से ही निर्णय हो गया।  अब जवाहरात इसे देखकर तू  खाली पिटारी लेकर चला जा।  इस लोहार के हाथ खाली पिटारी लगी ! और कंजूस शूम  जवाहरातों  को लेकर सानंद घर लौटा।

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3- The lion’s farce by Bahupriya – बहरूपिया द्वारा सिंह का सॉन्ग !

एक दिन दिल्ली के  काजी से बीरबल की धर्म संबंधी चर्चा छिड़ी।   जब काजी सब प्रकार से हार गया तो  उसे अंदर ही अंदर ऐसी बात के लिए बड़ी लज्जा उत्पन्न हुई।  और अपने मन में बीरबल को मार डालने का प्रण कर लिया।  यह  दृढ़ निश्चय कर के वह घर जाने के बहाने बादशाह से छुट्टी लेकर नगर से बाहर किसी दूसरे गांव में चला गया।

और वहां अपना नाम व पता छिपाकर  बहुरूपिया का रूप लेकर रहने लगा।  जब वह उस कार्य में होशियार हो गया तो  बहुरूपिया  का रूप धारण कर दिल्ली लौटा।  शहर में कई जगह उसने नए-नए सॉन्ग निकाले जिससे लोगों में उसकी कला की चर्चा फैल गई। आ  धीरे-धीरे यहा तक कि यह बात  बादशाह के पास भी पहुंच गई।  बादशाह को उसका सॉन्ग देखने की बहुत ही प्रबल इच्छा हुई।

एक दिन शाम को सिपाही भेजकर उसे बुलाया और  और उससे कोई नया सॉन्ग दिखाने की आज्ञा दी।  वह बोला   महाराज ! मैं सिंह का स्वांग  करना  का बहुत अच्छी तरह जानता हूं।  परंतु उसमें खून भी हो जाने की आशंका रहती है।  आपकी तरफ से मुझे एक खून की माफी दी जाए तो मैं भले ही उसे आपको दिखाने का उपाय करूं।   स्वांग  के समय वहां पर दीवान का भी रहना अत्यंत आवश्यक है।

Akbar Birbal Chutkule Hindi Mein !

बादशाह ने  उसे एक खून की माफी दे दी।  जब बेहरूपिया अपने घर चला गया तो बादशाह बोले बीरबल जाते समय बेहरूपिया कहता गया के बिना बीरबल के स्वांग नहीं दिखलाया जाएगा इसलिए उस समय तुमको भी वहां उपस्थित रहना होगा।  लाजमी है।  बीरबल ने बादशाह की आज्ञा को  स्वीकार कर लिया। (Akbar Birbal jokes in Hindi)

परंतु उसी वक्त बहरूपिया की बातों का सिलसिला मिलाने से ज्ञात हो गया कि वह हो ना हो कुछ दाल में काला अवश्य है।  यह मुझे धोखा देना चाहता है।  इधर बादशाह  की आज्ञा का पालन करना भी जरूरी है।  दूसरे दिन ठीक समय पर बीरबल दरबार में हाजिर हो गए।  इधर बहरूपिया भी सिंह का स्वाँग  बना कर   उछलने और  तड़पने लगा।   उसकी कला   और चतुरी  देखकर  बादशाह मोहित हो गए।

Akbar Birbal Long Story in Hindi !

सभी लोग उसकी कला  पसंद  करने लगे।  इतने में वह बनावटी शेर  बीरबल पर झपटा।   यह दृश्य देखते ही लोगों को बीरबल के मरने की आशंका हुई।   बहूरुपिये  ने बीरबल को मार डालने के विचार से अधिक परिश्रम किया।  मारा जाना तो दूर रहा उसके बदन से एक टोपा खून भी बाहर नहीं निकला।   सभा के लोग इस बात को देखकर दंग रह गए।

Akbar Birbal Chutkule in Hindi

 

बीरबल तो पहले ही से इसकी कपट मुद्रा को जान गए थे।   इस प्रकार बीरबल पहले से ही अपने शरीर पर शुद्र कवच पहन कर आया था।  उसके शरीर को जख्म ना पहुंच सका।   बादशाहा बीरबल को जीवित देखकर प्रसन्न हुए।  बात छुपाने के उपाय से बीरबल ने उस बहुरूपिये  की बड़ी प्रशंसा की।  बादशाह ने बीरबल से पूछा कि इस को क्या इनाम देना चाहिए। (Akbar Birbal jokes in Hindi)

बीरबल ने कहा कि उसको 12 महीने के लिए दीवान पद पर नियुक्त करना चाहिए।  बहरूपिया का यह सुनकर रोम रोम प्रफुल्लित हो गया।  बीरबल ने कहा जो सती का स्वांग  ठीक – ठीक करके दिखलाए तो ऊपर की शर्तें मानी जाएगी  अन्यथा नहीं।  बादशाह ने उस बात को अपनी जुबान से दोहरा कर  बहुरूपिया को कहा।

Akbar Birbal ki Majedar Kahani in Hindi !

तो  कल सती का सही-सही सॉन्ग कुशलता पूर्वक दिखलाएगा  तो तुझे 1 वर्ष का दीवान पद दिया जाएगा।  और यदि चूक जाओगे तो प्राण दंड दिया जाएगा।  बहरूपिया  ने इस बात को स्वीकार कर लिया और दूसरे दिन उसी समय  सती स्त्री का रूप धारण करके दरबार में हाजिर हुआ।  बीरबल  ने भी उसकी दवा दारू का इंतजाम पहले से ही कर रखा था।  पत्थर के कोयलो  का एक कुंड पहले ही आग से धधक  रहा था।

कुंड को देखते ही  बहुरूपिया का होश ठिकाने  न रहा।  उसने समझ लिया कि कल का प्रतिशोध करने के लिए ही  बीरबल ने खुराफात  खड़ा किया है।  अब यहां से जान बचा कर बाहर निकलना कठिन है।  बिना अग्नि में बैठ कर बाहर निकले वह  स्वांग पूर्ण नहीं हो सकता।  उसका मन  अंदर से घबरा गया।  एक बार उसके मन में आया कि अपना भेद बादशाह से प्रकट कर दे। (Akbar Birbal jokes in Hindi)

Akbar Birbal ki Majedar Kahani Hindi Me !

परंतु फिर भी अनेक कठिनाइयां उपस्थित होने की संभावना  पाकर चुप हो गया।  अंत में जब सती का स्वांग दिखलाते – दिखलाते  अग्नि में प्रवेश का समय आया।  तो उस समय अग्नि कुण्ड में  कूदकर  अपने  प्राण त्याग दिया।  उसके मित्र थे,  वो  लोग असली मर्म नहीं जानते थे  वे  बहुत  दुखी हुए।  परन्तु  बीरबल को  अनेक प्रकार से उसका भेद मालूम हो गया था।  इसलिए सब लोगों को समझा दिया।

इतना ही नहीं बल्कि बादशाह के सामने बीरबल ने कई  गवाहों  द्वारा गवाही दिलवा कर अपनी बात प्रमाणित कर दी।  बादशाह बीरबल की युक्ति से बड़े प्रसन्न हुए और नीति पूर्वक बल से शत्रु के मरने की चाल उन्हें बहुत पसंद आई।  इसके बदले बीरबल को कुछ इनाम भी दिया।

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