Akal Mrityu Story in Hindi – प्रजा के भाग्य से बदलता है विधान ! कहानी !!

Akal Mrityu Story in Hindi ! एक बार कारणवश  ईश्वर को किसी देश पर क्रोध आ गया।  और उस ने निर्णय लिया कि 12 वर्ष तक उस देश में वर्षा की एक भी बूंद नहीं बरसेगी।  ईश्वर के इस निर्णय को कार्य रूप में परिणत करने के लिए भगवान शिव ने भी अपनी  श्रृंगी को अपनी करधनी में घूस लिया।

Akal Mrityu Story in Hindi

 

क्योंकि अब आगामी 12 वर्षों में उसके लिए उसका कोई उपयोग नहीं रह गया था।  (माना जाता है कि  श्रृंगी  बजाने पर लोक विश्वास के अनुसार वर्षा होती थी)  आकाश से बरसा की बूंदो  के स्थान पर सूर्य की तेज लपटें बरसने लगी।  किसी निर्दई की आंखों के समान आकाश एकदम शुष्क दिखाई देने लगा।  तालाब, बावड़ी, कुआं, नहरें , नदियां,  सब सूख गई।

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Akal Mrityu Story in Hindi | Akaal Story in Hindi !

पानी की धाराएं क्षीण  होते-होते सूखने की स्थिति को प्राप्त होने लगी।  घबराकर सभी लोगों ने मनौतिया मनाने और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के द्वारा ईश्वर को प्रसन्न करने के प्रयास  प्रारंभ किए।  किंतु ऐसा लगता था। मानो  पत्थर के  भगवान और देवताओं के हृदय भी पत्थर हो गए हैं।  लगातार दो-तीन वर्षों तक न तो  रबी की फसल हुई और न खरीफ  की।  चारों ओर हाहाकार होने लगा।  लोग भूख से छटपटाने  लगे। (Akal Mrityu Story in Hindi)

सभी बेल- बूटे सूर्य का प्रचंड तेज न सह पाने के कारण झुलस गए।  हरी पर्वत माला और खेतों पर परती पड़ गई।   मानो  खाने को आ रही थी।  अकाल के पहले  तीन-चार वर्षों में ही चारों ओर जल के अभाव में पशु पक्षी अकाल मृत्यु को प्राप्त होने लगे।  उनकी संख्या दिन प्रतिदिन निरंतर घट रही थी।  धीरे-धीरे मनुष्यों पर भी अकाल की छाया मंडराने लगी।  और लोग काल का ग्रास बनने लगे।

जो बच रहे थे वह भी मात्र नर कंकाल भर ही थे।  ऐसा आभास होने लगा कि मानो  12 वर्षों के भीतर सृष्टि का विनाश हो जाएगा।  और तब ईश्वर को अपनी सत्ता के प्रदर्शन के लिए नए सिरे से सृष्टि का निर्माण करना होगा।  एक  दिन भगवान शिव पार्वती जी को साथ लेकर आकाश मार्ग से भ्रमण के लिए कैलाश से चले। (Akal Mrityu Story in Hindi)

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प्रजा के भाग्य से बदलता है विधान ! एक  दुःख भरी  कहानी !

अनेक स्थानों की यात्रा करने के उपरांत अंततः  वह  उस देश की सीमाओं में पहुंचे जहां अकाल की काली छाया मंडरा रही थी।  और जिसके फलस्वरूप वहां पर  निर्जनता  का साम्राज्य स्थापित हो चला था।  हिमालय के  हरे  -भरे वातावरण  से मुग्ध पार्वती जी ने जब उजाड़ संसार को देखा तो वह सहसा ठिठक उठी ।  उनके रोंगटे खड़े हो गए।  पार्वती जी ने शिवजी की ओर देखकर हाथ जोड़ दिए और जिज्ञासा की “प्रभु !  अभी तक आपने जो भी दिखाया मनोरम था।  सुंदर था। किंतु  यह कैसा देश है जहां हरे पत्तों की तो बात ही नहीं सूखे तालाबों का कीचड़ भी फट गया है।

धरती की छाती तक फट गई है।  ऐसे में मनुष्यों की क्या दशा होगी।  यह सोचकर मैं आशंकित हो उठी हूं। यहां तो जीवन का एक भी  चिन्ह  अभी तक दिखाई नहीं दिया।  इस सब का क्या कारण है “प्रभु।  मुझे भली प्रकार  याद है,  कि इससे पहले भी जब एक बार हम यहां से गुजरे थे तो यह प्रदेश  हरा भरा  और लहलहा रहा था ……  कुछ क्षण रुककर पार्वती जी फिर बोली।

किंतु महाराज, आश्चर्य है… धरती की छाती पर फैले उस  सूखे खेत में जीवन की हलचल दिखाई दे रही है।”  पार्वती जी की बातें सुनकर शिवजी हंस दिए।  बोले , देखो देवी ! यह संसार  है और यहां का धर्म परिवर्तन है।  इस परिवर्तन को लेकर चिंता करना व्यर्थ है।  चलो, हम वह कार्य संपन्न करें जिसके लिए हमने कैलाश पर्वत को छोड़ा था।  किंतु पार्वती जी ने टेक बांध ली थी कि जब तक उन्हें इस अकाल का रहस्य नहीं बताएंगे वह आगे नहीं जाएगी।

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Akal Pidit kisan ki Atmakatha in Hindi !

आखिर हारकर  शिवजी को बताना ही पड़ा।  और बोले ! इस देश पर 12 वर्षों के लिए प्रलय की छाया मडराती  रहेगी।  वर्षा की एक भी बूंद  इस काल में नहीं बरसेगी।  इस देश की अधिकांश जनसंख्या पहले से ही काल का ग्रास बन गई है।  जो बच रहे हैं , वह भी सिसक – सिसक कर मरेंगे।  पार्वती जी ने साँस भर कर पुनः जिज्ञासा की , प्रभु खेत में उस हिलती छाया के विषय में आपने कुछ नहीं बताया।”

Akal Pidit kisan ki Atmakatha in Hindi

 

भगवान शिव ने कहा, “पारो, वह बेचारा तो कोई दुखी किसान है।  वह जानता है कि वर्षा के अभाव में खेतों में हल चलाने का कोई लाभ नहीं होगा।  किंतु वह एक महत्वपूर्ण उद्देश्य से इस काम में लगा हुआ है।  उसे चिंता है कि कहीं ऐसा न हो कि उसके वंशजों में यदि भाग्य से कोई बच जाए तो वह हल चलाना ही ना भूल जाए।  इस बृत्तांतो को सुनकर करुणाभरी पार्वती जी के मुख पर चिंता की झूठी छाया फैल गई।  उन्होंने पूछा “तब तो प्रभु, आप भी आगामी 12 वर्षों तक श्रृंगी नहीं बजा सकेंगे।  12 वर्षों के बाद आप श्रृंगी बजाने की कला भूल गए तो।

Akal ek Bhishan Samasya Hindi Nibandh !

शिव जी को भोलेनाथ कहा जाता है तो वह अपने भोले स्वभाव के कारण ही, तो पार्वती जी की बात सुनकर वह चिंतित हो उठे।  श्रृंगी को हाथ में लेकर बोले “पारो, गत दो-तीन वर्षों में मैंने इसे एक भी बार नहीं बजाया।  क्यों ना आज ही एक बार बजा कर देख लू ?”   भगवान शिव ने यह कहते हुए श्रृंगी को मुंह से लगाया और पूरे उत्साह से बजाने लगे।  उसी समय आकाश में  उमड़ती -घुमड़ती काली घटायें  छाकर बरसने लगी । (Akal Mrityu Story in Hindi)

मुरझाये  हुए बेल -बूटों  में प्राणों का संचार होने लगा, तथा भूख से व्याकुल प्राणियों की आंखों में आशा की किरण चमकने लगी।  पार्वती जी ने हंसते हुए भोलेनाथ  से  प्रश्न किया ? स्वामी यह क्या आपने तो कहा था , कि  इस देश पर 12 वर्षों तक कहर  छाया रहेगा।  फिर यह बर्षा   कैसे। भगवान शिवजी भोले पार्वती जी प्रजा  के भाग्य बड़े बलवान होते हैं।  मनुष्य के भाग्य के आगे विधाता का विधान भी बदल जाता है।

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